राजपथ - जनपथ

छत्तीसगढ़ की धड़कन और हलचल पर दैनिक कॉलम : राजपथ-जनपथ : नाराजगी और खींचतान जारी

Posted Date : 04-Nov-2018

टिकट बंटने के बाद कांग्रेस में खींचतान और बढ़ गई है। हाल यह है कि प्रत्याशियों को नाराज नेताओं को मनाने में ज्यादा समय देना पड़ रहा है। रायपुर की सीमा से सटे विधानसभा क्षेत्र के प्रत्याशी को अपने ही दल के नेताओं से जूझना पड़ रहा है। राजीव भवन के कर्ता-धर्ता एक पदाधिकारी के भाई-बंधुओं ने प्रचार करना तो दूर, पार्टी प्रत्याशी के खिलाफ ही माहौल बनाना शुरू कर दिया है। सुनते हैं कि पार्टी पदाधिकारी ने किसी एक को प्रत्याशी बनवाने के लिए प्रॉमिस कर दिया था, लेकिन ऐसा नहीं हो पाया। अब उन्होंने पार्टी प्रत्याशी की राह में  रोड़े अटकाने शुरू कर दिए हैं। इसी तरह रायपुर जिले की एक सीट के प्रदेश संगठन के एक बड़े पदाधिकारी प्रत्याशी को पिछले दिनों एक अन्य दावेदार की नाराजगी झेलनी पड़ी। 
हुआ यूं कि संगठन के प्रमुख पदाधिकारी बी-फार्म लेने के लिए पार्टी दफ्तर पहुंचे थे। दफ्तर पहुंचते ही उनका सामना एक नेता से हो गया जो कि उसी सीट से टिकट के दावेदार थे। पहले संगठन के प्रमुख पदाधिकारी ने उनके लिए प्रयास करने का भरोसा दिलाया था, लेकिन बाद में वे उसी सीट से खुद प्रत्याशी बन गए। टिकट के वंचित नेता, पदाधिकारी को देखते ही भड़क गए। आसपास कोई और सुन न ले इसलिए पदाधिकारी उन्हें एक कमरे में ले गए। बाहर सिर्फ तेज आवाज ही सुनी गई। बाहर जब दोनों निकले तो उनके चेहरे पर तनाव साफ दिख रहा था। न सिर्फ रायपुर जिला बल्कि अन्य जगहों पर भी इसी तरह का तनाव देखने को मिल रहा है। 

पुनिया अब पस्त हैं
प्रदेश कांग्रेस के प्रभारी पीएल पुनिया अब पहले की तरह सक्रिय नहीं दिख रहे हैं। वे पिछले प्रभारियों की तुलना में ज्यादा सक्रिय रहे हैं। और चुनाव शुरू होने से पहले तकरीबन सभी विधानसभा क्षेत्रों में जा चुके थे। चुनाव को लेकर इतने ज्यादा सक्रिय थे कि उन्होंने पार्टी के एक नेता को किराए का मकान देखने के लिए कह दिया था। मतदान खत्म होने तक यहां रहकर चुनाव संचालन की उनकी योजना थी, लेकिन जैसे ही विधानसभा सीटों की कथित सौदेबाजी की सीडी जारी हुई, वे यहां आने से कन्नी काटने लगे। यह भी हल्ला उड़ा कि पुनिया की भी सीडी जारी हो सकती है, काफी दिनों तक नहीं आए। चर्चा तो यह भी है कि उन्होंने छत्तीसगढ़ का प्रभार छोडऩे की इच्छा भी जाहिर कर दी थी, लेकिन हाईकमान की समझाइश पर वे फिलहाल पद पर बने रहने के लिए तैयार हो गए। उनकी भूपेश बघेल से मतभेद की खबर मीडिया में छाई हुई है और उन्होंने प्रचार छोड़कर अपने आपको बैठकों तक ही सीमित कर लिया है। चर्चा तो यह भी है कि वे छत्तीसगढ़ के प्रभार से किसी तरह पीछा छुड़ाना चाहते हैं। 

सूत न कपास, जुलाहों में...
भाजपा में कुर्सी को लेकर सूरतेहाल यह है कि राजनांदगांव के शहरी नेता मधुसूदन यादव ने डोंगरगांव का रूख क्या किया, उनकी संभावित जीत के गुमान में महापौर की कुर्सी के लिए अंदरूनी तौर पर दौड़ शुरू हो गई है। विधानसभा चुनाव के नतीजों का अता-पता नहीं है, लेकिन नगर निगम में बहुमत वाली भाजपा में बिना लड़े एक साल की मेयर की कुर्सी को लेकर सियासी बिसात बिछ रही है। बताते हैं कि यादव के विजयी होने की पूरी उम्मीद को लेकर मेयर इन काउंसिल के सदस्य और मुखर महिला पार्षदों ने भी कुर्सी पर टकटकी लगाई  है। यादव के निर्वाचित होने की आस में बैठे भाजपा पार्षद बिना किसी उठापटक के  सीट को हथियाने की जुगत में है। पार्टी में इस  तरह की हड़बड़ाहट को लेकर कई पार्षदों को डपट खानी पड़ी। उत्साही पार्षदों को इस बात की जानकारी नहीं थी कि महापौर और विधायक के पद पर एक साथ रहने में कानूनी अड़चन नहीं है। (rajpathjanpath@gmail.com)


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