राजपथ - जनपथ

छत्तीसगढ़ की धड़कन और हलचल पर दैनिक कॉलम : राजपथ-जनपथ : सेक्स-सीडी के बाद अगला धमाका

Posted Date : 10-Aug-2018

सेक्स-सीडी कांड के बाद प्रदेश में जल्द ही एक और धमाके की सुरसुराहट चल रही है। इन दिनों राजनीतिक दलों में प्रत्याशी चयन को लेकर चर्चा चल रही है। इसी बीच यह खबर सामने आई है कि एक राष्ट्रीय दल के बड़े नेता के पीए ने साथ छोड़ दिया है। हल्ला यह है कि नेताजी ने कई को टिकट का प्रॉमिस किया हुआ है, और इसके एवज में लेन-देन भी हो गया। अब बात निकली तो दूर तलक जा पहुंची।  इससे पहले कोई बवंडर मचे, नेताजी ने पीए को निकाल बाहर किया। 
बात यहीं खत्म नहीं होती है। सुनते हंै कि पीए, नेताजी के साथ करीब डेढ़ दशक तक जुड़े रहा है। वह नेताजी के भरोसेमंद होने के साथ-साथ राजदार भी रहा है। अपमानजनक तरीके से दूध में मक्खी की तरह निकाल बाहर करने से पीए बदले की फिराक में है। चर्चा है कि वह नेताजी के साथ-साथ पार्टी के दूसरे लोगों के चाल, चेहरा और चरित्र को उजागर करने की कोशिश में है और जल्द ही इसको लेकर मीडिया के सामने जाने की तैयारी में भी है। अब चुनाव में गिनती के दिन बच गए हैं। ऐसे में पीए का खुलासा प्रदेश की राजनीति में बड़ा बवाल खड़ा कर सकता है। यह भी पता चला है कि  पीए, नेताजी के विरोधी दलों के नेताओं से संपर्क की कोशिश में भी है। ताकि खुलासे के बाद उसे राजनीति संरक्षण भी मिल जाए। खैर, कुछ लोग इस धमाके का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। चुनाव का मौसम कई किस्म की गद्दारी, हिसाब चुकता करने, और विभीषण बनने का भी रहता है। बहुतों को अंतरात्मा की आवाज भी सुनाई देती है, और विचारधारा को बदलने का समय भी रहता है। 
एक लोकप्रिय अफसर पर निगाह
मंझले दर्जे के कुछ अफसरों के कांगे्रस पार्टी से चुनाव लडऩे की खबरों के बीच अब चर्चा है कि राज्य से एक नौजवान आईएएस अफसर को भी एक पार्टी चुनाव लड़वाना चाहती है क्योंकि काम की कामयाबी के साथ-साथ उसे शोहरत और साख भी मिली हुई है। अब यह बात किसी किनारे पहुंचती है या नहीं यह देखने की बात है। लेकिन अगर किसी वजह से विधानसभा चुनाव तक बात नहीं बनी, तो फिर लोकसभा चुनाव में और अधिक जरूरत और संभावना रहेगी, ऐसा लोगों का कहना है।

चुनौतियों ने चेहरा बदला
एक वक्त था जब लोग एक-दूसरे को चुनौती देने के लिए कहते थे कि अपनी मां का दूध पिया हो तो ऐसा करके दिखा। एक दूसरी चुनौती रहती थी, अपने बाप की औलाद हो तो ऐसा करके दिखा। एक तीसरी और घटिया चुनौती रहती थी कि एक बाप की औलाद हो तो ऐसा करके दिखा। अब इन दिनों सोशल मीडिया पर चुनौती ने अंदाज कुछ बदल लिया है। अब लोग कहते हैं कि अगर देशभक्त हो तो ऐसा करके दिखाओ, सरहद पर सैनिकों का सम्मान हो तो ऐसा करके दिखाओ, मां-बाप का सम्मान हो तो यह वीडियो पोस्ट करके दिखाओ। अब वक्त ऐसा आ गया है कि सोशल मीडिया पर किसी बात को, और अमूमन भड़काऊ या झूठी बात को आगे बढ़ाने के लिए लोगों को चुनौती दी जाती है कि अगर देश से मोहब्बत हो, या अगर सच्चे हिंदू हो, सच्चे हिंदुस्तानी हो तो इसे दुबारा पोस्ट करो, या सौ लोगों को भेजो। एक वक्त था जब संतोषी माता या किसी और देवी-देवता के पर्चे बंटते थे कि ऐसे 21 पर्चे आगे बांटने पर इच्छा पूरी होगी, और न बांटने वाले की संतान मर जाएगी। समय के साथ-साथ तौर-तरीके और चुनौतियां सब बदल गए।
प्रदीप गांधी की साहित्य सेवा 
संसद में सवाल पूछने के नाम पर पैसा लेते कैमरे में कैद होने के बाद बर्खास्त किए गए सांसदों में से एक प्रदीप गांधी फिर सुर्खियों में हैं। वे सरकारी खर्चे पर मारीशस में आयोजित हिन्दी सम्मेलन में शिरकत करने जा रहे हैं। उनके साथ हिन्दी अकादमी के संचालक शशांक शर्मा भी जाएंगे। इससे प्रदेश के बाकी साहित्यकार हैरान हैं। 
साहित्यकारों की आपत्ति इस बात को लेकर है कि प्रदीप गांधी का साहित्य से दूर-दूर तक कोई लेना-देना नहीं है। और उनकी छवि दागदार रही है। ऐसे में विश्व स्तरीय इस सम्मेलन में राज्य का प्रतिनिधित्व का मौका दिया जाना उचित नहीं है, लेकिन प्रदीप गांधी इस विवाद को गैर जरूरी बता रहे हैं। उनका तर्क है कि वे हिन्दी के समर्थक हैं। गायत्री परिवार से जुड़े हैं और गायत्री परिवार से जुड़ी साहित्य का लगातार प्रचार-प्रसार करते रहे हैं। जिन्हें जाने का मौका नहीं मिल पाया, उनका दुखी होना वाजिब है। शशांक शर्मा, प्रदीप गांधी को हिन्दी सम्मेलन में भेजे जाने के फैसले का बचाव करते हुए अजीब तर्क दे रहे हैं कि गांधी पर्सनालिटी डेवलपमेंट के काम में भी जुड़े हुए हैं। अब साहित्य का पर्सनालिटी डेवलपमेंट से क्या संबंध? (rajpathjanpath@gmail.com)


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