राजपथ - जनपथ

छत्तीसगढ़ की धड़कन और हलचल पर दैनिक कॉलम : राजपथ-जनपथ : जोगी से परहेज घटा

Posted Date : 03-Dec-2018

अब दस दिन भी नहीं बचे हैं कि छत्तीसगढ़ में नई सरकार की शक्ल साफ हो जाएगी। वैसे तो 11 दिसंबर की शाम तक सत्तारूढ़ पार्टी तय हो जाने की एक संभावना है, लेकिन किसी वजह से अगर किसी एक पार्टी को बहुमत नहीं मिला, तो उसके बाद दो-चार दिन लग सकते हैं कि किसी जरूरी और संभावित गठबंधन का रास्ता साफ हो सके। अभी कांग्रेस के प्रदेश के सबसे बड़े नेता टी.एस. सिंहदेव ने एक कैमरे के सामने जोगी के साथ किसी संभावित गठबंधन से अपने सौ फीसदी परहेज की बात को दुहराने से इंकार किया, और कहा कि उन्हें कहा गया है कि वे इस मुद्दे पर कहने से बचें। इसका एक मतलब यह है कि अगर जरूरत पड़ी तो कांग्रेस शायद जोगी से भी हाथ मिला ले। दूसरी तरफ मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह भी जोगी से परहेज पर अब कुछ नर्म पड़े हैं। हफ्ते भर का असमंजस आज निपटाना किसी को ठीक नहीं लग रहा है क्योंकि राजनीति में अटपटे हमबिस्तर होते ही रहते हैं। और तो और बड़बोला मीडिया भी चुप्पी मारकर बैठा है, और हवा के रूख की अटकल लगाने के बजाय 11 तारीख की शाम का इंतजार कर रहा है ताकि नतीजों के मुताबिक चुनिंदा कतरनों या वीडियो क्लिपों को निकालकर यह साबित कर सके कि उसने तो कई हफ्ते पहले ही यह कह दिया था। 


इस चुनाव के बाद लोकसभा पर नजर
भाजपा के मुख्यमंत्री तो पहले से घोषित और तय हैं, लेकिन कांग्रेस के मुख्यमंत्री को लेकर पसंद बड़ी लंबी-चौड़ी हैं। चुनाव जीतने में सबसे अधिक मेहनत करने वाले को मुख्यमंत्री बनाया जाएगा, या सबसे धीर-गंभीर को, या सबसे सीधे-सरल को, या मंत्री के कामकाज के सबसे तजुर्बेकार को? यह सवाल कांग्रेस के सामने आसान नहीं होगा। इसकी एक वजह यह भी है कि 6 महीने बाद के लोकसभा चुनाव की चुनौती इस प्रदेश में मुख्यमंत्री के साथ-साथ सत्तारूढ़ पार्टी के अध्यक्ष के लिए भी होगी, और इन दोनों के बीच तालमेल और संतुलन पर भी होगी। यह भी हो सकता है कि कांग्रेस अगर अपने दावे के मुताबिक 50 से अधिक सीटें जीत ले, तो उसके कुछ विधायकों को लोकसभा चुनाव में उतारा जा सकता है, और उनका बेहतर इस्तेमाल किया जा सकता है। लेकिन कांग्रेस अगर सरकार बनाने से दूर रहती है, और खासी दूर रहती है, तो भी कांग्रेस के कुछ विधायकों को आम चुनाव में लड़ाया जा सकता है, और यही बात भाजपा के साथ भी है। पैंतालीस के निर्धारक-आंकड़े से पार्टी जितनी अधिक अधिक होगी, या जितनी अधिक कम होगी, उतनी ही संभावना कुछ विधायकों के लोकसभा चुनाव लडऩे की रहेगी। कुल मिलाकर 18 बरस के अपने अस्तित्व में छत्तीसगढ़ में ऐसी अनिश्चितता कभी देखी न थी। फिलहाल हर पार्टी और हर उम्मीदवार को अपनी जीत के दावे इसलिए भी करने पड़ रहे हैं कि कुछ लोगों से चंदा और मिल जाए, कुछ और लोगों से चंदा मिल जाए, और चुनावी बिल लेकर खड़े हुए लोग कुछ और इंतजार कर लें। (rajpathjanpath@gmail.com)


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