राजपथ - जनपथ

छत्तीसगढ़ की धड़कन और हलचल पर दैनिक कॉलम : राजपथ-जनपथ : ज्ञानी पहले घर देखें...

Posted Date : 11-Jan-2019

विधानसभा चुनाव में करारी हार के सदमे से भाजपा नेता और कार्यकर्ता अभी तक उबर नहीं पाए हैं। यद्यपि हाईकमान ने विधानसभा चुनाव की हार को भूलकर लोकसभा चुनाव में जुटने के लिए कहा है। प्रदेश के मोर्चा-प्रकोष्ठों की लगातार मीटिंग हो रही है, लेकिन कई पदाधिकारी इससे दूरी बनाए हुए हैं। पार्टी के एक बड़े नेता के मुताबिक सिर्फ एक तिहाई पदाधिकारी ही सक्रिय हैं। सुनते हैं कि एक मोर्चा प्रकोष्ठ के मुखिया ने तो प्रदेश के बड़े पदाधिकारी को साफ कह दिया कि उनके मोर्चे की हॉल मीटिंग नहीं हो पाएगी क्योंकि ज्यादातर पदाधिकारी आना नहीं चाहते। बेहतर होगा कि रूम में ही मीटिंग कर ली जाए। 
मीटिंग के दौरान आपसी खींचतान की बात छनकर सामने आ रही है। भाजयुमो कार्यसमिति की बैठक में प्रदेश अध्यक्ष विजय शर्मा  लोकसभा चुनाव के लिए बूथ प्रबंधन को मजबूत करने के लिए टिप्स दे रहे थे, तो पीछे बैठे पदाधिकारी यह कहते सुने गए कि आप प्रदेश के बजाए अपने वार्ड का ही बूथ को ही ठीक कर लें। विजय शर्मा कवर्धा के रहने वाले हैं और भाजपा यहां से प्रदेश में सबसे ज्यादा वोटों से हारी है। खुद विजय शर्मा अपने वार्ड से पार्टी के उम्मीदवार को बढ़त नहीं दिला पाए। 

पोस्टमार्टम इसलिए नहीं...
छत्तीसगढ़ में भाजपा अपनी ऐसी शर्मनाक और ऐतिहासिक हार से सबक लेने का कोई इरादा नहीं रखती क्योंकि आज तक पार्टी ने चुनावी हार पर विचार-विमर्श करने के लिए कोई बैठक नहीं की। जीतकर आए विधायकों में से एक ने इस बारे में कहा कि दिल्ली के नेताओं को भी यह मालूम है कि हार की वजहों पर चर्चा होगी, तो बैठक में ही पूरी पार्टी ही हार जाएगी। इसलिए दिल्ली की यह सोच है कि कोई पोस्टमार्टम किए बिना लोकसभा की तैयारी में लगें। वहीं कुछ दूसरे लोगों का मानना है कि ऐसी अप्राकृतिक मौत के बाद अगर पोस्टमार्टम भी नहीं होगा, तो फिर इलाज की गलती और मौत की वजह कैसे पता लगेगी? इस अनुभवी विधायक का मानना है कि आज के माहौल में अगर आम चुनाव में पार्टी 11 में से 5 सीटें भी जीत ले, तो भी बहुत होगा, और यह भी तब जब डॉ. रमन सिंह जैसे को लोकसभा में उतारा जाए। 

दिल्ली जाने का रास्ता...
दिल्ली में भाजपा का राष्ट्रीय अधिवेशन चल रहा है। इसमें छत्तीसगढ़ से कुल 256 प्रतिनिधि शिरकत कर रहे हैं। सुनते हैं कि आमंत्रित प्रतिनिधियों के पैमाने पर पूर्व विधानसभा अध्यक्ष गौरीशंकर अग्रवाल फिट नहीं बैठ रहे थे। उन्हें रातों-रात जांजगीर लोकसभा का प्रभारी बनाया गया। तब कहीं जाकर वे अधिवेशन में शामिल होने रवाना हुए, लेकिन पूर्व मंत्री प्रेमप्रकाश पाण्डेय और अमर अग्रवाल अधिवेशन में शामिल होने से रह गए, क्योंकि वे किसी भी पद पर नहीं है और चुनाव तो हार ही गए हैं।  (rajpathjanpath@gmail.com)


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