राजपथ - जनपथ

छत्तीसगढ़ की धड़कन और हलचल पर दैनिक कॉलम : राजपथ-जनपथ : डीजीपी के समीकरण बदले...

Posted Date : 10-Jul-2018

केंद्र सरकार की तरफ से राज्यों में पुलिस महानिदेशक बनाने के नए नियम आए, तो हर राज्य में सबसे ऊपर के कुछ अफसरों में बेचैनी और हड़बड़ी छा गई। अफसरों को अपनी रिटायर होने की तारीख के पहले डीजीपी बनने का हिसाब-किताब सूझने लगा। केंद्र के नए निर्देशों में अब सरकार ऐसे किसी को डीजीपी नहीं बना सकेगी जिसकी नौकरी पर्याप्त बाकी न हो। छत्तीसगढ़ में फिलहाल तो राज्य सरकार मौजूदा डीजीपी ए.एन. उपाध्याय से कई बरस संतुष्ट चली आ रही है, और ऐसे आसार नहीं हैं कि चुनाव के पहले उनके नाम पर कोई और विचार किया जाए। ऐसे में अगली सरकार ही अगले किसी डीजीपी के बारे में  सोच सकती है। उस हालत में राज्य के आज के सबसे वरिष्ठ आईपीएस गिरधारी नायक का नाम वरिष्ठता की वजह से एक बार फिर लिस्ट में तो रहेगा ही। लेकिन चूंकि सरकार ने उनकी वरिष्ठता को किनारे रखकर उपाध्याय को डीजीपी बनाया है, इसलिए गिरधारी नायक की संभावना  कम लगती है, लेकिन वरिष्ठता में वे तब तक बने रहेंगे, जब तक वे रिटायर नहीं हो जाते। उनके बाद डी.एम. अवस्थी का नाम रहेगा जिनकी नौकरी इतनी लंबी बाकी है कि अगर उनको डीजीपी बनाया गया, और उपाध्याय की तरह लंबी पारी मिली, तो उनके बाद के तीनों अफसर, संजय पिल्ले, आर.के. विज, और मुकेश गुप्ता, सभी रिटायर हो जाएंगे। केंद्र सरकार के आदेश-निर्देश में अभी भी थोड़ी सी गलतफहमी की गुंजाइश बाकी है क्योंकि उसमें रिटायर होने में पर्याप्त समय बाकी होने का जिक्र है, और यह पर्याप्त कितना लंबा या छोटा हो, यह अपने-अपने नजरिए की बात होती है।

एसटीएफ है या कालापानी?
वैसे तो प्रदेश में नक्सलियों से निपटने के लिए एसटीएफ का गठन  हुआ है, लेकिन यहां पोस्टिंग को लूप लाईन माना जाता है। यानी ज्यादातर पुलिस अफसर एसटीएफ में पोस्टिंग के इच्छुक नहीं रहते। यह भी देखा गया है कि सरकार जिससे नाराज रहती है, उसे सजा के तौर पर एसटीएफ में भेज देती है। पिछले दिनों विधायक डॉ. विमल चोपड़ा से मारपीट के चलते सुर्खियों में रहे आईपीएस उदयकिरण को महासमुंद से हटाकर एसटीएफ में भेज दिया गया। उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग हो रही थी। उदयकिरण से पहले एसटीएफ में राजेश कुकरेजा पदस्थ थे। वे भी महासमुंद में डॉ. चोपड़ा से विवाद कर आए थे। चूंकि विधायक महोदय को सरकार नाराज नहीं करना चाहती थी, लिहाजा उन्हें भी हटाकर एसटीएफ में भेजा गया था। उदयकिरण के खिलाफ सख्त कार्रवाई की उम्मीद थी, लेकिन भाजपा के ही स्थानीय नेता उल्टे डॉ. चोपड़ा पर कार्रवाई के लिए दबाव बनाने लगे। चुनाव निकट है और सरकार स्थानीय नेताओं को नाराज नहीं करना चाहती थी। ऐसे में एसटीएफ में पोस्टिंग के रूप में बीच का रास्ता निकाला गया। अंगे्रजों के वक्त जिसको कड़ी सजा देनी होती थी, उसे कालापानी पर अंडमान भेज दिया जाता था। छत्तीसगढ़ में...


पत्नी या पे्रमिका अगर आप पर हावी हैं, तो उनके दबाव से निकलने का रास्ता सुझाने की यह दूकान दिल्ली में है। सात सौ रुपये घंटा देकर ज्ञान प्राप्त कर सकते हैं... और दूसरी तरफ एक भारत प्रसिद्ध चुनौती है जिसका इस्तेमाल करके आप 7 घंटों में सौतन या दुश्मन को तड़पता देख सकते हैं...

(rajpathjanpath@gmail.com)


Related Post

Comments