राजपथ - जनपथ

छत्तीसगढ़ की धड़कन और हलचल पर दैनिक कॉलम : राजपथ-जनपथ : एक टिकट, दो बी-फॉर्म का राज

Posted Date : 03-Nov-2018

रायपुर उत्तर विधानसभा सीट पर जोगी कांग्रेस ने टिकट के दो दावेदारों को बी-फॉर्म जारी कर दिया है। वैसे तो जोगी कांग्रेस में जो न हो वो कम है, लेकिन इस अनोखी घटना का राज हर कोई जानने को बेताब है, एक टिकट के लिए दो बी-फॉर्म दिए जाने को लेकर तरह-तरह की कहानियां सुनने को मिल रही है। एक तो यह कि टिकट के दोनों दावेदार अमर गिदवानी और नितिन भंसाली जोगी परिवार में अच्छी पकड़ रखते हैं। इसलिए इसे दोनों के बीच प्रतिस्पर्धा से जोड़कर देखा जा रहा है। दूसरी कहानी भाजपा के सेठ प्रत्याशी की ओर इशारा कर रही है। जोगी बंगले के ही एक दमदार नेता की मानें तो अमर गिदवानी के चुनाव लडऩे से भाजपा के वोट बैंक में सेंध लगेगी। आखिर गिदवानी अपने समाज से ही वोट बटोरेंगे, जो श्रीचंद सुंदरानी के लिए नुकसानदेह साबित होगा। इसीलिए गिदवानी की जगह भंसाली को भी बी-फॉर्म दे दिया गया है, लेकिन गिदवानी को मैदान से हटाने का फैसला अभी फाइनल नहीं हुआ है। 

 प्रत्याशियों की भीड़ का राज 
इस बार विधानसभा चुनाव में लगभग हर सीट पर प्रत्याशियों की भीड़ दिख रही है। चुनाव के पंडितों के अनुसार धनलाभ के लिए चुनाव बेहतर अवसर है। प्रत्याशियों को चुनाव लडऩे को धन मिलता है और चुनाव मैदान से हटने या फिर घर बैठने का भी धन लाभ प्राप्त होता है। रायपुर दक्षिण सीट पर परंपरागत रूप से अधिक प्रत्याशी मैदान में हैं। यहां 50 में से 23 प्रत्याशी मुस्लिम समाज से हैं। दरअसल इस क्षेत्र में पिछले 27 सालों से मुस्लिम समाज एकदम से सक्रिय हो जाता है, और उसकी वजह से कांग्रेस को वोटों का नुकसान लगातार बना हुआ है।  सौ-दो सौ वोट भी पाने वाले मुस्लिम प्रत्याशी को सफल मान लिया जाता है। हजार-हजार वोटों को मिलाकर ही बड़ा फासला बनता है। आखिर में चुनावी मैदान में जो प्रत्याशी बाकी बचेंगे, वे शहर के अलग-अलग हिस्सों से कुछ दर्जन या कुछ सौ वोट पाने के हकदार साबित होंगे। लेकिन इस बार अजमेर जाना कितने लोगों को नसीब होगा, यह अंदाज लगाना मुश्किल है। 
पिछले चुनाव का नतीजा देखें तो अब्दुल नईम खान को 929, शमशेर अली को 737, रईस फाजिल को 596, श्रीमती नजत अली को 259, मो. सगीरुद्दीन को 264, नियाज भाई को 247, अब्दुल कय्यूम खान को 205, वाशिम अफरीदी को 179, अजमत भाई को 105, अनवर भाई को 91, हबीब भाई को 86, मो. अफजल को 85, मजहर इकबाल को 73, मौलाना सलाम को 65, इलियास हुसैन को 64, महबूब खान को 59, फिरोज खान को 57, मो. वासिम रिजवी को 57, फरहा नाज को 50, ताजदार खान को 49, हाजी सैय्यद हकीमुद्दीन को 40 वोट मिले थे। 

दरबारियों का दुख 
विधानसभा चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस ने अपने प्रदेश अध्यक्ष भूपेश बघेल को किनारे लगा दिया है। बघेल की यह हालत यहां उनके कुछ दरबारियों को बेहद खल रही है। वे दुखी हैं और मौका मिलते ही भड़ास भी निकाल रहे हैं। सुनते हैं कि कांग्रेस भवन में रोज दोपहर को कुछ दरबारी एकत्र होते हैं और एक कमरे में बैठकर पुुनिया, सिंहदेव, महंत, जैसों को घंटों कोसते हैं और फिर घर लौट जाते हैं। वो भी दिन थे, जब प्र्रदेश अध्यक्ष से मुलाकात करने के लिए लोग इन्हीं दरबारियों के आगे-पीछे घूमते थे। 

तोडफ़ोड़ के फायदे 
प्रत्याशियों की सूची जारी होने के बाद कांग्रेस के दफ्तरों में हुई तोडफ़ोड़ और उससे हुए नुकसान को तो लोगों ने घर बैठे देख लिया। कांग्रेसजन अब तोडफ़ोड़ करवाने के फायदे भी देख रहे हैं। पार्टी के प्रदेश मुख्यालय राजीव भवन में जहां तोडफ़ोड़ करवाई गई थी, वहीं शुक्रवार को अजीब नजारा देखने को मिला। तोडफ़ोड़ करवाने वाले युवा पार्षद को पार्टी की ओर से हीरो के रूप में पेश किया गया। बकायदा उस युवा पार्षद की प्रेस कांफ्रेंस करवाई गई। प्र्रेस कांफ्रेंस में उस युवा पार्षद ने तोडफ़ोड़ के लिए माफी मांगी और पार्टी ने उसे माफ भी कर दिया। बताया गया कि तोडफ़ोड़़ से हुए नुकसान की भरपाई युवा पार्षद ही करेंगे। एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने उस पार्षद की तारीफ के कसीदे पढ़ते हुए यहां तक कह दिया कि वो तन-मन और धन से कांग्रेस के साथ हैं। ऐसे में टिकट से वंचित अन्य दावेदार हाथ मल रहे हैं कि उन्होंने हीरो बनने और पब्लिसिटी का एक बेहतर अवसर गवां दिया है।

नोट लाने-ले जाने का इंतजाम...
प्रदेश में नोटों की धरपकड़ ऐसी चल रही है कि नेता तो नेता, कारोबारी भी परेशान हो चुके हैं। ऐसे में एक पार्टी ने नोटों के लिए एक तरकीब निकाली है। इन दिनों राजधानी रायपुर में घर तक खाना पहुंचाकर देने वाले नौजवान मोटरसाइकिलों पर पीछे बड़े-बड़े बैग लिए सरपट आते-जाते हैं। एक पार्टी ने इसी मार्के वाले ऐसे ही बैग का इंतजाम किया है, और आधी रात तक आसानी से उसका इस्तेमाल हो सकता है। एक बैग में करोड़ों के नोट आ सकते हैं, या दर्जनों लीटर दारू।

भाई नहीं तो ससुर की टिकट से खुश
 राज्य पुलिस के एक बड़े अफसर के घर में कुछ दिनों से कांग्रेस की टिकट नहीं मिलने का गम अचानक से खुशियों में बदल गया और यह खुशी छत्तीसगढ़ के रास्ते नहीं, बल्कि मध्यप्रदेश से होकर घर तक पहुंची। सुनते हैं कि राजधानी में पदस्थ एएसपी प्रफुल्ल ठाकुर के भाई वीरेश ठाकुर कांकेर की भानुप्रतापपुर सीट से कांग्रेस से टिकट की उम्मीद से थे। पर कांग्रेस ने मनोज मंडावी पर फिर भरोसा किया। सुनते हैं कि यह परिवार लंबे समय से कांग्रेस समर्थक रहा है। टिकट नहीं मिलने का मलाल के बीच एएसपी ठाकुर के परिवार में उस वक्त दुख सुख में बदल गया जब मध्यप्रदेश के छिंदवाड़ा के अमरवाड़ा सीट से ससुर प्रेमनारायण ठाकुर को भाजपा ने मैदान में उतारा। चर्चा है कि एएसपी ठाकुर का परिवार इस बात से ही खुश हो गया है कि छत्तीसगढ़ में कांग्रेस ने भले ही उनके परिवार को नजरअंदाज किया, लेकिन मध्यप्रदेश भाजपा में उनकी सुनी गई। कभी दिग्विजय सिंह सरकार में परिवहन मंत्री रहे प्रेमनारायण ठाकुर का राजनीतिक रसूख अमरवाड़ा इलाके में बरकरार रहा। गत चुनाव में वहां से एएसपी ठाकुर के साले साहब को भाजपा ने मौका दिया था और वे मामूली अंतर से पराजित हुए थे।   rajpathjanpath@gmail.com


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