राजपथ - जनपथ

छत्तीसगढ़ की धड़कन और हलचल पर दैनिक कॉलम : राजपथ-जनपथ : भाजपा नेता कांग्रेसी मंत्रियों से लगे
छत्तीसगढ़ की धड़कन और हलचल पर दैनिक कॉलम : राजपथ-जनपथ : भाजपा नेता कांग्रेसी मंत्रियों से लगे
Date : 13-Apr-2019

सरकार जाते ही भाजपा के कारोबारी नेता, कांग्रेस के लोगों से संबंध मधुर करने में लग गए हैं। ताकि कारोबार में किसी तरह की दिक्कत न आए। ऐसे ही एक भाजपा नेता पिछले दिनों सरकार के एक मंत्री के घर पहुंचे। और मंत्रीजी की तारीफों के पुल बांधने लगे। यह सुनकर असहज हो रहे मंत्रीजी के समर्थकों में से एक ने भाजपा नेता को टोक दिया और याद दिला दिया कि आप तो मंत्रीजी के खिलाफ अपनी पार्टी के प्रत्याशी का चुनाव संचालन कर रहे थे। 

यह सुनकर वाकपटु भाजपा नेता कुछ क्षण के लिए असहज हो गए, लेकिन तुरंत संभलकर कहा कि हां, मैं मंत्रीजी के खिलाफ चुनाव संचालन कर रहा था, पर मंत्रीजी के कुशल प्रबंधन का कोई तोड़ नहीं है। हमें बुरी तरह हरा दिया। भाजपा नेता और मंत्रीजी के समर्थकों के बीच चर्चा का दौर चल रहा था कि मंत्रीजी ने काम पूछ लिया। फिर क्या था, भाजपा नेता असल मुद्दे पर आ गए। उन्होंने गुजारिश की कि जिस बोर्ड के वे पदाधिकारी थे वहां काम कर रही सीए फर्म को न हटाया जाए, उसे काम करने दिया जाए। मंत्रीजी ने तुरंत फोन कर उनका काम कर दिया। तब कहीं जाकर भाजपा नेता वहां से निकले। 


छत्तीसगढ़ का हार्दिक पटेल

छत्तीसगढ़ की राजनीति में एक 'हार्दिक पटेल' का उदय हो रहा है। सेनानी स्व. खूबचंद बघेल के गृहग्राम पथरी से तालुक रखने वाले अमित बघेल की तुलना कई उत्साही लोग गुजरात के हार्दिक पटेल से कर रहे हैं। अमित विधानसभा चुनाव के दौरान सुर्खियों में आए। उन्होंने कसडोल में गौरीशंकर अग्रवाल और धरसींवा के भाजपा प्रत्याशी देवजी पटेल व महासमुंद के डॉ. विमल चोपड़ा को टारगेट किया और उन्हें चुनाव में बुरी तरह हरवाने में अहम भूमिका निभाई। 

अमित भाजपा किसान मोर्चा के प्रदेश महामंत्री रहे हैं, लेकिन देवजी से अनबन के चलते उन्हें पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया था। इसके बाद अमित ने श्रमिक नेता रामगुलाम सिंह ठाकुर के साथ मिलकर छत्तीसगढ़ क्रांति सेना का गठन किया। जब सिलतरा के एक उद्योग से कुछ लोगों को नौकरी से निकाल दिया गया, तो क्रांति सेना के बैनर तले अमित नौकरी से हटाए गए कर्मचारियों के समर्थन में आंदोलन खड़ा किया। फिर क्या था, उन्हें जेल भेज दिया और रमन सरकार के प्रभावशाली लोगों ने तीन माह तक उनकी जमानत नहीं होने दी। जेल से निकलने के बाद उनकी हैसियत और बढ़ गई। उनके संगठन का विस्तार अब प्रदेशभर में हो चुका है। 

विधानसभा चुनाव के दौरान उन्हें भाजपा के लोगों ने अपने साथ लाने की कोशिश भी की, लेकिन वे नहीं माने। प्रदेश के गैर छत्तीसगढ़ी मूल के दिग्गज भाजपा नेताओं को चिन्हित कर उनके खिलाफ मुहिम चलाई और चुनाव में उनके खिलाफ माहौल बनवाने में सफल रहे। पूर्व सांसद सोहन पोटाई भी उनके साथ जुड़ गए हैं और छत्तीसगढ़ी समाज के हितों की बात कर रहे हैं। वे कांग्रेस और भाजपा के उद्योगपति-कारोबारी नेताओं के खिलाफ मुहिम चला रहे हैं। 

सुनते हैं कि कोरबा में सरकार के मंत्री जयसिंह अग्रवाल के खिलाफ अभियान चलाया, तो सीएम भूपेश बघेल को उन्हें फोन कर समझाना पड़ा। उनका मानना है कि राजस्थान-उत्तरप्रदेश, हरियाणा से आए भाजपा और कांग्रेस के नेता यहां जनप्रतिनिधि बन गए हैं और छत्तीसगढिय़ों का शोषण कर रहे हैं। उनके भाषण से प्रभावित बड़ी संख्या में युवा उनसे जुडऩे लगे हैं। कुछ लोग आर्थिक सहयोग भी कर रहे हैं। वे खूबचंद बघेल, गुरूघासीदास, शहीद वीर नारायण सिंह और संत पवन दीवान जैसे छत्तीसगढ़ के महापुरूषों को अपना आदर्श मानते हैं और उन्हीं के सपनों के अनुरूप शोषण मुक्त छत्तीसगढिय़ा राज चाहते हैं। वैसे, छत्तीसगढिय़ा शोषण के नाम पर कई संगठन तैयार हुए और जल्द ही खत्म भी हो गए, लेकिन अब क्रांति सेना का आगे क्या होता है यह देखना है।  (rajpathjanpath@gmail.com)

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