राजपथ - जनपथ

छत्तीसगढ़ की धड़कन और हलचल पर दैनिक कॉलम : राजपथ-जनपथ : पहला आईएफएस ऐसा...

Posted Date : 06-Feb-2019

राज्य शासन को बड़े-बड़े महत्वपूर्ण ओहदों पर बैठे हुए आईएफएस जिस अंदाज में जंगल-दफ्तर वापिस भेजे गए उससे सब हैरान भी थे कि राज्य शासन का ऐसा रूख क्यों है? लोगों को लगा कि इतने महत्व का काम देखे हुए लोग एकमुश्त वन विभाग में लौटा दिए गए। लेकिन इसके बीच एक नियुक्ति ऐसी हुई है जिससे यह समझ पड़ता है कि सरकार का रूख वन अफसरों के खिलाफ नहीं है। आलोक कटियार को पिछली सरकार में तरह-तरह से अपमानित किया गया था। इतने सीनियर अफसर को कभी ग्रामोद्योग का काम दिया गया, तो कभी आरडीए में मुख्य कार्यपालन अधिकारी बनाया गया जो कि एक अतिरिक्त कलेक्टर दर्जे का काम था। जब उन्होंने इसे अपनी वरिष्ठता के खिलाफ बताया तो महीनों तक उन्हें हाशिए पर बिठा दिया गया था। बड़ी मुश्किल से उन्हें क्रेडा का काम इसलिए दिया गया कि सरकार के पास उस काम को संभालने के लिए उस वक्त कोई दूसरा अफसर नहीं था। लेकिन अब भूपेश सरकार ने के्रडा के साथ-साथ कल आलोक कटियार को पीएमजीएसवाय का अतिरिक्त प्रभार भी दिया है। वे पहले प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना में रह चुके हैं, और वहां प्रचलित भ्रष्टाचार को उन्होंने कम से कम अपने स्तर पर कुचलकर रख दिया था। टेंडर में होने वाले घपले बंद हो गए थे, और ठेकेदारों के बीच फर्क महसूस किया जा रहा था। बाद में यह विभाग पुराने ढर्रे पर आ गया था। और अब शायद इस विभाग को फिर से सुधारने के लिए आलोक कटियार को लाया गया है। भूपेश सरकार आने के बाद किसी आईएफएस की यह पहली ऐसी पोस्टिंग है जो बताती है कि सरकार का रूख इस सर्विस के खिलाफ नहीं है।

आखिर काम मिला...
आखिरकार प्रशासनिक फेरबदल में महीनेभर से खाली बैठे सौरभ कुमार को काम मिल गया। उन्हें दंतेवाड़ा जिले से हटाए जाने के बाद मंत्रालय में अटैच कर दिया गया था। सुनते हैं कि सौरभ कुमार के खिलाफ कांग्रेस ने गंभीर आरोप लगाए थे। सौरभ कुमार पर कांग्रेस प्रत्याशी देवती कर्मा और उनके पुत्र छबिन्द्र के बीच विवाद पैदा करने का भी आरोप था। देवती कुछ सौ वोटों से हार गईं। सरकार बदलते ही सौरभ कुमार को हटा दिया गया। इसके बाद से वे सफाई देते घूम रहे थे।  

सुकमा कलेक्टर जेपी मौर्य को राजनांदगांव जैसे महत्वपूर्ण जिले की जिम्मेदारी मिली है। उन पर भी कवासी लखमा ने चुनाव के दौरान आरोप लगाए थे, लेकिन बाद में वापस भी ले लिए। मतदाता जागरूकता के लिए उन्होंने जिले में जोरदार अभियान चलाया था। जिसकी वजह से पिछले चुनाव की तुलना में 8 फीसदी अधिक मतदान हुआ। मौर्य की पत्नी रानू साहू को कांकेर कलेक्टर से बालोद कलेक्टर बनाया गया है। रानू गरियाबंद जिले के कांग्रेस नेता के परिवार से ताल्लुक रखती है। खैर, पति-पत्नी को अच्छी पोस्टिंग मिल गई। (rajpathjanpath@gmail.com)


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