राजपथ - जनपथ

छत्तीसगढ़ की धड़कन और हलचल पर दैनिक कॉलम : राजपथ-जनपथ : कर्जा लौटाने के लिए दबाव

Posted Date : 12-Apr-2019

सरगुजा में भाजपा प्रत्याशी रेणुका सिंह के लिए नई मुश्किलें खड़ी हो गई है। सीतापुर इलाके में तो पार्टी पदाधिकारियों ने बकाया भुगतान न होने पर काम नहीं करने की धमकी दे दी है। सुनते हैं कि विधानसभा चुनाव में भाजपा प्रत्याशी के लिए पार्टी के बड़े नेताओं के कहने पर स्थानीय कुछ नेताओं ने साहूकारों से कर्ज लेकर चुनाव में लगा दिया। उनसे कहा गया था कि चुनाव निपटते ही पैसा मिल जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। 

हाल यह है कि जिन लोग ने कर्ज दिए थे वे स्थानीय जिम्मेदार नेताओं के पीछे पड़ गए हैं। अकेले पेट्रोल पंपों का ही लाखों का बिल बकाया है। विधानसभा प्रत्याशी की स्थिति यह है कि चुनाव में हारने के बाद उन्होंने स्थानीय नेताओं से दूरी बना ली। प्रदेश में सरकार नहीं है, तो कोई पूछने वाला नहीं है। अब लोकसभा चुनाव हैं, तो नेताओं ने कर्ज वापसी के लिए दवाब बनाया है। 

स्थानीय नेताओं ने प्रदेश प्रभारी डॉ. अनिल जैन के सामने भी अपनी बात रखी है। साथ ही साथ चुनाव संचालक रामप्रताप सिंह को चेताया है। उन्हें भरोसा दिया गया है कि जल्द ही उन्हें पैसा लौटा दिया जाएगा। फिर भी दूध से जले नेता, इस वादे पर भरोसा नहीं कर पा रहे हैं। उन्होंने कह दिया है कि बकाया रकम की वापसी के बाद ही काम करेंगे। 

खफा-खफा से हैं  महाराज
क्या पंचायत मंत्री टीएस सिंहदेव खफा हैं, यह सवाल पार्टी हल्कों में चर्चा का विषय है। दरअसल, सिंहदेव चुनाव प्रचार तो कर रहे हैं, लेकिन वे अपने क्षेत्र सरगुजा से दूर हैं। सरगुजा राजघराने के मुखिया सिंहदेव की पकड़ का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि  विधानसभा चुनाव में जिले की सभी सीटों पर प्रत्याशी उन्हीं की पसंद से तय किए गए थे और उन्होंने जिताया भी। सरगुजा लोकसभा प्रत्याशी खेलसाय सिंह भी सिंहदेव के कट्टर समर्थक माने जाते हैं। 

सुनते हैं कि सिंहदेव ने सरगुजा लोकसभा में प्रचार की रणनीति बनाने सिर्फ एक बार बैठक ली है। जिसमें विधायकों के अलावा जिलाध्यक्ष व अन्य पदाधिकारी भी थे। इसके बाद खेलसाय को स्थानीय नेताओं के भरोसे छोड़ दिया है। अब जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आ रहा है, भाजपा की स्थिति लगातार मजबूत दिख रही है। चर्चा है कि कुछ लोग सिंहदेव से मार्गदर्शन लेने गए, तो उन्होंने कह दिया कि जैसा करना है वैसा करें। सिंहदेव सक्रिय नहीं दिख रहे हैं, तो ब्लॉक स्तर के नेता भी सुस्त पड़ गए हैं। वे अपने ही गढ़ में दिलचस्पी क्यों नहीं ले रहे हैं, इसकी चर्चा भी हो रही है। कुछ लोगों का अंदाजा है कि सरकार के कुछ नीतिगत फैसलों से वे सहमत नहीं हैं और यही वजह है कि ओडिशा में ज्यादा समय दे रहे हैं। पार्टी ने उन्हें ओडिशा में प्रचार का अतिरिक्त दायित्व भी दिया है। अब सरगुजा में प्रचार के लिए समय नहीं निकाल पाने का बहाना भी है।
(rajpathjanpath@gmail.com)


Related Post

Comments