राजपथ - जनपथ

छत्तीसगढ़ की धड़कन और हलचल पर दैनिक कॉलम : राजपथ-जनपथ : दारू कहां से आएगी?

Posted Date : 08-Oct-2018

विधानसभा चुनाव का बिगुल बज चुका है। निचले तबके के मतदाताओं को प्रभावित करने के लिए शराब का इस्तेमाल खूब होता है। सत्ता हो या विपक्ष, दोनों की कोशिश होती है कि किसी भी तरह शराब  मतदाताओं तक पहुंच जाए। मगर, इस बार मतदाताओं तक शराब पहुंचाना आसान नहीं होगा क्योंकि शराब कारोबार का सरकारीकरण हो गया है। चुनाव आयोग को रोजाना शराब खपत की जानकारी भेजनी पड़ रही है। शराब कारखानों पर भी आयोग की पैनी नजर है। दुकान और  कारखानों तक में कैमरे लगाए गए हैं। यानी हर गतिविधियों पर आयोग निगरानी रख रहा है। 
सत्ता पक्ष के लोग फिर भी शराब की उपलब्धता को लेकर आश्वस्त हैं, क्योंकि कैमरे को थोड़ी देर के लिए बंद-चालू भी किया जा सकता है और कारखानों से शराब निकाली जा सकती है, पर विपक्ष के प्रत्याशियों को शराब के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ सकती है। इन सबके बीच कोचिए सक्रिय हो गए हैं और वे संभावित दावेदारों से मिल भी रहे हैं। उनकी तरफ से यह कहा जा रहा है कि शराब तो मिल जाएगी, लेकिन थोड़ी महंगी होगी। अभी पिछले हफ्ते ही महासमुंद जिले में एक ट्रक शराब पकड़ाई है जो कि मध्यप्रदेश से आई हुई थी। अब छत्तीसगढ़ से लगे हुए कई राज्य ऐसे हैं जहां न चुनाव हैं, और न ही चुनाव आयोग की नजर। इसलिए महाराष्ट्र, ओडि़शा, झारखंड और उत्तरप्रदेश से भरपूर आयात की संभावना है।

चुनावी गिरफ्तारी का खतरा
भाजपा के एक पार्षद पर ओडिशा पुलिस की पैनी नजर है। पार्षद के खिलाफ बलांगीर के थाने में उपचुनाव के दौरान हत्या के प्रयास का मामला दर्ज किया गया था। पार्षद पुलिस में प्रकरण दर्ज होते ही भागकर यहां आ गए थे। ओडिशा पुलिस ने कई बार यहां के उच्च पदस्थ पुलिस अफसरों को सूचना देकर पार्षद की गिरफ्तारी के लिए मदद मांगी थी।  पार्षद संगठन के प्रिय माने जाते हैं। यही वजह है कि राजनीतिक दबाव के चलते उनकी गिरफ्तारी नहीं की गई। अब चुनाव आचार संहिता प्रभावशील हो गई है। पुलिस को राजनीतिक दबाव में काम करते हुए नहीं दिखना है, इसलिए अलग-अलग माध्यमों से पार्षद को सूचना भेजकर सरेंडर करने के लिए कहा गया है। पर पार्टी के नेता उनकी गिरफ्तारी नहीं चाहते हैं क्योंकि चुनाव प्रचार अभियान में पार्षद की भूमिका अहम रहेगी। एक प्रमुख नेता ने सोच-विचार कर पार्षद को पड़ोसी जिले के अपने विधानसभा क्षेत्र में चलने के लिए कहा है। फिर भी उनकी गिरफ्तारी का खतरा कम होता नहीं दिख रहा है। ओडिशा पुलिस कभी भी उन्हें ले जाने के लिए यहां धमक सकती है। 
(rajpathjanpath@gmail.com)


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