कोण्डागांव

बलराम के हौसले को नहीं रोक पाया गांव के बिजली, पानी व सडक़ का अभाव, कड़ी मेहनत कर बने असिस्टेंट प्रोफेसर
21-Jul-2021 9:17 PM (71)
बलराम के हौसले को नहीं रोक पाया गांव के बिजली, पानी व सडक़ का अभाव, कड़ी मेहनत कर बने असिस्टेंट प्रोफेसर

प्रकाश नाग

केशकाल, 21 जुलाई(‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता)। केशकाल जनपद पंचायत अंतर्गत सुदूर अंचल ग्राम मिड़दे (कुँएमारी) में निवासरत बलराम हिडको ने शुरूआत से ही कठिक परिश्रम कर वर्ष 2021 में छ.ग लोक सेवा आयोग (पीएससी) की परीक्षा में उत्तीर्ण होकर असिस्टेंट प्रोफेसर पद के रूप में सफलता हासिल किया है।

इस सफलता के लिए बलराम हिडको ने अपने माता-पिता, चाचा-चाची और केशकाल शासकीय महेश बघेल जी दंडकारण्य महाविद्यालय के तत्कालीन सहायक प्राध्यापक रहे ओम प्रकाश पटेल को अपना प्रेरणास्रोत मानते हुए तथा उनके मार्गदर्शन के चलते इस मुकाम पर पहुंचना बताया है।

इस सफलता के बारे में बलराम हिडको से पूछे जाने पर उन्होंने बताया कि मैं एक छोटे से गांव ग्राम मिडदे( कुँएमारी) में रहने वाला हूं, जो कि केशकाल से लगभग 20 किलोमीटर दूरी में है। इस पूरे क्षेत्र में किसी भी प्रकार की मूलभूत सुविधा नहीं है ना सडक़ ना बिजली ना पानी ना वाहनों का आवागमन भी नहीं है। जिसके कारण यहाँ पूरा क्षेत्र पिछड़ा हुआ है। मैंने कक्षा पहली से पांचवी तक ग्राम मिड़दे के स्कूल में पढ़ाई किया था। उसके पश्चात अपने चाचा-चाची  के घर ग्राम बाटराली स्कूल में रह कर कक्षा छठवीं से आठवीं तक पढ़ाई किया। वहीं बाद 9 से 12 बालक स्कूल केशकाल व कॉलेज की पढ़ाई भी मंै केशकाल में ही पूरा किया। इस बीच कई बार आर्थिक समस्या भी आई, लेकिन मैंने कभी भी किसी को परेशान नहीं किया और मैं अपना पढ़ाई निरंतर जारी रखा ।

तत्कालीन कलेक्टर नीलकंठ के सहयोग से पहुंचा इस मुकाम पर

बलराम ने बताया कि कुएमारी क्षेत्र सबसे सुदूर अंचल होने के कारण बहुत कम लोग ही यहां पहुंच पाते थे। एक समय जब रायपुर में पढ़ाई करना था, तब उस समय आर्थिक तंगी थी जिसके कारण मैं परेशान हो गया था और मैं आगे की पढ़ाई भी नहीं कर पा रहा था। मानसिक रूप से परिवार वालों का निरंतर सहयोग जरूर मिल रहा था, लेकिन आर्थिक रूप से कमजोर होने कारण मुझे होने वाली परेशानियों को मैं किसी को बता नहीं पता था। उस समय तत्कालीन कलेक्टर नीलकंठ टेकाम अपने आला अधिकारी कर्मचारियों के साथ लगातार कुंएमारी क्षेत्र का दौरा करते रहते थे और जन समस्या निवारण शिविर का भी आयोजन करते थे। उसी बीच मैंने भी आवेदन देकर अपनी आर्थिक स्थिति बताते हुए आगे की पढ़ाई करने की मांग रखी तो कलेक्टर ने तत्काल सहयोग करने की बात कहते हुए अपने अधीनस्थ अधिकारियों को आदेश दिया और आज उनके बताए मार्गदर्शन और सहयोग के चलते मैं असिस्टेंट प्रोफेसर बन पाया। कोंडागांव के पूर्व कलेक्टर नीलकंठ टेकाम ने भी बलराम हिडको को फोन कर बधाई दिया और उज्जवल भविष्य के लिए कामना की।

असिस्टेंट प्रोफेसर के मुकाम तक सहयोग करने वाले सभी लोगों को बलराम ने दिया धन्यवाद

बलराम हिडको ने अपने सोशल मीडिया के फेसबुक अकाउंट में शेयर करते हुए लिखा है कि इस पूरे सफलता से आज मुझे बहुत खुशी हो रही है कि मैं असिस्टेंट प्रोफेसर बन गया। मेरी इस सफलता के पीछे मेरे पापा सुरजूराम मां मुरही बाई एवं चाचा  बृजलाल हिडको, चाची महेश्वरी हिडको का विशेष योगदान रहा। यदि मेरे चाचा-चाची मां मेरे साथ नहीं होते तो शायद मैं यह मुकाम हासिल नहीं कर पाता, साथ ही मेरे प्रेरणा स्रोत सहायक प्राध्यापक ओम प्रकाश पटेल सर का भी मार्गदर्शन हमेशा मिलता रहा और आपने ही मुझे उच्च शिक्षा के लिए प्रेरित किया । सफलता की कड़ी में कोंडागांव के तत्कालीन कलेक्टर नीलकंठ टेकाम सर का भी योगदान रहा। मेरा परिवार हमेशा मेरे साथ है, मेरे भाई बहनों का हमेशा साथ मिला। केशकाल महाविद्यालय के सभी सहायक प्राध्यापक एवं पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय, रायपुर (भूगोल विभाग) के प्राध्यापक गण साथ ही मेरे सीनियर, सहपाठियों तथा नवीन पीजी आदर्श छात्रावास रायपुर के वरिष्ठ जनों, सहपाठियों से अभिप्रेरणा एवं मार्गदर्शन तथा ऋषि वर्मा सर (्यद्ग4 ह्लश स्ह्वष्ष्द्गह्यह्य ्रष्ड्डस्रद्गद्व4) का भी मार्गदर्शन मिला। मुश्किल समय में दोस्त, मेरे साथ थे जिनका सहयोग हमेशा मिलता रहा साथ ही आप सभी का सहयोग मुझे प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से मिला जिसके लिए मैं आप सभी का आभारी हूं। पुन: आप सभी का दिल से धन्यवाद आप सभी का सहयोग एवं साथ हमेशा बना रहे।

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