इतिहास

इतिहास में 10 फरवरी

Posted Date : 10-Feb-2019

मुक्केबाजी की दुनिया के सबसे सफल खिलाड़ी रहे माइक टाइसन को आज ही के दिन बलात्कार का दोषी पाया गया था. अदालत ने उन्हें 6 साल की सजा सुनाई थी.
बॉक्सिंग रिंग में दमदार मुक्के के लिए मशहूर बॉक्सर माइक टाइसन अपने जीवन में भी कई विवादों के लिए जाने जाते हैं. पूर्व विश्व हैवीवेट चैंपियन माइक टाइसन बचपन से ही विवादास्पद चरित्र के व्यक्ति रहे हैं. 1991 में माइक टाइसन को सौंदर्य प्रतियोगिता में भाग लेने वाली एक प्रतियोगी से बलात्कार के आरोप में गिरफ्तार किया गया था. डेसिरी वॉशिंगटन नाम की सुंदरी ने टाइसन पर बलात्कार का आरोप लगाया था. हालांकि टाइसन का कहना था कि उस वक्त जो हुआ वह आपसी सहमति से हुआ था. पुलिस ने टाइसन को जुलाई 1991 में गिरफ्तार किया. 26 जनवरी 1992 से लेकर 10 फरवरी 1992 तक टाइसन पर सुनवाई हुई. दोनों पक्षों को सुनने के बाद इंडियानापोलिस की अदालत ने उन्हें आज ही के दिन यानी 10 फरवरी 1992 को बलात्कार का दोषी ठहराया. अदालत ने 26 मार्च 1992 को उन्हें 6 साल की सजा सुनाई.
जेल में रहने के दौरान टाइसन की जिंदगी में शायद बदलाव भी आया. जेल में रहते हुए टाइसन ने कम्युनिस्ट क्रांतिकारी माओ झे डोंग और अमेरिकी नेता मालकोम एक्स के बारे में पढ़ाई की. जेल में ही रहते हुए टाइसन ने इस्लाम धर्म कबूल लिया. तीन साल की सजा काटने के बाद टाइसन को 1995 में जेल से रिहा कर दिया गया. जेल से रिहा होने के बाद टाइसन ने विश्व हैवीवेट चैंपियन का अपना खिताब वापस जीत लिया लेकिन अगले ही साल यानी 1996 में इवांडर होलीफील्ड से हारकर गंवा भी दिया. 1997 में होलीफील्ड के साथ एक और मुकाबले में टाइसन ने होलीफील्ड के कान में काट लिया जिसके लिए टाइसन पर जुर्माने के अलावा प्रतिबंध भी लगा. बॉक्सिंग रिंग के बाहर टाइसन गलत वजहों से ही सुर्खियों में बने रहे. 1998 में मोटरचालकों से लड़ाई के आरोप में भी वह जेल की सजा काट चुके हैं. साल 2005 में उन्होंने मुक्केबाजी से संन्यास ले लिया. माइक टाइसन का जन्म 1966 में ब्रुकलिन में हुआ था. 19 साल की उम्र में टाइसन ने मुक्केबाजी में अपना व्यावसायिक करियर शुरू किया. 1986 में टाइसन 20 वर्ष की आयु में ट्रेवर बारबिक को हराकर सबसे कम उम्र के विश्व हैवीवेट चैंपियन बने.

  • 1763- पेरिस संधि के तहत फ्रांस ने कनाडा ब्रिटेन को दे दिया।
  • 1811- रूसी सैनिकों ने बेलग्रेड पर कब्ज़ा किया।
  • 1828- दक्षिण अमेरिकी क्रान्तिकारी साइमन बोलिवार कोलंबिया के शासक बने।
  • 1848- फर्नीनांड प्रथम ने नया संविधान लागू किया।
  • 1921-  काशी विद्यापीठ का उद्घाटन गांधी जी ने किया। ड्यूक आफ़ कनॉट ने इंडिया गेट की नींव रखी। 
  • 1929- जे.आर.डी. टाटा पायलट लाइसेंस पाने वाले पहले भारतीय बने।
  • 1931- दिल्ली भारत की राजधानी बनी।
  • 1939- जापानी सैनिकों ने हेनान द्वीप, चीन पर अधिकार कर लिया।
  • 1957- स्टायरोफोम कूलर की खोज हुई।
  • 1961- नियाग्रा जलप्रपात की जलविद्युत परियोजना ने बिजली उत्पादन शुरू किया।
  • 1979- ईटानगर को अरुणाचल प्रदेश की राजधानी बनाया गया।
  • 1981- खगोलविद राय पेंथर द्वारा धूमकेतु की खोज।
  • 1989- अमेरिका ने नवादा परीक्षण-स्थल पर परमाणु परीक्षण किया।
  • 1992- अंडमान और निकोबार द्वीप विदेशी पर्यटकों के लिए खुला।
  • 2009- सोमालिया तट पर भारत-रुस की नौसेनाओं का संयुक्त अभ्यास प्रारम्भ हुआ। प्रसिद्ध शास्त्रीय गायक पंडित भीमसेन जोशी को देश का सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारतरत्न से सम्मानित किया गया। 
  • 1835- शरीर क्रिया वैज्ञानिक तथा समुद्र विज्ञानी विक्टर हेन्सेन का जन्म हुआ, जिन्होंने समुद्र में (तथा सामान्य जल में रहने वाले) सूक्ष्मजीवों के लिए प्लैंकटन शब्द दिया। एक शरीर क्रिया वैज्ञानिक के रूप में वे आन्तरिक कान में हेन्सन कोशिका तथा कैनाल ऑफ हेन्सन की खोज के लिए जाने जाते हैं। (निधन-5 अप्रैल 1924)
  • 1902- अमेरिकी वैज्ञानिक वाल्टर एच. ब्रैटेन का जन्म हुआ,  जिन्हें अर्धचालक पर कार्य करने के लिए जॉन बर्डीन और विलियम बी. शोकले के साथ 1956 में भौतिकी का नोबेल पुरस्कार मिला। अर्धचालकों का उपयोग ट्रान्जि़स्टर निर्माण में किया जाता है। शोकले और बर्डीन के साथ मिलकर इन्होंने पहले ट्रान्जि़स्टर का निर्माण किया। (निधन-13 अक्टूबर 1987)
  • 1923-जर्मन भौतिकशास्त्री विल्हेम कॉनरैड रोन्टजन का निधन हुआ,  जिन्हें एक्स-किरणों की खोज के लिए वर्ष 1901 का भौतिकी का नोबेल पुरस्कार मिला। एक्स-किरणों की खोज ने विज्ञान में नए युग की शुरुआत की तथा इससे चिकित्सा विज्ञान में क्रान्तिकारी परिवर्तन हुए। (जन्म 27 मार्च 1845)
  • 2005-कनाडाई-अमेरिकी नाभिकीय वैज्ञानिक डेविड ऐलेन ब्रॉमले  का निधन हुआ,   जिन्हें नाभिक की संरचना तथा गतिशीलता पर शुरूआती प्रयोग करने के लिए तथा भारी आयन पर कार्य करने के कारण भारी आयन विज्ञान का जनक माना जाता है। (जन्म 4 मई 1926)।

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