राजपथ - जनपथ

छत्तीसगढ़ की धड़कन और हलचल पर दैनिक कॉलम : राजपथ-जनपथ : बृजमोहन के बाद ताम्रध्वज?

Posted Date : 07-Jan-2019

पुलिस महकमे में एक बात को लेकर बड़ी सुगबुगाहट है कि भाजपा सरकार में एक वक्त गृहमंत्री रहे बृजमोहन अग्रवाल के बाद पहली बार ऐसा गृहमंत्री आया है जो अपने विभाग पर पूरा काबू अपना ही रहने की बात कर रहा है। पुलिस और गृह विभाग के आला अफसरों के साथ पहली बैठक में गृहमंत्री ताम्रध्वज साहू ने यह साफ किया कि वे डमी गृहमंत्री नहीं हैं, और विभाग वे ही चलाएंगे। इसके साथ-साथ उन्होंने यह भी साफ किया कि खुफिया विभाग की जो रिपोर्ट मुख्यमंत्री तक जाए, वह रिपोर्ट उन्हें भी भेजी जाए। यह बात सरकार में चली आ रही लंबी परंपरा से कुछ हटकर है जिसमें इंटेलीजेंस विभाग को सीधे मुख्यमंत्री के प्रति जवाबदेह माना जाता है। अब यह कांग्रेस सरकार में मुख्यमंत्री और गृहमंत्री के बीच संतुलन का एक नया मौका है, और अफसर इंतजार कर रहे हैं कि कांटा कहां जाकर थमेगा, और वे किसके प्रति अधिक जवाबदेह रहेंगे। 

पिन निकला हुआ हथगोला...
सेक्स-सीडी कांड जिस भाजपा नेता कैलाश मुरारका के इर्द-गिर्द घूम रहा है, उसके ताजा अदालती बयान, और अदालत में जमा सुबूत से इस राज्य में सबसे बड़ा सियासी तूफान आ सकता है। मुरारका ने सीधे-सीधे पिछले मुख्यमंत्री रमन सिंह को लपेटे में लिया है कि ब्लैकमेल करने का सामान, सेक्स-सीडी, पूरी तरह उनकी जानकारी थे, और उन्होंने ही अपने ओएचडी अरूण बिसेन को सेक्स-सीडी की जांच करने के लिए मुम्बई और दिल्ली भेजा था। अब तक सीबीआई का केस कोई और तस्वीर पेश कर रहा था, लेकिन कैलाश मुरारका का यह ताजा अदालती बयान, और फोन पर बातचीत की बहुत सी रिकॉर्डिंग पूरे मामले को एक नया मोड़ दे रही है। कुछ लोगों ने मुरारका की तुलना पिन निकले हुए हथगोले से की है जो कि किसी भी पल फट सकता है। दरअसल मुरारका फट चुके हैं, और बहुत से वीडियो कैमरों के सामने भूपेश बघेल और विनोद वर्मा को पूरी तरह बेकसूर करार दे चुके हैं, चुनावी नतीजों के महीनों पहले से। अब मुरारका उन एक-दो उद्योगपतियों को निपटाने के लिए कमर कस चुके हैं जिन्होंने उनको इस सेक्स-सीडी में फंसाया है। आने वाले दिन बड़ी दिलचस्प लड़ाई के रहने वाले हैं। 

सरकार में विशेषण...
सरकार में बड़े अफसरों का मूल्यांकन करते हुए उनकी खूबियों और खामियों के बीच कुछ पैमानों पर बड़ी महीन रेखा रहती है। दो अफसरों की तुलना करते हुए सरकार में एक के बारे में कहा गया कि वह होशियार तो है, लेकिन डेढ़ होशियार है। दूसरे के बारे में कहा गया कि वह चतुर तो काफी है, लेकिन चालाक नहीं है। अब ऐसी छोटी-छोटी धारणाएं किसी कुर्सी के लिए किसी अफसर को काबिल मानने का पैमाना बन जाती हैं। इसीलिए यह कहा जाता है कि हकीकत के साथ-साथ जनधारणा भी मायने रखती है क्योंकि अफसरों की लिखित सीआर में ऐसे विशेषणों का इस्तेमाल तो होता नहीं है। 

व्हाट्सअप से
सुन लो! दंगों के अपने मुकदमे खुद खारिज करने वाले ने कहा- मेरे राज में यूपी में दंगे नहीं हुए!
जिनमें हो जाता है अंदाज- ए-खुदाई पैदा, 
हमने देखा है कि वो बुत तोड़ दिये जाते हैं
बस यही सोचकर कोई सफाई नहीं दी हमने...
कि इलजाम झूठे ही सही पर लगाये तो तुमने हैं।

आज गाय का अस्तित्व खतरे में पड़ गया है।
अब कोई किसान गाय पालने को तैयार नहीं है, 
छुट्टे गाय और साँड़ फसलों को तबाह कर रहे हैं, 
तो उनको किसानों ने खदेड़ कर सरकारी इमारतों में बंद कर दिया। नतीजा क्या होगा, यह जानवर भूखे मरेंगे, और क्योंकि कोई पालने को तैयार नही है तो इनका उत्पादन धीरे धीरे खत्म हो जाएगा। भारत से गाय कुछ वर्षों बाद खत्म। 
- सैय्यद हसन जिया

नए साल में कोई सुश्री उमा भारती की भी खोज खबर ले लो। कहीं गंगा ने तो नहीं बुला लिया। वालमार्ट के आने पर भी जल कर मरने का वादा था।

अहंकार करने के लिए सत्य का उपयोग, सत्य का अपमान है।
-रवीन्द्रनाथ ठाकुर

लक्ष्मण सिंह देव
जिस प्रकार धर्मों के विषय में पढ़ाया जाता है उसी प्रकार पाठ्य पुस्तकों में नास्तिक दर्शन एवं तार्किकता का समावेश भी आवश्यक है। जिससे विद्यार्थी बहुपक्षीय विवेचन कर सके। (rajpathjanpath@gmail.com)


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