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वंदे भारत, खूबसूरत पैकेजिंग की कुरूप हकीकत
23-Jun-2020 12:38 PM
वंदे भारत, खूबसूरत पैकेजिंग की कुरूप हकीकत

-शिशिर सोनी
गत 18 जून को दिल्ली से वैंकूवर (कनाडा) के लिए यात्री एयर इंडिया 1143 के लिए यात्रा तय करते हैं। एक दिन पहले यात्रियों को सूचना भेजी गई कि विमान सुबह 3.30 बजे अपने नियत समय से न उड़ कर 12.30 बजे उड़ेगी। कोरोना के इस महाकाल में ज्यादातर यात्री शाम छः बजे तक दिल्ली एयरपोर्ट पहुँच गए। रात बारह बजे तक जब बोर्डिंग की घोषणा नहीं हुई तो कुछ यात्रियों ने पता किया। पता चला कि जहाज चार बजे सुबह उड़ान भरेगा। एयरपोर्ट के भीतर सभी दुकाने बन्द हैं। बड़े बूढ़े बच्चों के साथ यात्रा कर रहे यात्रियों को एयरपोर्ट पर लंबे समय तक रुकने के कारण खानपान की समस्या हो गई। किसी तरह सुबह तक राम राम जपते हुए बिताई। न एयर इंडिया का कोई कर्मचारी उनकी सुध लेने आया, न कोई मदद मिली।

17 घंटे की थका देने वाली यात्रा के बाद जब 250 यात्री वैंकूवर पहुंचे। Baggage Belt पर समान का इंतज़ार करने लगे। आधे यात्रियों का समान आया। आधे यात्रियों का समान नहीं आया। एयरपोर्ट पर हड़कंप मचा। किसी यात्री को कोई सूचना नहीं। वैंकूवर एयरपोर्ट पर तैनात कर्मियों को कोई सूचना नहीं। एयर इंडिया का वहां कोई स्टाफ नहीं। खाली हाथ यात्री समझ नहीं पा रहे थे क्या करें? आमतौर पर जब भी ऐसा होता है संबंधित यात्रियों को सूचना दी जाती है कि overload या अन्य वजहों से उनका Baggage दूसरे विमान से आयेगा। उनका पता ठिकाना पूछ कर पहुंचा दिया जाता है। मगर ये मामला तो अजीब है। सौ से ज्यादा यात्रियों के समान नहीं पहुंचा। एयर इंडिया के कर्मचरियों को पता नहीं। एयर इंडिया के सीएमडी कोई फिक्र नहीं। मंत्री अपने में मस्त हैं। ट्वीट का जवाब तक नहीं देते। बताये जाने के बाद भी कंपनी में कोई हरकत नहीं। अब बताइये ऐसे बंदे भारत का क्या मतलब। जब नाम के अनुरूप काम न हो किसका वंदन किया जाए? क्यों किया जाए? ऐसे जमूरों ने ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के किये धरे पे पानी फेरने का लगातार प्रयास किया है। ऐसे जोकरों ने ही भारत को विदेशों में मजाक का कारण बना दिया है! अपने समानो के लिए इधर उधर दौड़ रहे भारतीय यात्रियों को देख कर वैंकूवर एयरपोर्ट पर विदेशी यात्री मजा ले रहे थे।

वैंकूवर पहुँचने के बाद यात्रियों को 14 दिनों के कोरंटाईन में भेज दिया गया। उनके कपड़े, दवाइयाँ, जीवनोपयोगी अन्य समान उनके Baggage में पड़ा है। Baggage कहीं पड़ा धूल खा रहा है। तीन दिन बीत जाने के बाद भी यात्रियों से एयर इंडिया के किसी कर्मी ने कोई बात नहीं की। उनका समान उन्हें मिलेगा या नहीं, कुछ पता नहीं। कमाल के लोग हैं। कमाल की एयर इंडिया है। कमाल का वंदे भारत है।

(कनाडा से एक यात्री से बातचीत पर आधारित, एयर इंडिया के सीएमडी को मैंने खुद जानकारी दी कोई जवाब नही आया। कोई प्रतिक्रिया नहीं हुई।)

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