राजपथ - जनपथ

छत्तीसगढ़ की धड़कन और हलचल पर दैनिक कॉलम : राजपथ-जनपथ : अबकी बारी शैलेश भारी?

Posted Date : 13-Sep-2018

शैलेश नितिन त्रिवेदी, किसी परिचय के मोहताज नहीं है। वे राज्य बनने के बाद से मीडिया में कांग्रेस का पक्ष रख रहे हैं। इंजीनियरिंग में स्नातक शैलेश को लेकर पार्टी के एक खेमे में धारणा रही है कि वे जिस किसी के साथ रहे, मीडिया में उनका पलड़ा भारी रहा है। छात्र नेता के रूप में कभी अजीत जोगी के साथ अपने राजनीतिक कैरियर की शुरूआत करने वाले शैलेश जब उनसे अलग हुए, तो उसके बाद से जोगी का प्रचार तंत्र ही गड़बड़ा गया। मुद्दों की गहरी समझ और बेहद मेहनती होने के कारण वे न सिर्फ कांग्रेस बल्कि दूसरी पार्टियों के मीडिया-प्रवक्ताओं से भारी पड़ते हैं। 

शैलेश विधानसभा चुनाव लडऩे की इच्छा रखते हैं। वे अपने गृह नगर बलौदाबाजार से टिकट चाहते हैं। खास बात यह है कि राज्य बनने के बाद प्रदेश में चार बार विधानसभा के चुनाव हुए हैं। हर बार बलौदाबाजार से कांग्रेस से टिकट के दावेदारों के पैनल में उनका नाम रहा है। इस बार भी बलौदाबाजार से टिकट के लिए जो तीन नाम योग्य समझे गए हैं, उनमें शैलेश का नाम भी बताया जा रहा है।  उन्हें चुनाव मैदान में उतारने के लिए पार्टी कितनी गंभीर है, इसका पता उनसे जुड़े एक किस्से से लगाया जा सकता है। हुआ यूं कि 6 साल पहले तत्कालीन प्रदेश प्रभारी बीके हरिप्रसाद सड़क मार्ग से बिलासपुर में कार्यक्रम में शामिल होने गए। उनके साथ गाड़ी में दिवंगत प्रदेश अध्यक्ष नंदकुमार पटेल और अन्य वरिष्ठ नेता भी थे। इन नेताओं का  जगह-जगह स्वागत हुआ। शैलेश ने भी अपने साथियों के साथ सिमगा में हरिप्रसाद और अन्य नेताओं का स्वागत किया। 
स्वागत के बाद सभी ने गाड़ी में शैलेश की कार्य कुशलता की तारीफ की और उनकी चुनाव लडऩे की इच्छा पर भी चर्चा की। सुनते हंै कि एक प्रमुख नेता ने सुझाव दिया कि शैलेश को चुनाव लड़ाने के बजाए राज्यसभा में भेजा जाना चाहिए ताकि उसकी प्रतिभा का सही उपयोग हो सके। बाकियों ने भी इसमें हामी भरी। खास बात यह है  कि उस समय की चर्चा के दौरान गाड़ी में मौजूद नेताओं ने दो अभी भी चुनाव समिति में हैं और प्रत्याशी चयन में अहम भूमिका निभा रहे हैं। ऐसे में शैलेश को लेकर उनकी धारणा बदली है या नहीं, टिकट  की घोषणा के बाद ही पता चल पाएगा। 

कार्यक्रम के बाद उम्मीद न थी...
आयकर की टीम दो बड़े स्पंज आयरन उद्योग समूहों के यहां जांच पड़ताल में जुटी है। इनमें से एक राजेश अग्रवाल, रीयल इस्पात के मालिक हैं। यह भी संयोग है कि अग्रवाल के ही वृंदावन हॉल में पिछले दिनों आयकर कमिश्नर पीके दास का कार्यक्रम हुआ था। इसमें राजेश और उनकी कंपनी के लोगों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। आयकर कमिश्नर के छापों को लेकर विचार से वहां मौजूद उद्योगपति -व्यापारी काफी संतुष्ट थे और चुनाव से पहले छापों का अंदेशा नहीं था। छापेमारी से उद्योग जगत में हड़कंप मचा है। दूसरे स्पंज आयरन कारोबारी अनिल नचरानी पहले से ही चर्चा में थे। अनिल ने कपड़े व्यवसाय से स्पंज आयरन के क्षेत्र में कदम रखा था। और वे विमल जैन से विवादों को लेकर सुर्खियों में रहे हैं। सुनते हैं कि दोनों के बीच विवाद को निपटाने के लिए कई नेताओं ने हस्तक्षेप भी किया था। ब्याज के लंबे-चौड़े काम के चलते नचरानी परिवार की चर्चा होने लगी थी। ऐसे में जब आयकर टीम ने उनके यहां दबिश दी, तो कारोबारियों को आश्चर्य नहीं हुआ। 


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