राजपथ - जनपथ

छत्तीसगढ़ की धड़कन और हलचल पर दैनिक कॉलम : राजपथ-जनपथ : जिनके नाम सीडी में, वही सही?

Posted Date : 11-Oct-2018

विधानसभा सीटों की कथित सौदेबाजी की सीडी के चलते कांग्रेस की राजनीति गरमाई हुई है। सुनते हैं कि छानबीन समिति की बुधवार को दिल्ली बैठक में उन दो सीटों डोंगरगढ़ और खुज्जी के दावेदारों के नाम पर भी चर्चा हुई। चर्चा में एक  सीनियर लीडर ने उन्हें ही टिकट देने की पैरवी की, जिनका जिक्र सीडी में हुआ था। हालांकि ये दावेदार मजबूत माने जाते हैं, लेकिन पार्टी के बाकी नेता किसी झंझट में नहीं पडऩा चाहते हैं। ऐसे में पार्टी नेता न सिर्फ नांदगांव जिले बल्कि बाकी सीटों पर भी प्रत्याशी चयन में काफी सतर्कता बरतते दिख रहे हैं। 
रायपुर सीटों से कितने ब्राम्हण?
महापौर प्रमोद दुबे को रायपुर उत्तर या फिर पश्चिम से टिकट का मजबूत दावेदार माना जा रहा था, लेकिन बदली परिस्थितियों में उनकी टिकट खतरे में पड़ गई है। भूपेश बघेल उन्हें रायपुर उत्तर से टिकट दिलाना चाह रहे थे, जो कि अब संभव नहीं दिख रहा है। मोटे तौर पर यह माना जा रहा है कि रायपुर दक्षिण को छोड़कर बाकी तीनों सीटों पर पुराने प्रत्याशियों को ही रिपीट किए जाएंगे, यानी रायपुर पश्चिम से विकास उपाध्याय, उत्तर से कुलदीप जुनेजा और रायपुर ग्रामीण से सत्यनारायण शर्मा प्रत्याशी होंगे। एक तो शहर की चार में से तीन सीटों पर ब्राम्हण को टिकट कोई पार्टी देना नहीं चाहेगी, और फिर यह भी है कि प्रमोद दुबे के नाम को चलाने वाले अकेले भूपेश थे, और उनके बदले हुए दिन अब प्रमोद दुबे के खिलाफ जा रहे हैं।
भूपेश खेमे के कमजोर होने से यह भी माना जा रहा है कि भिलाई नगर से देवेन्द्र यादव और वैशाली नगर से बृजमोहन सिंह को टिकट दी जा सकती है। चर्चा यह है कि भूपेश, देवेन्द्र यादव को वैशाली नगर और भिलाई सीट से बदरूद्दीन कुरैशी को लड़ाने के पक्ष में रहे हैं। सांसद ताम्रध्वज साहू के बृजमोहन सिंह के पक्ष में अड़े होने के कारण यह स्थिति बनी है। 
सिंधी समाज और बृजमोहन
वैसे तो सिंधी समाज भाजपा का परम्परागत वोटबैंक माना जाता है, लेकिन एक-दो मौकों पर समाज ने अपना रूख बदला भी है। वर्ष-09 के महापौर चुनाव में समाज ने कांग्रेस का साथ दिया था। इसके कारण भाजपा की महापौर प्रत्याशी प्रभा दुबे को मामूली वोटों से हार का सामना करना पड़ा। पिछले दिनों समाज की भूमिका को लेकर वीआईपी रोड स्थित एक धर्मशाला में सिंधु सभा की बैठक हुई। जिसमें कांग्रेस और भाजपा के कई नेता मौजूद थे। बैठक में बृजमोहन अग्रवाल ने ताल ठोंककर कह दिया कि सिंधी समाज के 99 फीसदी लोग उनके साथ हैं। कांग्रेस नेता रमेश वल्र्यानी की तरफ मुखातिब होते हुए वल्र्यानी जैसे एक फीसदी लोग ही हैं जो कि उनके साथ नहीं हैं। अग्रवाल की इस टिप्पणी पर जोरदार तालियां बजी। अब यह चर्चा शुरू हो गई है कि सिंधी समाज के नेता रमेश वल्र्यानी, आनंद कुकरेजा सहित कई अन्य को कांगे्रस ने संगठन में अहम पद दिया है। बावजूद इसके वे समाज के भीतर अपनी पकड़ साबित नहीं कर पा रहे हैं और टिकट की दावेदारी कर रहे हैं। 

(rajpathjanpath@gmail.com)

 


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