राजपथ - जनपथ

छत्तीसगढ़ की धड़कन और हलचल पर दैनिक कॉलम : राजपथ-जनपथ : यह चुनाव कुछ ज्यादा ही सस्ता...
छत्तीसगढ़ की धड़कन और हलचल पर दैनिक कॉलम : राजपथ-जनपथ : यह चुनाव कुछ ज्यादा ही सस्ता...
Date : 14-Apr-2019

पिछले लोकसभा चुनाव के मुकाबले मुख्य दलों के प्रत्याशी इस बार  खर्च कम कर रहे हैं। भाजपा चुनाव खर्चों को लेकर हमेशा उदार रही है। मगर प्रदेश में सरकार न होने की वजह से ज्यादा कुछ नहीं कर पा रही है। ऊपर से नए चेहरों को चुनाव मैदान में उतारा है, जो कि आर्थिक रूप से ज्यादा सक्षम भी नहीं हैं। पिछले पन्द्रह बरस में राज्य सरकार ने बैठे हुए लोग अरबपति बनने के बाद अब अगर चुनाव लड़ते, तो बात ही कुछ और होती। सुनते हैं कि पार्टी ने चुनाव संचालकों के हाथों में ही फंड थमा दिया है, जिससे कुछ प्रत्याशी नाराज बताए जा रहे हैं। एक भाजपा प्रत्याशी ने कुछ पार्टी नेताओं को अपनी व्यथा सुनाई है, कि वे अपने जेब से 15 लाख खर्च कर चुके हैं, लेकिन चुनाव संचालक ने अभी तक एक फूटी कौड़ी नहीं दी है। और तो और चुनाव संचालक फोन भी नहीं उठा रहे हैं। 

प्रदेश में कांग्रेस सरकार में होने के बावजूद प्रत्याशी कोई बहुत अच्छी स्थिति नहीं है। चर्चा है कि पार्टी हाईकमान ने यहां के जिम्मेदार नेताओं को अड़ोस-पड़ोस के राज्यों के उम्मीदवारों को मदद करने के लिए कह दिया है, जिससे वे टेंशन में बताए जा रहे हैं। कुछ प्रत्याशियों ने टिकट से पहले खर्च को लेकर काफी कुछ वादे किए थे, लेकिन वे अब पार्टी का मुंह ताक रहे हैं। एक शिकायत पर प्रदेश प्रभारी पीएल पुनिया ने एक प्रत्याशी को फटकार भी लगाई। साथ ही चुनाव खर्च भी प्रत्याशी के बजाए चुनाव संचालक को देने के लिए कहा है। 

अमितेष लोकसभा चुनाव प्रचार में!
पूर्व मंत्री और राजिम के विधायक अमितेश शुक्ल लोकसभा चुनाव प्रचार में डटे हैं। वे सालों बाद लोकसभा का चुनाव प्रचार कर रहे हैं। आमतौर पर लोकसभा चुनाव के दौरान वे पारिवारिक कारण गिनाकर प्रदेश से बाहर चले जाते थे। उनकी जगह स्थानीय नेताओं को प्रचार की जिम्मेदारी दी जाती रही है। पूर्व सीएम अजीत जोगी दो बार महासमुंद से चुनाव लड़े, लेकिन दोनों बार उन्होंने राजिम में अमितेश की जगह अन्य नेताओं को चुनाव संचालक बनाया था। इस बार अमितेश के पुत्र भवानी शंकर खुद टिकट के दावेदार थे। अमितेश अपने पुत्र को टिकट दिलाने के लिए मेहनत भी कर रहे थे, लेकिन पार्टी ने उनकी जगह धनेन्द्र साहू को प्रत्याशी बनाया। धनेन्द्र स्व. श्यामा चरण शुक्ल के कट्टर समर्थक  रहे हैं। ऐसे में अमितेश का चुनाव प्रचार छोड़कर जाने का कोई कारण नहीं बचा था। वे विधानसभा का चुनाव 55 हजार से अधिक मतों से जीते हैं और अभी तक धनेन्द्र के लिए पूरी मेहनत करते दिख भी रहे हैं।  दरअसल श्यामाचरण शुक्ल के वक्त से उनका परिवार साहू समाज की खास फिक्र रखते आया है क्योंकि राजिम में इस परिवार की जीत साहू वोटों की मर्जी के बिना नहीं हो सकती। इसलिए राजिम से किसी शुक्ल की टिकट पाते हुए श्यामाचरण-अमितेष यह कोशिश भी करते आए हैं कि अड़ोस-पड़ोस की सीटों पर किसी साहू को जरूर टिकट मिल जाए।  (rajpathjanpath@gmail.com)

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