राजपथ - जनपथ

छत्तीसगढ़ की धड़कन और हलचल पर दैनिक कॉलम : राजपथ-जनपथ : तो उन्होंने हाथ खड़े कर दिए
13-Jun-2022 6:13 PM
छत्तीसगढ़ की धड़कन और हलचल पर दैनिक कॉलम : राजपथ-जनपथ : तो उन्होंने हाथ खड़े कर दिए

तो उन्होंने हाथ खड़े कर दिए

प्रदेश भाजपा को आजीवन सहयोग निधि के लिए जितना टारगेट मिला था, उसका करीब आधा यानी 8 करोड़ रूपए ही जुटा पाई। पार्टी के लिए चंदा जुटाने में पूर्व मंत्री अमर अग्रवाल अव्वल रहे हैं। उन्होंने आजीवन सहयोग निधि के लिए बिलासपुर से करीब डेढ़ करोड़ रूपए इकट्ठा कर दिए हैं। वैसे तो रायपुर जिले ने 70 लाख जुटाए हैं, लेकिन बिलासपुर की तुलना में आधे से भी कम है।

पार्टी के लिए चंदा जुटाने के अभियान में सक्रिय योगदान के लिए अजय चंद्राकर की भी खूब प्रशंसा हो रही है। धमतरी जिले से करीब 56 लाख रूपए एकत्र हुए हैं। इनमें से 34 लाख रूपए अजय ने अपने विधानसभा क्षेत्र कुरूद से इक_ा कर दिए हैं। रायपुर पर ज्यादा से ज्यादा राशि जुटाने का दबाव था, लेकिन यहां के नेताओं ने इससे ज्यादा रकम जुटाने में असमर्थता जता दी।

बताते हैं कि खैरागढ़ उपचुनाव, नगरीय निकाय उपचुनाव आदि के लिए भाजपा नेताओं ने रायपुर से ही राशि जुटाई थी। और अब जब आजीवन सहयोग निधि के लिए उद्योगपतियों-व्यापारियों के पास गए, तो उन्होंने हाथ खड़े कर दिए।

कुछ ना कुछ अटपटा लग रहा है !

छत्तीसगढ़ में एक बच्चा बोरवेल के गड्ढे में गिर गया तो उसे बचाने के लिए सरकार अपनी तमाम ताकत का इस्तेमाल कर रही है। राज्य की पुलिस के साथ-साथ केंद्र सरकार के सुरक्षा बल के लोग भी लगाए गए हैं, और गुजरात से भी एक ऐसे रोबो विशेषज्ञ को बुलाया गया है जो बोरवेल से बच्चों को निकालने में महारथ का दावा करता है। लेकिन दो दिनों से इन खबरों की हैडिंग देखें तो लगातार उन्हें पढ़-पढक़र कुछ अटपटा लग रहा है।

सुर्खियां कहती हैं-भूपेश ने कहा कि राहुल को गड्ढे से निकालने के लिए हर मुमकिन कोशिश हो रही है।

मुख्यमंत्री ने तमाम रात जागकर राहुल का हाथ जाना, और राहुल को बचाने के निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री ने राहुल के परिवार से बात की और भरोसा दिलाया कि राहुल को बचाया जाएगा।

भूपेश बघेल ने कहा कि राहुल की जान कीमती, और उसके लिए सब लोग कोशिश कर रहे हैं।

अब इन सुर्खियों में अटपटा क्या लग रहा है, वह तो समझ नहीं आ रहा, लेकिन कुछ ना कुछ अटपटा लग रहा है !

सवाल में ही छिपा जवाब

छत्तीसगढ़ में स्कूली शिक्षा के गिरते स्तर को लेकर बार-बार सवाल उठते हैं। नीति आयोग की हाल की स्कूल एजुकेशन क्वालिटी इंडेक्स रिपोर्ट में प्रदेश को 27वें स्थान पर रखा गया था। यानि एक दो राज्यों से ही बेहतर, बाकी से पीछे। सरकार सुधार के लिए चाहे जो कर रही है, व्यावसायिक परीक्षा मंडल ने एक सर्वे जरूर करा लिया। कल हुई बीएड की परीक्षा में पूछे गए सवालों में से एक था- एक विद्यालय के लिए सबसे बड़ी समस्या क्या है? वित्त का अभाव, अच्छे बुनियादी ढांचे का अभाव, अच्छे शिक्षको का अभाव, छात्रों का लगातार अभाव।

प्रश्न वैकल्पिक था। किसी एक जवाब पर ही निशान लगाना था। जो छात्र इन सभी को समस्या मानकर चलते हैं, उनको सही जवाब तय करने में बड़ी दिक्कत हुई।

फिर तैयार रहें झटके के लिए...

महंगाई से फिलहाल कोई राहत नहीं मिलने वाली है। छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों की अगले महीने से आमदनी और कम होने वाली है। पांच साल पहले जब जीएसटी प्रणाली लागू की गई थी तो केंद्र ने राज्यों को आश्वस्त किया था कि यदि उनका टैक्स कलेक्शन नहीं बढ़ा तो केंद्र पांच साल तक क्षतिपूर्ति करेगी। यह अवधि इस माह समाप्त हो रही है। इसका मतलब यह है कि केंद्र से हर माह मिलने वाली 6500 करोड़ रुपये की क्षतिपूर्ति से हाथ धोना पड़ेगा। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और जीएसटी मंत्री टीएस सिंहदेव ने केंद्र सरकार से क्षतिपूर्ति को 10 साल तक जारी रखने की मांग की थी। कुछ अन्य राज्यों से भी यही कहा, पर केंद्र ने ऐसा करने का कोई संकेत नहीं दिया। राज्य की वित्तीय हालत बहुत अच्छी नहीं है। चुनावी वायदे पूरे करने के लिए बार-बार कर्ज की जरूरत पड़ रही है। अनेक सरकारी, संविदा और दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों के चुनाव में किये गए वायदे पूरे नहीं किए जा सके हैं। शराबबंदी का एक बड़ा चुनावी संकल्प लिया गया था, पर राजस्व घटने की चिंता में उसे भी बंद करने के बारे में सरकार नहीं सोच पा रही। केंद्र ने जब हाल ही में पेट्रोल डीजल के दाम कुछ कम किए तो छत्तीसगढ़ सरकार ने कदम मिलाने से मना कर दिया, वैट नहीं घटाया। अब जनता और ज्यादा टैक्स वहन करने की स्थिति में नहीं है। चुनाव भी आने वाला है, कोई अलोकप्रिय फैसला लेना सरकार के लिए मुश्किल होगा। सरकार के वित्तीय सलाहकारों को आमदनी बढ़ाने का कोई तो उपाय सोचना होगा।

नई सडक़ पर मस्ती

यह सुकमा जिले के सुदूर एक गांव की तस्वीर है। आजादी के बाद पहली बार यहां चौड़ी सडक़ मशीन से बन रही है। बच्चे नाच-नाचकर अपनी खुशी जता रहे हैं।

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