राजपथ - जनपथ

छत्तीसगढ़ की धड़कन और हलचल पर दैनिक कॉलम : राजपथ-जनपथ : सांसद के मुंह से झरे फूल...

Posted Date : 12-Apr-2018

सरगुजा के सांसद कमलभान सिंह का बताया जा रहा एक ऑडियो दो-तीन दिनों से खबरों में बना हुआ है जिसमें वे अपनी ही पार्टी, भाजपा, के एक सवर्ण नेता को गालियां दे रहे हैं। इससे कुछ अलग-अलग बातें निकलकर सामने आ रही हैं। पहली बात तो यह कि आदिवासी बहुल सरगुजा में भाजपा के भीतर का हाल कुछ गड़बड़ है। एक सवर्ण पार्टी पदाधिकारी पिछले कुछ दिनों से इस सांसद के खिलाफ सोशल मीडिया और मैसेंजर पर प्रचार छेड़े हुए थे। उसी को लेकर बिफरे हुए सांसद ने तीसरे दर्जे की गालियां देते हुए यह खुली धमकी दी कि उनके बेटे-बेटियां आकर इस पार्टी पदाधिकारी को सड़क पर जूतों से पीटेंगे। सांसद को यह अंदाज था कि उनकी बात की रिकॉर्डिंग हो रही है, और इस टेलीफोन कॉल में वे इस बात को बार-बार बोल भी रहे हैं, और इसके साथ-साथ गंदी गालियां भी देते जा रहे हैं, धमकियां भी देते जा रहे हैं, और चुनौतियां भी देते जा रहे हैं कि पार्टी के बड़े नेताओं, रामविचार नेताम, या रामसेवक पैकरा जैसे ताकतवर लोगों के खिलाफ बोलने की हिम्मत क्यों नहीं होती? वे आदिवासी प्रतिष्ठा का मुद्दा भी उठा रहे हैं कि क्या आदिवासियों की कोई इज्जत नहीं है? कुल मिलाकर सरगुजा भाजपा के भीतर यह गुटबाजी तो है ही, यह सवर्ण और आदिवासी के बीच टकराव भी है, और आदिवासी नेताओं के बीच आपसी टकराव भी है। अब यह तो सचमुच भाजपा के लिए एक बड़ी चुनौती है कि ऐसे में सरगुजा में पार्टी की सीटें कैसे बढ़ाए। फिलहाल तो यह ऑडियो रिकॉर्डिंग जो कि जाहिर तौर पर सवर्ण भाजपा पदाधिकारी ने अपने फोन पर की है, और खुद ही बाहर फैलाई है, वह जिंदा रहने वाली है, और चारों तरफ घूमने वाली हैं। अब मां-बहन की इतनी गालियों का असर मतदाताओं पर कितना पड़ता है, यह देखने की बात है। 

छत्तीसगढ़ी विमान सेवा के नफे
छत्तीसगढ़ के सभी प्रमुख शहरों के बीच विमान सेवा शुरू होने जा रही है। जो लोग महत्वपूर्ण हैं और जनता के पैसों से सफर करते हैं, उनमें से बहुत से अब कारों के बजाय प्लेन से इन शहरों में आना-जाना करेंगे। दूसरी तरफ जो लोग पैसे वाले हैं, वे लोग भी सड़क पर कई घंटे बर्बाद करने के बजाय प्लेन से चलेंगे। निजी लोगों का तो कुछ नहीं, लेकिन सरकार, अदालत, और संवैधानिक संस्थाओं के जो लोग पायलट गाडिय़ों के सायरन सहित काफिले में चलते हैं, उनसे अगर सड़कों को थोड़ी-बहुत राहत मिलेगी, तो जनता को अच्छा लगेगा। आज इनकी वजह से कहीं भी ट्रैफिक रोक दिया जाता है, और कहीं भी इनके काफिले सड़कों पर खड़े हो जाते हैं। बड़े लोगों को बड़ी हवाई राह से ही चलना चाहिए, और इस तुच्छ धरती की सड़कों को आम लोगों के लिए छोड़ देना चाहिए। छत्तीसगढ़ के शहरों के बीच के ऐसे सफर से ताकतवर और पैसे वाले तबकों के बीच भी एक नया घरोबा कायम होगा क्योंकि आसपास बैठे-बैठे जान-पहचान भी बढ़ेगी। 

लोगों के उत्साह से कांग्रेस गद्गद्

नेता प्रतिपक्ष टीएस सिंहदेव चुनाव घोषणा पत्र तैयार करने के लिए जिलों का दौरा कर रहे हैं। वे व्यापारी-सरकारी कर्मचारी, किसान-मजदूर संगठनों के लोगों से बात कर रहे हैं। बिलासपुर में 60 से अधिक संगठनों अथवा उनके प्रतिनिधियों ने अलग-अलग बैठक कर उनसे चर्चा की। जिस तरह अलग-अलग तबकों के बीच अपने मुद्दों को घोषणा पत्र में शामिल करवाने होड़ मची हुई है, उससे न सिर्फ भाजपा बल्कि सिंहदेव की अपनी पार्टी में उनके विरोधी नेता भी हैरान हैं। इससे पहले तक बंद कमरे में चुनाव घोषणा पत्र तैयार होता था, लेकिन सिंहदेव ने नई पहल की है। राजनांदगांव में वे दो दिन रूके थे। इस दौरान सैकड़ों लोगों ने उनसे मुलाकात की। वे देर रात तक अलग-अलग क्षेत्रों के लोगों से उनकी समस्याओं को लेकर चर्चा करते रहे। खास बात यह है कि लोग खुद होकर उनसे मिलने आ रहे हैं। पंद्रह साल से सत्ता से बाहर कांग्रेस की सरकार बनेगी या नहीं, यह चुनाव में तय होगा, लेकिन जिस तरह जन घोषणा पत्र को लेकर लोगों में उत्साह है उससे कांग्रेस के लोग गद्गद् हैं। 

* बड़े लोगों से संबंध बनाओ, लेकिन साथ में छोटे लोगों को भी अपनाओ क्योंकि अंतिम समय कंधा वही देते हैं, बड़े लोग तो कार से सीधे श्मशान पहुंच जाते हैं।

* अरविन्द केजरीवाल के घर-दफ्तर में एलजी के एसी लगे हुए थे, निकलवाकर दूसरे ब्रांड के लगवा लिए। 

* 1998 के मामले में अगर समय रहते कार्रवाई हुई होती, तो 2002 में फुटपाथ पर सोए एक आदमी की जान बच सकती थी।


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