राजपथ - जनपथ

छत्तीसगढ़ की धड़कन और हलचल पर दैनिक कॉलम : राजपथ-जनपथ : छोटा मोर्चा जीता, बड़ा बाकी...

Posted Date : 05-Nov-2018

सिंधी समाज के नेताओं ने भाजपा हाईकमान पर दबाव बनाकर श्रीचंद सुंदरानी के लिए रायपुर उत्तर की टिकट हासिल तो कर ली है, लेकिन उन्हें जिताने के लिए एकजुटता नहीं दिख रही है। श्रीचंद से नाराज कई सिंधी नेता जोगी पार्टी के प्रत्याशी अमर गिदवानी के समर्थन में आ गए हैं। गिदवानी को चुनाव मैदान से हटाने की भरसक कोशिश हुई, कई स्तरों पर चर्चा भी चली, लेकिन गिदवानी नाम वापस लेने के लिए तैयार नहीं हुए। ऐसे में सिंधी वोटरों का बंटवारा तय माना जा रहा है। हालांकि सिंधी वोटरों की संख्या कोई बहुत ज्यादा नहीं है। मात्र 12 हजार सिंधी मतदाता हैं, पर जिस अंदाज में रायपुर उत्तर की सीट पर समाज से जुड़े कई लोगों ने हक जताया, उससे फायदा कम नुकसान होता ज्यादा दिख रहा है। 
रायपुर उत्तर सीट से कांग्रेस प्रत्याशी कुलदीप जुनेजा को दूसरे समाजों का बैठे-बिठाए समर्थन मिल रहा है। सुनते हैं कि गुजराती समाज के एक बड़े तबके ने कुलदीप को समर्थन देने का ऐलान किया है। समाज से जुड़े लोग इस बात से ज्यादा नाराज है कि सिंधी से ज्यादा वोटर रायपुर उत्तर में गुजराती हैं। फिर भी टिकट के लिए सामाजिक दबाव नहीं बनाया। और तो और सिंधी समाज के कांग्रेस नेता अब कुलदीप के पक्ष में प्रचार के लिए तैयार हो गए हैं। पिछले चुनाव में ये नेता एक तरह से तटस्थ हो गए थे। यानी श्रीचंद की राह कठिन हो गई है, लेकिन वे भी एक जीवट विधायक की तरह पूरे 5 बरस अपने विधानसभा क्षेत्र में लगे रहे। सुबह मरीन ड्राइव पर सैकड़ों लोगों से मिलकर दिन शुरू करना, और हर समारोह में पहुंचना, मेकाहारा में मरीजों से संपर्क रखना। ये सारे काम उनके काम भी आ सकते हैं। 

कमाऊ विभागों का यहां भी बोलबाला
कई पूर्व पुलिस और आबकारी अफसर अलग-अलग दलों से चुनाव लड़ रहे हैं। दो रिटायर्ड डीएसपी आरके राय गुण्डरदेही और श्यामलाल कंवर रामपुर से फिर चुनाव लड़ रहे हैं। पिछले चुनाव में दोनों ने अच्छे खासे वोटों से जीत हासिल की थी।  इस बार कोटा से नौकरी छोड़ चुके डीएसपी विभोर सिंह कांग्रेस प्रत्याशी के रूप में पूर्व सीएम अजीत जोगी की पत्नी रेणु जोगी को टक्कर दे रहे हैं। पूर्व थानेदार अनूपनाग भी अंतागढ़ सीट से कांग्रेस प्रत्याशी के रूप में चुनाव मैदान में डटे हैं। इससे परे पूर्व आबकारी अफसर इंद्रशाह मंडावी मानपुर-मोहला सीट से चुनाव लड़ रहे हैं। इससे परे एक अन्य आबकारी अफसर की पत्नी लक्ष्मी ध्रुव भी कांग्रेस टिकट से नगरी-सिहावा सीट से चुनाव मैदान में है। पुलिस और आबकारी अफसरों की राजनीति में सक्रियता चर्चा का विषय है। वैसे भी राजनीति में पैसे का बोलबाला हो गया है। ऐसे में पुलिस और आबकारी अफसर मौजूदा राजनीति की जरूरतों को पूरा करने में सक्षम दिखते हैं। राजनीतिक दल भी इन्हें टिकट देने में गुरेज नहीं करती, क्योंकि ये चुनावी खर्चे के लिए दल पर निर्भर नहीं रहते हैं। ये फंड का जुगाड़ खुद कर लेते हैं। कभी कभार दूसरों की मदद भी कर देते हैं।
 सुनते हैं कि एक रिटायर्ड पुलिस अफसर ने सक्रिय राजनीति में आने के बाद एक बड़े राजनेता को करीब 50 लाख उधार दिए थे।  पैसा तो वापस नहीं मिला, लेकिन पार्टी की नीति निर्धारक जरूर बन गए। अफसर को भी पैसे वापसी की जल्दी नहीं है। उन्हें उम्मीद है कि नेताजी पॉवर में आएंगे तो हिसाब-किताब हो जाएगा। इधर भूपेश बघेल के खिलाफ पाटन से लड़ रही एक ताकतवर महिला प्रत्याशी के पति एक सबसे कमाऊ विभाग में इंजीनियर हैं, और वहां पर करोड़ों के खर्च की चर्चा है। rajpathjanpath@gmail.com


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