राजपथ - जनपथ

छत्तीसगढ़ की धड़कन और हलचल पर दैनिक कॉलम : राजपथ-जनपथ : अब दशगात्र की तैयारी

Posted Date : 15-Apr-2018

हेमचंद यादव के निधन से विशेषकर प्रेमप्रकाश पाण्डेय, बृजमोहन अग्रवाल, अजय चंद्राकर और शिवरतन शर्मा को सदमा लगा है। ये सभी युवा मोर्चा और कॉलेज के जमाने से ही एक-दूसरे के साथ रहे हैं। भाजपा की गुटीय राजनीति में भी वे साथ रहे। वर्ष-2008 में   जब प्रेमप्रकाश पाण्डेय और अजय चंद्राकर चुनाव हार गए, तो हेमचंद यादव ने दोनों का भरपूर ख्याल रखा। यादव ने अपने उच्च शिक्षा विभाग में अजय चंद्राकर को हर तरह से फैसले लेने की छूट दे रखी थी। 
विभागीय अफसरों को अजय की सिफारिश का पूरा ध्यान रखने के आदेश दिए गए थे। यादव सिंचाई, परिवहन, पंचायत और उच्च शिक्षा जैसे मलाईदार विभाग के मंत्री रहे, लेकिन वे फक्कड़ ही रहे। उनके विभाग की मलाई दूसरे ही छानते रहे। पैसे न होने के बावजूद  उनकी मित्र मण्डली ने उन्हें किसी तरह की कोई कमी नहीं होने दी। उनके जन्मदिन पर दुर्ग शहर बैनर-पोस्टर से अटा पड़ा रहा। इसका खर्चा भी उनकी मित्र मण्डली ने वहन किया था। हाल यह रहा कि गंभीर बीमारी से जूझने के लिए इलाज के पैसे तक नहीं थे। ऐसे में बृजमोहन, प्रेमप्रकाश और अजय ने भरपूर जिम्मेदारी निभाई। खुद सीएम भी इन तीनों के संपर्क में थे और यह कहा गया था कि देश से बाहर भी ले जाना पड़े, तो उन्हें ले जाए। लेकिन हेमचंद को बचाया नहीं जा सका। अब उनके दशगात्र कार्यक्रम को जोर-शोर से करने की तैयारी की जा रही है। इसमें भी तीनों मंत्री लगे हैं। 

नामकरण का सरप्राइज
आखिरकार दुर्ग विश्वविद्यालय का नामकरण दिवंगत मंत्री हेमचंद यादव के नाम कर दिया गया। पिछले कुछ समय से विश्वविद्यालय के नामकरण को लेकर माथापच्ची हो रही थी। कुछ संगठनों ने अलग-अलग सुझाव भी दिए थे। लेकिन हेमचंद यादव के निधन के बाद उच्च शिक्षा मंत्री प्रेमप्रकाश पाण्डेय ने विवि का नामकरण उनके नाम से करने की इच्छा जताई। प्रेमप्रकाश की हेमचंद से नजदीकियां   किसी से छिपी नहीं रही है। सुनते हैं कि प्रेमप्रकाश ने जब अपने मन की बात सीएम को बताई, तो वे तुरंत तैयार हो गए। सीएम भी हेमचंद को काफी पसंद करते थे। 
चर्चा यह है कि विवि के नामकरण की जानकारी प्रेमप्रकाश के अलावा बृजमोहन अग्रवाल और अजय चंद्राकर को ही थी। दिवंगत पूर्व मंत्री की अंत्येष्टि के बाद सीएम ने जब श्मशानघाट में ही विवि का नाम हेमचंद यादव के नाम से करने की घोषणा की, तो हर कोई भौंचक्का रह गया। कहा जा रहा है कि प्रेमप्रकाश और उनसे जुड़े लोगों को शंका थी कि नामकरण को लेकर देरी से वाद-विवाद भी हो सकता है। ऐसे में बिना किसी देरी के तुरंत घोषणा चाह रहे थे और सीएम ने उनकी बात रख ली। 

दो प्रसारण आगे-पीछे
छत्तीसगढ़-मध्यप्रदेश के लिए कल का दिन बड़ा महत्वपूर्ण था। बाबा साहब अंबेडकर के जन्मदिन पर दोनों प्रदेशों में एक साथ बड़े-बड़े कार्यक्रम हुए, छत्तीसगढ़ के बस्तर में प्रधानमंत्री ने दुनिया की सबसे बड़ी स्वास्थ्य बीमा योजना शुरू की, और मध्यप्रदेश के महू में  राष्ट्रपति का तकरीबन उसी समय भाषण हुआ जहां पर अंबेडकर की स्मृति में सबसे बड़ा कार्यक्रम था। जब दोनों प्रसारण साथ-साथ चल रहा था, तो यह लग रहा था कि कहीं दोनों के भाषण आपस में न टकराएं, लेकिन फिर राष्ट्रपति का भाषण पहले खत्म हो गया और उसके बाद प्रधानमंत्री का भाषण शुरू हुआ। अब यह तो नहीं मालूम कि इन दोनों के अलग-अलग समय को सावधानी से आगे-पीछे रखा गया था, या यह अचानक हुआ, लेकिन टीवी पर देखकर भाषण सुनने और नोट करने वाले मीडिया को इससे सहूलियत जरूर हो गई। 

यह छत्तीसगढ़ में ही चल सकता है...
छत्तीसगढ़ के तेंदूपत्ता फड़मुंशियों को साइकिल देने की मुख्यमंत्री की घोषणा अब पूरी होने जा रही है, और दस हजार से अधिक साइकिलों की खरीदी के आदेश दे दिए गए हैं। तेंदूपत्ता कारोबार से जुड़े एक जंगल अफसर का कहना है कि तमाम फड़मुंशी वैसे भी मोटरसाइकिल चलाते हैं, इसलिए साइकिल का पता नहीं उनके लिए कितना महत्व होगा। लेकिन मुख्यमंत्री ने अपनी तरफ से ये आदेश भी दिए हैं कि साइकिल किसी रद्दी कंपनी की न हो, और सबसे अच्छी क्वालिटी की साइकिल ही दी जाए। इसके अलावा बहुत बड़ी संख्या में स्कूली बच्चियों को भी आने वाले दिनों में साइकिलें बंटने वाली हैं। लेकिन उत्तरप्रदेश से छत्तीसगढ़ आने वाले एक बड़े भाजपा नेता ने साइकिलों के मुद्दे पर कहा कि यह छत्तीसगढ़ में तो किया जा सकता है, लेकिन भाजपा सरकार उत्तरप्रदेश में इसे नहीं कर सकती क्योंकि वहां हर साइकिल समाजवादी पार्टी का चुनाव चिन्ह बनकर भाजपा का नुकसान ही करेगी। छत्तीसगढ़ में भाजपा और कांगे्रस के अलावा जो तीसरी पार्टी मैदान में रहेगी वह है अजीत जोगी की कांग्रेस। इस पार्टी ने नारियल चुनाव चिन्ह मांगा था, जो कि उसे मिला नहीं। मिल जाता तो बाकी पार्टियां पूजा-पाठ में पता नहीं उस चुनाव चिन्ह से कैसे परहेज करतीं।

पीएम विजिट रद्द होने की खबर
इंटरनेट पर कुछ सौ रुपये में डोमेन-नेम बुक करके कुछ हजार रुपये में एक न्यूज पोर्टल शुरू करना बड़ा आसान हो गया है और जिस तरह आसानी के हर काम में गलतियों का खतरा अधिक रहता है, एक न्यूज पोर्टल ने अभी तीन दिन पहले नक्सल खतरे को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का छत्तीसगढ़ का दौरा रद्द हो जाने की खबर पोस्ट की, और फिर उसे वॉट्सऐप पर फैलाया भी। जरूरत से अधिक सस्ता औजार कई बार ऐसी चूक करवा देता है। अखबार छापना महंगा कारोबार रहता है इसलिए चौकन्नापन कुछ अधिक रहता है।

* बलात्कार का आरोपी उप्र का भाजपा विधायक सेंगर इससे पहले बसपा और सपा से विधायक था। मतलब यह कि उसे हर पार्टी में रहते हुए तजुर्बा हासिल होते रहा

* कांग्रेस करोड़ों खर्च करके अपनी छवि सुधारने की कोशिश कर रही है, लेकिन उसके नेता कुछ सौ रुपये के छोले-भटूरे खाकर उसकी मेहनत पर पानी फेर दे रहे हैं। और भक्त हैं कि 399 के रिचार्ज में हर वोटर तक खाने-पीने की फोटो फैला दे रहे हैं।
(rajpathjanpath@gmail.com)


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