बिलासपुर

केयर एंड क्योर में एक दिन में 8 मरीजों की मौत, परिजनों का हंगामा, पुलिस वापस लौटी, नये मरीजों को लेना बंद किया
28-Apr-2021 8:51 PM (77)
केयर एंड क्योर में एक दिन में 8 मरीजों की मौत, परिजनों का हंगामा, पुलिस वापस लौटी, नये मरीजों को लेना बंद किया

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
बिलासपुर 28 अप्रैल।
निजी अस्पतालों में कोरोना मरीजों से लाखों रुपए फीस वसूल करने के बावजूद मरीजों की जान के साथ खिलवाड़ करने को लेकर आज परिजनों का गुस्सा फूट पड़ा। 24 घंटे के भीतर 8 मरीजों की मौत होने से गुस्साए परिजनों ने प्रताप चौक स्थित केयर एंड क्योर हॉस्पिटल के सामने जमकर हंगामा किया। मौके पर पहुंची पुलिस ने किसी तरह स्थिति संभाली लेकिन अस्पताल प्रबंधन पर अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है। लोगों के रोष को देखते हुए अस्पताल में नए मरीजों की भर्ती आज नहीं ली जा रही है।

आज दोपहर करीब 1 बजे जब कुछ परिजनों को बताया गया कि उनके द्वारा भर्ती कराए गए मरीजों की मौत हो गई है। कुछ मरीजों के परिजनों से अस्पताल प्रबंधन ने इलाज के नाम पर कई लाख रुपये वसूल लिये उसके बाद हालत नहीं सुधरने का हवाला देते हुए उन्हें वापस ले जाने के  लिये फोन किया। इसके चलते वहां पहुंचे परिजनों का गुस्सा फूट पड़ा। उनका कहना था कि वे लगातार अस्पताल के बाहर चार-पांच दिन से मरीज की हालत जानने के लिए घंटों बैठकर रहे लेकिन उन्हें कोई जानकारी नहीं दी जाती है। हर बार आधी रात को ही फोन करके परिजनों को बताया जाता है कि हालत नाजुक है और मरीज को वेंटिलेटर पर रखना होगा। उनको वेंटिलेटर पर रखा जाता है या नहीं यह भी परिजनों को पता नहीं। सीधे मौत की खबर दी जाती है। एक परिजन ने बताया कि दो दिन पहले ही बताया गया था कि पांच दिन से भर्ती उनके पिता की हालत को ठीक बताते हुए दो दिन में डिस्चार्ज करने की बात कही, अचानक बताया गया कि हार्ट अटैक से मौत हो गी। एक अन्य ने बताया कि आठ दिन से उनकी बहन अस्पताल में भर्ती है। न तो उनसे मिलने दिया जा रहा है न ही डॉक्टर बता रहे हैं कि उसका क्या इलाज चल रहा था। रात में दो बजे फोन करके कहा गया कि वेंटिलेटर बेड में डालना पड़ेगा। हमारे पास कोई रास्ता नहीं था कि हम उनका कहना नहीं मानते।

शिकायकर्ताओं का कहना था कि शासन द्वारा पुलिस निर्धारित किए जाने के बावजूद भर्ती के समय ही परिजनों से 60 से 80 हजार रुपये अग्रिम जमा करा लिए जाते हैं जिनमें से आधी राशि दवाइयों के नाम पर ली जाती है। दवाओं के बारे में भी आशंका है कि इसकी जरूरत उनको रहती है या नहीं। स्टाफ के लोग बताते हैं कि यह दवा वापस मेडिकल स्टोर में लाकर छोड़ दिया जाता है। प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग से बार-बार शिकायत करने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई। जिला प्रशासन द्वारा नियुक्त नोडल अधिकारी वरुण राजपूत ने भी अस्पताल प्रबंधन को 2 दिन पहले पहुंचकर समझाइश दी थी, लेकिन इसका भी कोई असर नहीं हुआ। परिजनों का गुस्सा स्थानीय नेताओं पर भी फूट रहा था। वे कह रहे थे कि जो नेता घर-घर पहुंचकर वोट मांगते हैं वे आज मौत के मुंह में पड़े मतदाताओं की सुध लेने के बजाय घरों में दुबके हुए हैं।

अस्पताल प्रबंधन ने हंगामा होते देख कर पुलिस को सूचना दे दी और गेट पर ताला लगा दिया। पुलिस परिजनों को समझा-बुझाकर लौट गई और अस्पताल ने आज नए मरीजों को भर्ती करने से मना कर दिया। शाम तक मरीजों की शिकायतों की क्या जांच हुई है इसके बारे में कोई जानकारी प्रशासन ने नहीं दी है।

राज्य सरकार ने खूबचंद बघेल हेल्थ कार्ड और आयुष्मान योजना के अंतर्गत सभी कोरोना मरीजों को कवर करने का आदेश दिया है लेकिन अधिकांश अस्पताल इसमें आनाकानी कर रहे हैं।

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