राजपथ - जनपथ

छत्तीसगढ़ की धड़कन और हलचल पर दैनिक कॉलम : राजपथ-जनपथ : अफसर खुद ही करोड़पति बने...

Posted Date : 10-Jan-2019

पिछली सरकार में कई अफसरों को इतनी छूट मिल गई थी कि वे कार्यक्रमों के लिए खुलकर उगाही करने लग गए थे। अफसरों की चंदाखोरी के कई किस्से चटकारे लेकर सुनाए  जा रहे हैं। सुनते हैं कि बिलासपुर संभाग में विकास यात्रा के दौरान पीएम के एक कार्यक्रम के लिए जिले के एक उच्चाधिकारी ने करीब 4 सीआर चंदा किया था। इनमें से करीब डेढ़ सीआर तो उन्होंने भीड़ वगैरह और अन्य इंतजामों में खर्च किए, लेकिन ढाई करोड़ सीआर अंदर भी कर लिए। इसका खुलासा तब हुआ जब पार्टी नेताओं ने एक उद्योगपति को चुनावी चंदे के लिए आग्रह किया। उद्योगपति ने बताते हैं कि कहा कि वे पीएम के कार्यक्रम के लिए 25 पेटी पहले ही दे चुके हैं। अब अफसर को भी बदलने का समय जा चुका था, क्योंकि चुनाव आचार संहिता लग चुकी थी। राष्ट्रपति और पीएम के कार्यक्रम के सारे इंतजाम सरकारी खर्चों से होते हैं। इसके लिए अलग से चंदे की जरूरत नहीं होती। अब जाकर यह कहा जा रहा है कि अफसरों की उगाही से उद्योगपति-व्यापारी भी तंग थे और उन्होंने चुनाव में भाजपा को बड़ा झटका दिया। 

आरक्षण के खिलाफ हिंसक तर्क और हकीकत
अनारक्षित तबके के भीतर अपेक्षाकृत गरीब लोगों के लिए आरक्षण को लेकर ऐसे तमाम लोगों ने अपने तीर-भाले निकाल लिए हैं जो कि इस आर्थिक पैमाने से ऊपर हैं, और जो किसी भी किस्म के आरक्षण के हकदार नहीं हैं। उन्हीं के पास लिखने का मौका है, बोलने का मौका है, और नाराजगी जताने की ताकत भी। यही वह तबका है जो कि महिला आरक्षण के भी खिलाफ है, और दलित-आदिवासी-ओबीसी आरक्षण के खिलाफ तो रहते ही आया है। इस नए अनारक्षित-आरक्षण को लेकर उनके मन में नाराजगी इतनी है कि उन्होंने तरह-तरह के तर्क गढ़ लिए हैं कि किस तरह अब सरकारी नौकरियों में, और स्कूल-कॉलेज में महज मूर्ख लोग आएंगे। लेकिन बेइंसाफी की जड़ें इस देश में कितनी गहरी हैं, उनसे इस तबके का कोई रिश्ता नहीं है। इंटरनेट पर एक महिला के ऐसे हाथ की तस्वीर मौजूद है जिसमें उसकी कलाई पर उसकी पहचान गुदी हुई है, कालूराम की औरत शांति। जहां औरत को जायदाद की तरह ऐसी तख्ती गोदकर रखा जाता है, वहां उसे संसद और विधानसभाओं में आरक्षण भला कोई कैसे दे देगा? इसी तरह आर्थिक आधार पर अनारक्षित तबके के भीतर की ऐसी नब्बे फीसदी आबादी के लिए महज दस फीसदी सीटों को आरक्षित करने का विरोध आज दस फीसदी आबादी ऐसे हिंसक  तरीके से कर रही है कि मानो ऐसा आरक्षण पाने वालों के माथे पर गुदवा दिया जाएगा-मेरा बाप गरीब है। 
लोगों को राहुल गांधी का कल का बयान भी देखना चाहिए जिसमें उन्होंने कहा है कि देश का चौकीदार भाग गया, और अपने को बचाने का जिम्मा एक महिला पर डाल गया। यह बात बड़ी ओछी है और राष्ट्रीय महिला आयोग ने इस पर राहुल गांधी को नोटिस देकर सही काम किया है। राहुल गांधी के पास बचाव का सिर्फ एक तरीका है, जल्द से जल्द बिना शर्त माफी मांगने का। दरअसल किसी उदार परिवार के नौजवान की भाषा भी देश की सामाजिक-राजनीतिक हकीकत से इसी तरह प्रभावित हो जाती है, लेकिन इस पर माफी मांग लें तो वह गलती कहलाएगी, अड़े रह जाएं तो वह गलत काम कहलाएगा।
(rajpathjanpath@gmail.com)


Related Post

Comments