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66 समूह में से मात्र 48 समूह का खाता खुला
27-Mar-2021 4:12 PM (27)
66 समूह में से मात्र 48 समूह का खाता खुला

बैंक का चक्कर काट रही महिलाओं ने घेरा बैंक

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
मनेन्द्रगढ़, 27 मार्च।
तीन साल से बैंक से लोन स्वीकृत नहीं हो पाने की वजह से नाराज 6 स्वसहायता समूह की करीब 40 महिलाओं ने शुक्रवार को सेंट्रल बैंक की शाखा साउथ झगराखंड का घेराव कर बैंक प्रबंधन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। 
सहायक विकास विस्तार अधिकारी मंजुला कौरव ने बताया कि बुंदेली और पाराडोल को मिलाकर 66 महिला स्वसहायता समूह का गठन किया गया है जिनमें से पिछले 3 सालों में बैंक का काफी चक्कर काटने के बाद मात्र 48 समूह का ही खाता खुल सका है,  जबकि बैंक में खाता खोलने के लिए 1 माह ही काफी है। 

उन्होंने बताया कि आज बैंक से लोन पास कराने के लिए जिले से डीपीएम रितेश पाटीदार और बीपीएम रतनदास मानिकपुरी आए हुए थे।  छह स्वसहायता समूह की करीब 40 महिलाएं लोन के लिए बैंक पहुंची थीं, लेकिन बैंक प्रबंधक ने कहा कि अभी मात्र 2 समूह को ही 10-10 हजार का लोन दिया जाएगा, क्योंकि अभी उनके पास समय नहीं है। इस प्रकार एक समूह को मात्र 10 हजार का लोन स्वीकृत किया गया जबकि लोन के लिए समूह को डेढ़ लाख की पात्रता है। 

सहायक विकास विस्तार अधिकारी ने कहा कि 10 महिलाओं के एक समूह को 10 हजार लोन अर्थात 1 महिला को मात्र 1 हजार इससे वे किस प्रकार स्वरोजगार करेंगी और उनकी आजीविका कैसे चलेगी यह आसानी से समझा जा सकता है।
 उन्होंने कहा कि साउथ जेकेडी के इस सेंट्रल बैंक में समूह की महिलाओं को काफी समस्या हो रही है। महिलाओं की 3 साल की पीड़ा है। वे एक महिला अधिकारी हैं और महिलाओं का दर्द समझती हैं। स्वसहायता समूह के लिए दिल से काम करती हैं। दो समूह को मात्र 10-10 हजार का लोन सेक्शन हुआ है इतने में क्या होगा। जिले वाले भी कुछ नहीं कर पा रहे हैं। उन्होंने कहा कि सेंट्रल बैंक की साउथ जेकेडी शाखा से पिछले 3 सालों में एक भी लोन पास नहीं हुआ है जबकि इसी बैंक की मनेंद्रगढ़ शाखा को समूह को लोन देने के लिए पुरस्कृत किया जा रहा है।
बैंक प्रबंधन के खिलाफ नारेबाजी कर रहीं पीआरपी राजमती ने बताया कि इस बैंक में दो पंचायत बुंदेली और पाराडोल आते हैं। पिछले तीन सालों में 66 समूह में से मात्र 48 समूह का खाता खुला है। खाता डेढ़ साल से फॉर्म जमा है। कुछ न कुछ कमी निकालकर लोन स्वीकृत नहीं किया जा रहा है। बैंक प्रबंधन के द्वारा मौखिक कमी बताई जाती है, लेकिन क्या कमी है यह लिखित में नहीं दिया जाता, ताकि उस कमी को दूर किया जा सके। उन्होंने कहा कि बैंक में अच्छे से काम हो या फिर एरिया बदला जाए।

चैनपुर क्लस्टर की अध्यक्ष ममता केंवट ने कहा कि शासन की बिहान योजना का उद्देश्य गरीब परिवार की महिलाओं को आजीविका से जोडऩा है। उनके क्लस्टर में 18 पंचायत आते हैं जिनमें 5 हजार महिलाएं समूह से जुड़ चुकी हैं। पाराडोल और बुंदेली की महिलाओं ने लोन के लिए आवेदन किया है। लोन के लिए महिलाएं दूर से बच्चों को साथ लेकर आती हैं, लेकिन उनका लोन स्वीकृत नहीं किया जा रहा है।  

उन्होंने कहा कि बैंक मैनेजर के द्वारा मीटिंग में आश्वासन दिया जाता है, लेकिन बैंक आने पर कोई न कोई कमी बताकर टालमटोल किया जाता है।

बैंक मित्र ने बताई पीड़ा
ग्राम पंचायत बंजी निवासी कविता यादव ने बताया कि वे साउथ जेकेडी की बैंक मित्र हैं। स्वसहायता समूह की महिलाएं दूर से चलकर बैंक में खाता खुलवाने के लिए आती हैं। फॉर्म भरने के बाद उन्हें आज खाता नहीं खोला जाएगा बाद में आना कहकर चलता कर दिया जाता है। लगभग डेढ़ वर्ष पूर्व लोन के लिए महिला समूह के 9 आवेदन बैंक में जमा किए हैं जिनमें से एक भी समूह का लोन पास नहीं किया गया है और न ही शाखा प्रबंधक द्वारा लोन के लिए कोई नया आवेदन लिया जा रहा है। 

बैंक मित्र ने अपनी पीड़ा बयां करते हुए कहा कि बैंक प्रबंधन द्वारा उन्हें बैठने के लिए एक कुर्सी तक नहीं दी जाती है। दिन भर खड़े होकर काम करना पड़ता है। खाता खोलने के लिए शाखा प्रबंधक द्वारा डॉक्यूमेंट में कमी बताए जाने पर जब वे कमी के विषय में पूछती हैं तो कहा जाता है कि तुम यहां मत आया करो। उन्होंने शाखा प्रबंधक पर दुव्र्यवहार का आरोप लगाया।

शाखा प्रबंधक ने दी सफाई
साउथ झगराखंड सेंट्रल बैंक के शाखा प्रबंधक अशोक कुमार झा से जब उनका पक्ष लेने का प्रयास किया गया तो पहले वे कुछ भी कहने से बचते नजर आए। बाद में कहा कि पिछले 3 साल में उनके पास मात्र 6 आवेदन आए हैं जिनका 9 लाख रूपए का लोन पिछले साल नवंबर में स्वीकृत किया जा चुका है। आज की डेट में एक भी एकाउंट पेंडिंग नहीं है। डॉक्यूमेंट पूरे नहीं थे इस वजह से एकाउंट खुलने में देरी हुई। महिला बैंक मित्र के साथ दुव्र्यवहार के आरोप को भी उन्होंने गलत बताया।
 

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