राजपथ - जनपथ

छत्तीसगढ़ की धड़कन और हलचल पर दैनिक कॉलम : राजपथ-जनपथ : कारोबारियों पर डोरे डालने की कोशिश

Posted Date : 09-Aug-2018

चुनाव के चलते कांग्रेस जीएसटी-नोटबंदी से खफा चल रहे व्यापारियों को रिझाने की कोशिश कर रही है। वैसे तो व्यापारी वर्ग भाजपा का परम्परागत वोटर माना जाता है, लेकिन इस बार कांग्रेस के रणनीतिकार व्यापारियों का समर्थन हासिल करने के लिए लगातार मेल-मुलाकात कर रहे हैं। व्यापारी संगठनों को साथ लाने का जिम्मा अरूण सिंघानिया और झामनदास को दिया गया है। दोनों व्यापारी नेता, व्यापारी संगठनों और कांग्रेस नेताओं के बीच पुल का काम कर रहे हैं। ये दोनों ही कारोबारी लंबे समय से कांगे्रस से जुड़े रहे हैं, और कांगे्रस के नेताओं से इनके करीबी ताल्लुकात रहे हैं।
अरूण सिंघानिया ने पिछले दिनों एक क्लब में रात्रि भोज रखा था। इसमें प्रदेश प्रभारी पीएल पुनिया ने व्यापारी नेताओं से रूबरू हुए और उनकी दिक्कतों पर लंबी चर्चा की। साथ ही चुनाव में कांग्रेस का साथ देने की अपील की। सुनते हैं कि व्यापारी नेताओं की नाराजगी इस बात को लेकर भी थी कि जीएसटी काउंसिल की 28 बैठकें हो चुकी हंै, लेकिन कांग्रेस के नेताओं ने जीएसटी की दरों में कमी को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर आवाज नहीं उठाई। पुनिया ने सफाई दी कि वे राजनीतिक मामले देखते हैं, व्यापारियों की दिक्कतों पर पार्टी नेताओं से चर्चा करेंगे। हालांकि रात्रि भोज में प्रदेश अध्यक्ष भूपेश बघेल, नेता प्रतिपक्ष टीएस सिंहदेव नहीं थे, लेकिन पार्टी के प्रमुख नेता सत्यनारायण शर्मा, गुरूमुख सिंह होरा, राजेन्द्र तिवारी और अन्य नेता थे। बात यही पर खत्म नहीं होती है। रात्रि भोज पर भाजपा नेताओं की निगाहें लगी हुई थी। चर्चा है कि उन व्यापारियों की सूची मंगाई जा रही है जो कि पुनिया और कांग्रेस नेताओं के संपर्क में रहे हैं। पहले तो मान-मनौव्वल की कोशिश होगी, लेकिन उसके बाद भी व्यापारियों के तेवर नहीं बदले तो सरकार के कुछ विभाग तो तैयार बैठे ही हैं। 
वैसे भाजपा के बहुत से नेता अनौपचारिक चर्चा में इस बात को लेकर भारी फिक्र जाहिर करते हैं कि पहले नोटबंदी ने कमर तोड़ी, उसके बाद जीएसटी ने बची-खुची हड्डियां और तोड़ डालीं। व्यापारी सरकार के सामने बेजुबान होते हैं, इसलिए उनकी नाराजगी अभी सामने नहीं आ रही है, लेकिन चुनाव के वक्त यह भारी पड़ सकता है। (rajpathjanpath@gmail.com)

 


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