राजपथ - जनपथ

छत्तीसगढ़ की धड़कन और हलचल पर दैनिक कॉलम : राजपथ-जनपथ : कल के पहलवान, आज किनारे

Posted Date : 11-Mar-2019

सरकार ने चुनाव आचार संहिता लगने से पहले आनन-फानन में कुछ अफसरों के तबादले भी किए। आईपीएस अफसर अजातशत्रु सिंह को जगदलपुर और शशिमोहन सिंह को सेनानी छसबल दंतेवाड़ा भेजा गया। ये दोनों अफसर राज्य पुलिस सेवा से पदोन्नत हुए थे। दोनों पिछली सरकार में बेहद पावरफुल रहे। उनकी हैसियत किसी आईजी-एसपी से ज्यादा रही है। अजातशत्रु सेक्स-सीडी प्रकरण की जांच से भी जुड़े रहे। हाल यह रहा कि एसपी तो दूर, उस समय के दुर्ग, रायपुर आईजी तक को मालूम नहीं था कि जांच किस दिशा में चल रही है। 
आईपीएस अवॉर्ड होने के बाद अजातशत्रु को मानवाधिकार आयोग में एसपी और शशिमोहन को एसपी पुलिस अकादमी बनाकर भेजा गया। वैसे तो, ये पद अपेक्षाकृत कम महत्वपूर्ण माने जाते हैं, लेकिन चुनाव के वक्त दोनों अफसरों की भूमिका अहम रही है। हल्ला यह है कि दोनों पॉलिटिकल इंटेलीजेंस का काम देखते थे। दोनों की खासियत यह रही है कि सत्ता के बेहद करीब होने के बावजूद तत्कालीन सीएम के बाकी करीबी अफसरों की तरह धौंसबाजी नहीं दिखाई, बल्कि प्रेम-व्यवहार से अपना काम कराते रहे। सरकार बदलने के बाद भी दोनों के खिलाफ कोई खास नाराजगी नहीं थी। फिर भी उन्हें नक्सल प्रभावित बस्तर और दंतेवाड़ा में भेजा गया, जहां पहले कभी उनकी पोस्टिंग नहीं हुई थी। 
आखिर कोई न कोई तो बस्तर में तैनात ही किया जाएगा, और हर अफसर को कभी न कभी तो बस्तर में जाना ही पड़ता है, लेकिन आज के माहौल में इन दोनों की वहां रवानगी के कई मायने निकाले जा रहे हैं। शशिमोहन के दुर्ग में तैनात रहते हुए फिल्मों में काम करने से लेकर छात्राओं के फ्लैट पर छापा मारने तक बहुत से विवाद खड़े हुए। इसी तरह अजातशत्रु ने सेक्स-सीडी कांड में कानूनी संभावनाओं से एकदम बाहर जाते हुए कार्रवाई की, जिसका नतीजा यह निकला कि शुरू में पुलिस द्वारा लगाई गई धाराएं बाद में सीबीआई ने हटा लीं। यह अलग बात है कि अजातशत्रु ने इस सरकार के लोगों को पिछली सरकार के सबसे ताकतवर लोगों द्वारा सामने बैठाकर, बांह मरोड़कर कार्रवाई करवाने की जानकारी दे दी थी। फिर भी कार्रवाई की तो उन्होंने ही थी।

इनका टाईम आ गया....
अभी चार-छह दिन पहले राजधानी रायपुर के सबसे व्यस्त बाजार में दूकानों के बाहर फैलाकर रखे गए सामान जब हटाने के लिए पुलिस ने कहा, तो दूकानदार ने भारी बदसलूकी की, गालियां दीं, धमकियां दीं, और अपने साथ के लोगों को भड़काया कि पुलिस कुछ करे तो उस पर हमला कर दें। पूरे वक्त पुलिस दबी रही क्योंकि गुंडागर्दी कर रहे दूकानदार सत्तारूढ़ कांगे्रस पार्टी के एक स्थानीय नेता के रिश्तेदार थे। पुलिस मां-बहन की गालियां खाकर लौट आई, और उसका वीडियो कई लोगों ने बनाया। इसके बाद जब यह वीडियो चारों तरफ फैला और पुलिस के ऐसे डरने पर लोगों ने पुलिस को धिक्कारा, तब जाकर दूकानदार गिरफ्तार किया गया। इसी वीडियो का नतीजा यह हुआ कि कल भिलाई में जब सुपेला में सड़क पर गाडिय़ां सजाकर बेचने वाले लोगों की गाडिय़ां पुलिस ने जब्त कीं, तो दूकानदारों ने पुलिस को खूब गालियां देते हुए पुलिस की क्रेन-ट्रक से अपनी गाडिय़ां बलपूर्वक उतार लीं, और पुलिस भीड़ के सामने कुछ भी नहीं कर पाई। कुछ हफ्ते पहले पिथौरा में भी ऐसा ही हुआ था। आज तकरीबन पूरे प्रदेश में सत्तारूढ़ पार्टी के ही विधायक हैं। ऐसे में हर गुंडा-मवाली किसी विधायक का नाम लेकर, किसी मंत्री का नाम लेकर पुलिस पर धौंस दिखाने में लगा हुआ है। यह सरकार को सोचना है कि सत्तारूढ़ पार्टी के करीबी लोगों के गुंडे अगर पुलिस की इतनी बेहाली करते हैं, और वह अगर वीडियो कैमरे पर दर्ज भी हो जाती है, तो उसका क्या नतीजा होगा? एक दूसरी दिक्कत यह है कि इन तीनों ही मामलों में एक धर्म-समुदाय के लोग ही  थे जो पुलिस पर गालियों से हमला कर रहे थे। ऐसी कई घटनाओं का एक नतीजा यह भी निकलने वाला है कि कांगे्रस के सत्ता में आने के बाद एक समुदाय के लोगों की गुंडागर्दी बढऩे की जनधारणा मजबूत होती जाएगी। देश में कुछ पार्टियां जनधारणा का ऐसा ही धु्रवीकरण चाहती भी हैं। अभी सोशल मीडिया पर ऐसी टिप्पणियों के साथ ये वीडियो तैरने भी लगे हैं, और आबादी का खासा बड़ा हिस्सा ऐसा है जो किसी एक धर्म को मुजरिम साबित करने के लिए इसे बढ़ाते भी चल रहा है। ऐस वीडियो के साथ यह टिप्पणी भी चल रही है कि अपना टाईम आ गया...। हो सकता है कि सत्तारूढ़ पार्टी विधानसभा चुनाव के ताजा नतीजों के बाद अब तक कोई खतरा महसूस नहीं कर पा रही हो, लेकिन इसका नुकसान छोटा नहीं होगा।

(rajpathjanpath@gmail.com)


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