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न्यायालय कर्मी के दुबारा पीएम का विसरा 3 दिन बाद पुलिस को मिला
16-Jun-2021 8:58 PM (100)
न्यायालय कर्मी के दुबारा पीएम का विसरा 3 दिन बाद पुलिस को मिला

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
बैकुंठपुर, 16 जून। न्यायालय कर्मी की मौत के दुबारा हुए पोस्टमार्टम का विसरा 3 दिन बाद पुलिस को तब मिला, जब पुलिस ने एक कड़ा पत्र जिला अस्पताल प्रबंधन को लिखा, वहीं मृतक के परिजन अब विसरा बदलने का आरोप लगा रहे हैं। इधर, जिला अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि विसरा देने का काम सफाईकर्मी के द्वारा किया जाता है और उनके यहां जो कर्मी पदस्थ है, उनकी लापरवाही से पूरा अस्पताल परेशान है।

इस संबंध में जिला अस्पताल के अधीक्षक डॉ. एसके गुप्ता का कहना है कि विसरा पुलिस को देने का काम सफाई कर्मी का होता है, कल शाम को पुलिस ने विसरा की मांग की थी, परन्तु सफाई कर्मी के ना होने से विसरा नहीं दिया जा सका, आज सुबह पुलिस को विसरा दे दिया गया है। उन्होंने आगे कहा कि हमारे यहां पदस्थ एक सफाई कर्मी का एक्सीडेंट हो गया वो चरचा में एडमिट है, जबकि दूसरे सफाई कर्मी को लेकर बड़ी विचित्र स्थिति बनी हुई है, पोस्टमार्टम कराने तक में बड़ी परेशानी हो रही है, हम और नए सफाई कर्मी की भर्ती करने में जुटे है, ताकि इस तरह की समस्या ना आ सके।

वहीं सिटी कोतवाली प्रभारी कमलाकांत शुक्ला का कहना है कि हमें विसरा समय पर भेजना होता है, 13 जून को दुबारा पोस्टमार्टम हुआ, 14 जून गुजर गया, 15 को पुलिस विसरा मांगने गई, जब नहीं दिया गया तो मैंने कड़ा पत्र लिखा, उसके बाद 16 जून को विसरा हमें दिया गया है। जिस समय पोस्टमार्टम हुआ, उस समय सफाई कर्मी मौजूद थे तो प्रबंधन ने उसी दिन विसरा पुलिस को क्यों नहीं दिया।

जानकारी के अनुसार 12 जून को न्यायालय के कर्मी महमूद आलम की संदिग्ध मौत का मामला सामने आया, जिसके बाद परिजनों ने पोस्टमार्टम किए चिकित्सक पर सवाल खड़े किए और दुबारा 13 जून को कलेक्टर के निर्देश पर 3 सदस्यीय चिकित्सीय दल ने पोस्टमार्टम किया। परन्तु पोस्टमार्टम का विसरा आज 16 जून को पुलिस को मिल पाया, वहीं विसरा को लेकर मृतक के परिजनों ने फिर विसरा नहीं देने के पीछे कोई ना कोई साजिश बता रहे हंै। 
मृतक के भाई मामले में लगातार शिकायती पत्र प्रशासन के अलावा उच्चाधिकरियों को लिख कर न्याय की गुहार लगा रहे हैं। उधर, जिला अस्पताल के सीएस इस बात से इंकार कर रहे हैं। उनका कहना है कि जिला अस्पताल में सफाई कर्मी की उपलब्धता नहीं होने के कारण देरी हुई है।  

ऐसी होती है जांच
संदिग्ध परिस्थितियों में मौत होने या किसी भी तरह का शक होने पर मौत के कारण जानने के लिए एक प्रक्रिया के तहत काम किया जाता है। इसमें पोस्टमार्टम करने के दौरान शव के विसरल पार्ट यानी किडनी, लीवर, दिल, पेट के अंगों का सैंपल लिया जाता है, इसे विसरा कहते हैं। इस विसरे को जांच के लिए केमिकल एक्जामिनर के पास भेजा जाता है। जांच में यह पता लगाया जाता है कि मौत किस तरह और किस कारण से हुई थी। केमिकल एक्जामिनर यह देखता है कि जिसके शव का विसरा है, उसकी मौत किस समय हुई, बताई किस समय गई। अंगों का रंग, कोशिकाओं की सिकुडऩ, पेट में मिले खाने के अवशेष के आधार पर कई तरह की अहम जानकारी उपलब्ध होती है। विशेषज्ञ ने बताते हंै कि किसी भी व्यक्ति की मौत होने पर अगर हत्या का मामला सामने आता है, अगर बयान में किसी पर हत्या करने का आरोप लगाया जाता है, तो ऐसे में मौत होने का जो कारण बताया गया, मौत वैसे हुई की नहीं यह जानने के लिए विसरे की जांच ही माध्यम है। इसके अलावा अगर कोई मौत होने की गलत वजह बताता है तो वो भी विसरे की जांच में स्पष्ट हो जाता है। विसरे की जांच होने पर ही आरोपित के खिलाफ एक्शन लिया जाता है, या ज्युडिश्यरी में केस की सुनवाई के दौरान सबूत के तौर पर रिपोर्ट को प्रस्तुत किया जाता है।

इन परिस्थितियों में विसरे की जांच होती है
बीमार होने के अलावा अगर किसी की मौत जलने से, जहर निगलने से, गोली लगने से, गला रेतने से, करंट लगने से, रेप से या डूबने से होती है, तो इन स्थितियों में शक के आधार पर पुलिस की मांग पर विसरे का सैंपल केमिकल एक्जामिनर के पास भेजा जाता है। रिपोर्ट देरी से आने से विवादास्पद केस पेंडिंग रह जाते हैं, कई बार रिपोर्ट अनुमान के अनुसार आने पर किसी केस में आरोपी बने लोगों को परेशानी भी झेलनी पड़ती है।

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