राजपथ - जनपथ

छत्तीसगढ़ की धड़कन और हलचल पर दैनिक कॉलम : राजपथ-जनपथ : बेहतर की तलाश का मौसम

Posted Date : 11-Sep-2018

सरगुजा संभाग की विधानसभा सीटों में भाजपा बेहतर प्रत्याशी की खोजबीन में जुटी है। पार्टी दो बार सर्वे भी करा चुकी है। पार्टी के रणनीतिकार स्थानीय दिग्गज नेताओं के तेवर से परेशान हैं। सुनते हैं कि राज्यसभा सदस्य रामविचार नेताम अपनी परम्परागत रामानुजगंज सीट के बजाए प्रतापपुर से टिकट चाहते हैं। जबकि पार्टी उन्हें रामानुजगंज से ही प्रत्याशी बनाने की सोच रही है। प्रतापपुर सीट का प्रतिनिधित्व गृहमंत्री रामसेवक पैकरा करते हैं। जिनकी कंबल वाले बाबा के चक्कर में हालत पतली मानी जा रही है। इससे परे दिवंगत पूर्व प्रदेश अध्यक्ष शिव प्रताप सिंह के बेटे विजय प्रताप भी प्रतापपुर से टिकट चाहते हैं। कुल मिलाकर प्रतापपुर की टिकट को लेकर दिग्गजों में मची खींचतान से आसपास की सीटों पर भी नुकसान अंदेशा जताया जा रहा है। 
सरगुजा की भटगांव सीट को लेकर एक अलग ही तरह का मामला सामने आया है। भटगांव अनारक्षित सीट है और भाजपा के स्थानीय विरोधी नेताओं ने यह खबर फैला दी कि पूर्व विधायक श्रीमती रजनी त्रिपाठी चुनाव नहीं लडऩा चाहती हैं, जबकि वे पूरे पांच साल सक्रिय रहीं हैं और अब उन्हें जगह-जगह अपनी स्थिति स्पष्ट करनी पड़ रही है। अफवाह फैलाने में कांग्रेस नेताओं का कोई मुकाबला नहीं रहा है और इसके चलते कईयों की टिकट भी कट गई। 
पुराने कांग्रेसी बताते हैं कि गुजरे जमाने के बड़े कांग्रेस नेता मथुरा प्रसाद दुबे को लेकर दिल्ली में यह अफवाह फैल गई कि वे अस्वस्थ हैं और चुनाव नहीं लडऩा चाहते हैं। पार्टी हाईकमान ने दुबे की जगह उनके भांजे राजेन्द्र प्रसाद शुक्ल को कोटा सीट से टिकट दे दी। जब शुक्ल के नाम की अधिकृत घोषणा हुई, तब दुबेजी को गड़बड़ी का पता चला। बाद में वे दिल्ली पहुंचे और वरिष्ठ नेताओं को सफाई दी कि वे स्वस्थ हैं और चुनाव लडऩा चाहते हैं, लेकिन तब तक शुक्ल के नाम बी-फार्म जारी हो चुका था और दुबेजी प्रत्याशी बनने से रह गए थे। 

कांग्रेस में माथापच्ची जारी
कांग्रेस में टिकट को लेकर काफी माथापच्ची हो रही है। कुछ दिग्गज नेताओं की स्थिति अच्छी नहीं होने के बावजूद चुनाव समिति के सदस्य  उनकी जगह अन्य मजबूत नामों पर जोर नहीं दे पा रहे हैं। सुनते हंै कि भानुप्रतापपुर सीट से मनोज मण्डावी की टिकट सिर्फ इस आधार पर फायनल मानी जा रही है कि वे आदिवासी कांग्रेस के राष्ट्रीय पदाधिकारी हैं। जबकि जोगी कांग्रेस से पुराने कांग्रेस नेता मानक दरपट्टी के चुनाव मैदान में उतरने से मनोज की राह कठिन हो गई है। ऐसा नहीं है कि यहां पार्टी के पास मजबूत विकल्प नहीं है। जिला पंचायत सदस्य और पूर्व जनपद अध्यक्ष रह चुके वीरेश ठाकुर भी यहां से टिकट की रेस में हैं। उनकी साख अच्छी है। 
वीरेश के पिता सत्यनारायण ठाकुर भानुप्रतापपुर से विधायक रह चुके हैं। उनके भाई  वीबीएस ठाकुर मप्र में एडीजी रहे हैं। कुल मिलाकर वीरेश का परिवार पढ़ा-लिखा और सम्मानित माना जाता है। ऐसे में मजबूत विकल्प होने के बावजूद वीरेश को टिकट की रेस में फिलहाल मनोज से पीछे ही माना जा रहा है। कुछ सुझाव यह भी है कि वीरेश को भानुप्रतापपुर की जगह कांकेर से प्रत्याशी बना दिया जाए। हालांकि अभी तक भानुप्रतापपुर और कांकेर के लिए सभी नेता एक राय नहीं हो पाए हैं। ऐसे में अंतिम क्षणों में कोई बदलाव हो जाए, तो आश्चर्य नहीं होगा। 

 


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