राजपथ - जनपथ

छत्तीसगढ़ की धड़कन और हलचल पर दैनिक कॉलम : राजपथ-जनपथ : आरडीए की खाली कुर्सी

Posted Date : 14-May-2018

वन अफसर आलोक कटियार ने आरडीए सीईओ के पद पर पोस्टिंग के महीनेभर बाद भी जॉइनिंग नहीं दी है। वे अपनी पोस्टिंग बदलवाने की कोशिश कर रहे हैं। आरडीए सीईओ के पद पर अब तक एडिशनल  कलेक्टर स्तर के अफसर पदस्थ रहे हैं, जबकि कटियार एपीसीसीएफ स्तर के अफसर हैं। सुनते हैं कि आरडीए के पदाधिकारी भी कटियार की जगह किसी अन्य अफसर की पोस्टिंग के लिए प्रयासरत हैं। कुछ पदाधिकारियों ने विशेष सचिव स्तर के अफसर एके टोप्पो का नाम सुझाया है। टोप्पो रायपुर में एडीएम रह चुके हैं और लोकल नेताओं ने उनकी अच्छी छनती है। पदाधिकारी उनका नाम लेकर सीएम से भी मिल चुके हैं, लेकिन अभी तक नई पोस्टिंग नहीं हुई है। चुनाव आचार संहिता लगने में चार महीने बाकी हैं। कई बड़े प्रोजेक्ट पर फैसला होना है। इन सबको देखते हुए आरडीए पदाधिकारी हड़बड़ाए हैं। आलोक कटियार प्रधानमंत्री सड़क योजना, पीएमजीएसवाय में भी रहे, और वहां उन्होंने सब कुछ इतने नियम से करवाना शुरू कर दिया था कि वहां से उन्हें बिदा करके ग्रामोद्योग भेजा गया था। और अब एक और जूनियर कुर्सी पर।

यह जापानी लगता है...
इन दिनों जब हिन्दुस्तान में सरकारी कामकाज का मतलब काम न करना होता है, तब जापान से खबर आती है कि वहां हड़ताल करने वाले बस कर्मचारियों ने बस तो पूरी चलाईं ताकि लोगों को दिक्कत न हो, लेकिन उनसे भाड़ा नहीं लिया। जापान के बारे में पहले भी खबर आती रही है कि वहां कर्मचारी कारखानों में हड़ताल ऐसी करते हैं कि रोज से अधिक उत्पादन करके रख दें। ऐसे में छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में सुबह-शाम की सैर के लिए सबसे लोकप्रिय एक जगह, मरीन ड्राइव पर एक सुरक्षा कर्मचारी को देखना एक सुखद आश्चर्य था। जहां पर प्रदेश का सबसे ऊंचा तिरंगा झंडा लगा है, उसके ठीक नीचे रास्ते के सीमेंट ब्लॉक के जोड़ पर से यह कर्मचारी एक तार या तिनके से कांच के टुकड़े निकाल रहा था, और हाथ में इक_े करते चल रहा था। अगल-बगल से सैकड़ों लोग आ-जा रहे थे। उससे पूछा गया कि क्या कर रहा है तो पता लगा कि यहां रास्ते के जोड़ों पर कांच के टुकड़े बिखरे हैं, और इस सुरक्षा कर्मचारी ने जब देखा कि कई लोग घूमने के लिए नंगे पैर भी पहुंचते हैं तो बिना किसी के कहे वह खुद कांच के छोटे-छोटे से टुकड़ों को ढूंढकर, निकालकर रास्ते से हटाने लगा ताकि किसी के पैरों में चुभ न जाए। यह काम समंदर से रेत बीनने सरीखा था क्योंकि इसी जगह पर रईसों की औलादें बोतलें फोड़ती भी हैं, खाली करने के बाद। और रोजाना बिखरने वाले कांच को यह सुरक्षा कर्मचारी अपनी समझ से बीनते चलता है। इसमें उसके हाथों में कांच चुभ जाने का खतरा तो है ही, झुके-झुके घंटों यह काम करने से कमर भी टूटती होगी। यह तस्वीर लेते हुए जब उससे पूछा गया कि क्या किसी ने उसे यह काम करने को कहा है, तो उसका कहना था कि किसी के पांव में न चुभ जाए इसलिए वह खुद ही यह कर रहा है। नाम पूछने पर उसने हिचकते हुए सुरेश सिंह गौर बताया और फिर अपने काम में लग गया जिसकी कि न उसे तनख्वाह मिलती, न जो उसकी ड्यूटी है। इस तरह घंटों दोहरी कमर के साथ किया जा रहा यह काम किसी मंदिर-मस्जिद में झुककर की गई प्रार्थना से अधिक अहमियत रखता है। तस्वीर / छत्तीसगढ़
(rajpathjanpath@gmail.com)


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