कोरिया

इस बार प्रतिबंधों के बीच होली
28-Mar-2021 3:49 PM (30)
इस बार प्रतिबंधों के बीच होली

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
बैकुंठपुर (कोरिया), 28 मार्च।
रंगों का पर्व होली आज उत्साह के साथ पूरे जिले में मनाया जायेगा लेकिन इस बार कोरेाना संक्रमण के चलते जिला प्रशासन द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों का भी ख्याल रखना होगा। इस बार सार्वजनिक रूप से होली मिलन समारोह आयोजित करने की इजाजत नहीं है। धारा 144 लागू किया गया है ऐसे में पांच लोग से ज्यादा एक साथ एकत्र नहीं हो सकते। होली के पूर्व शहर के बाजार में रंगों का बाजार सज गया है लेकिन इस बार प्रतिबंधों के चलते तथा कोरोना संक्रमण के कारण होली को लेकर उत्साह नहीं है। यही कारण है कि रंगों के बाजार में भी खरीदी के लिए लोगों की ज्यादा भीड़ नहीं जुट रही है। 

शनिवार के दिन शहर के रंगों के बाजार में गिनती के लोग ही सामान खरीदी करते नजर आए। रविवार अवकाश के दिन शहर में साप्ताहिक बाजार रहता है। इस दिन शहर में अंचल के लोग बाजार करने पहुंचते हैं। इस दिन पूर्वान्ह तक रंगों के बाजार में ज्यादा भीड़ नहीं देखी गई। इस तरह कोरोना के बढ़ते प्रभाव के कारण इस बार होली का पर्व फीका ही रहने की संभावना है। जिस तरह से रंगों के बाजार में खरीदी की गति धीमी रही उससे तो यही लगता है कि इस बार होली में ज्यादा रौनक नही रहेगा। 

बहरहाल होली का पर्व 29 मार्च को जिले के हर क्षेत्र में उल्लास के साथ मनाया जाएगा। उल्लेखनीय है कि होली पर्व के अवसर पर शहरों में काफी उल्लास देखा जाता है। पुरूषों के साथ महिलाओं की टोली भी दोपहर में होली के रंग में एक-दूसरे को रंगने के लिए चलती है। इसके अलावा ग्रामीण क्षेत्रों में भी होली उत्साह के साथ मनाया जाता है। जिले के तीन गांवों में तो समय से पूर्व ही होली का पर्व उल्लास के साथ मनाया जा चुका है।

जगह-जगह होलिका दहन
रंगों का पर्व होली के एक दिन पूर्व 28 मार्च को जगह-जगह होलिका दहन किया गया। शहर के ही कई स्थानों पर कई दिनों पूर्व से होलिका बनाया गया था। इसे बनाने में सबसे ज्यादा रूचि बच्चे लेते हंै जिनके द्वारा कई दिन पूर्व से झाडिय़ों को काटकर एकत्र किया जाता रहा तथा लकडिय़ां जुटाने का काम चलता रहा। गत 28 मार्च को शुभ मुहूर्त में विधि-विधान के साथ होलिका का पूजन कर जलाया गया। इस दौरान लोग परिक्रमा कर अपने दु:खों व परेशानियों को दूर करने की मन्नत भी मांगी गई। 
उल्लेखनीय है कि इस बार कोरोना संक्रमण को देखते हुए होलिका दहन में पांच लोगों के ही शामिल होने की अनुमति प्रशासन द्वारा दी गई थी। शहर के अलावा गांवों में भी उल्लास के साथ होलिका दहन किया गया।
 

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