राजपथ - जनपथ

छत्तीसगढ़ की धड़कन और हलचल पर दैनिक कॉलम : राजपथ-जनपथ : सीबीआई पर रोक तो रमन की थी

Posted Date : 09-Feb-2019

भूपेश सरकार के राज्य में सीबीआई को बैन करने के फैसले पर भाजपा के लोग पिल पड़े हैं। पीएम ने शुक्रवार को रायगढ़ की सभा में  यहां तक कह दिया कि छत्तीसगढ़ में सीबीआई को इसलिए आने नहीं देना चाह रहे हैं क्योंकि आने वाले चुनाव में कांग्रेस, छत्तीसगढ़ को एटीएम बनाना चाहती है, यहां से बक्से भर-भरकर माल दिल्ली भेजना है। यदि सीबीआई आई, तो ऐसा नहीं हो पाएगा। कांग्रेस सरकार की आलोचना करते समय पीएम यह भूल गए कि उनकी ही पार्टी की सरकार ने भी छत्तीसगढ़ को वर्ष-2012 में सीबीआई को बैन करने के लिए केन्द्र को पत्र लिखा था। खैर, सीबीआई को बैन करने को लेकर राज्य में तकरार जारी है। 

चर्चा है कि विधानसभा में भी विपक्ष के लोग इसको लेकर भूपेश सरकार पर हमला बोलने की तैयारी कर रहे हैं, लेकिन यह अब भाजपा को ही भारी पड़ता दिख रहा है। सुनते हैं कि भाजपा सरकार ने सीबीआई को बैन करने के लिए केन्द्र को चिट्ठी क्यों लिखी थी, इसका खुलासा भी हो सकता है। चर्चा है कि राज्य के एक आईएएस अफसर सीबीआई के मकडज़ाल में फंसे थे। उन्हें कानूनी मदद मिल जाए, इसलिए तब की भाजपा सरकार ने राज्य में सीबीआई बैन करने के लिए केन्द्र को चिट्ठी लिखी थी। इस चिट्ठी से अफसर को थोड़ी बहुत मदद मिल भी गई। खैर, यह मामला अब गरमा सकता है।

सैकड़ों रिकॉर्डिंग्स में जजों की भी!
इस प्रदेश में एक वक्त जिस अफसर के नाम से सरकार और राजनीति, मीडिया और कारोबार, सभी के दिल-दिमाग में सिहरन दौड़ जाती थी, वैसे अफसर के निलंबन की खबर अभी आ रही है। राज्य के स्पेशल डीजी मुकेश गुप्ता, और उनके साथी एसपी रहे रजनेश सिंह को एसीबी के उनके कार्यकाल को लेकर अभी निलंबित किया गया है। यह राज्य बनने से लेकर भूपेश-सरकार बनने तक मुकेश गुप्ता की ताकत सरकार के बहुत से फैसलों पर हावी दिखती थी, और अमूमन किसी की हिम्मत इस अफसर के बारे में बोलने या लिखने की नहीं रहती थी। लंबे समय तक राज्य के खुफिया-मुखिया रहते हुए यह माना जाता था कि मुकेश गुप्ता के पास राज्य के हर महत्वपूर्ण व्यक्ति की टेलीफोन रिकॉर्डिंग मौजूद है, और लोग सहमे रहते थे। जोगी के राजधानी-एसपी रहते हुए मुकेश गुप्ता की पुलिस ने भाजपा नेता नंदकुमार साय का पैर तोड़ा था, लेकिन रमन सिंह ने मुख्यमंत्री बनते ही मुकेश गुप्ता को रायपुर का आईजी भी बनाया, और खुफिया-मुखिया भी बनाया। इसके बाद मानो यह भी काफी नहीं था, उन्हें एसीबी और ईओडब्ल्यू का मुखिया भी बनाया गया। भाजपा के ननकीराम कंवर जैसे इकलौते नेता मुकेश गुप्ता के खिलाफ मामला उठाने का हौसला दिखाते रहे, और फिर कांगे्रस के भूपेश बघेल ने मोर्चा खोला था। 
ऐसी ताकत के बाद आज के ऐसे हाल को देखकर भी बहुत से लोग अभी भी मुकेश गुप्ता के बारे में कुछ बोलने से कतराते हैं क्योंकि अधिकतर बड़े लोगों को यह लगता है कि उनकी कॉल रिकॉर्डिंग इस अफसर के पास जरूर होगी। अभी जो बातें एसीबी और ईओडब्ल्यू से छनकर बाहर आ रही हैं, वे बताती हैं कि मुकेश गुप्ता के पूरे कार्यकाल में इंटेलीजेंस और इन दो दफ्तरों ने टेलीफोन सुनने का काम रेखा नायर नाम की जो महिला कर्मचारी करती थी, उसके एक ठिकाने पर मारे गए छापे में सैकड़ों लोगों की बातचीत की रिकॉर्डिंग मिली है जिसमें राजनीति, सरकार, मीडिया, कारोबार, के साथ-साथ जजों की बातचीत भी मिली है। ऐसी चर्चा है कि तीन सौ से अधिक लोगों की टेलीफोन-रिकॉर्डिंग मिली हैं। जब तक ये बातें फाईलों पर दर्ज होकर अदालत नहीं पहुंचतीं तब तक इनके बारे में यह जानना मुश्किल है कि इनमें कितनी सच्चाई है। लेकिन जनधारणा ऐसी तमाम बातों को सच मानने के लिए एकदम तैयार है। 

(rajpathjanpath@gmail.com)


Related Post

Comments