राजपथ - जनपथ

छत्तीसगढ़ की धड़कन और हलचल पर दैनिक कॉलम : राजपथ-जनपथ : वक्त की बर्बादी या तमीज का हिस्सा?

Posted Date : 12-Jan-2019

हिन्दुस्तान के खासे बड़े हिस्से में चाय के बिना लोगों का काम नहीं चलता। दक्षिण भारत के कुछ राज्यों में कॉफी का चलन अधिक है लेकिन तमाम उत्तर भारत और कई दूसरे राज्यों में चाय ही चलती है। जो चाय गर्म पीने पर ही अच्छी लग सकती है, उसे सड़कों पर गरीब लोग या छोटे कर्मचारी छोटे से पॉलीबैग में लाते ले जाते दिखते हैं, अब उसमें पहुंचने और पीने तक चाय पता नहीं कितनी गर्म रह जाती होगी। 
फेसबुक पर एक अखबारनवीस ने लिखा है कि हिन्दुस्तान में वक्त की बर्बादी की सबसे बड़ी वजह चाय है। यह बात एक हिसाब से सही भी है क्योंकि चाय पीने में वक्त कम लगता है, उसे बनाने या लाने में ज्यादा वक्त लगता है, और उतनी देर मेहमान को झेलना कई बार भारी पड़ता है। और फिर बातचीत में यह माना जाता है कि अगर किसी ने चाय के लिए भी नहीं पूछा, तो वह खासी बदतमीजी की बात होती है। लेकिन जिस तरह एक वक्त बुरी तरह पिट चुकी बुलेट मोटरसाइकिल आज हिन्दुस्तानी सड़कों पर राज कर रही है, उसी तरह अदना सी चाय अब ऐसे फैशन में आई है कि चाय कैफे खुलने लगे हैं। ऐसे में कुछ लोगों ने यह पोस्टर पोस्ट किया है- चाय बिना चैन कहां रे...।
सामाजिक तौर-तरीकों को कुछ अधिक मानने वाले, और मेहमाननवाजी के लिए विख्यात लोग मेहमान के सामने ऐसा बक्सा खोल देते हैं जिसमें दस-बीस अलग-अलग स्वाद और खुशबू वाली चाय के सैशे (पैकेट) रखे होते हैं, इतनी किस्में कि लोग चक्कर खा जाएं कि उनमें से कौन सी छांटें। चाय की मामूली समझ रखने वाले लोगों के लिए ऐसा बक्सा दहशत पैदा करने वाला रहता है कि वे अपनी नासमझी को इस चुनौती के सामने कैसे छुपाएं। फिलहाल छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर जैसे मंझले शहर में भी अब सौ-पचास रूपए कप की चाय नए फैशनेबल चाय कैफे पर मिलने लगी है। rajpathjanpath@gmail.com


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