राजपथ - जनपथ

छत्तीसगढ़ की धड़कन और हलचल पर दैनिक कॉलम : राजपथ-जनपथ : उम्मीदवार नेताओं से बचते रहे

Posted Date : 23-Apr-2019


वैसे तो, रमन सिंह ने भाजपा के लिए सबसे ज्यादा प्रचार किया, लेकिन उनकी सभाओं में पहले जैसी भीड़ नहीं दिखी। पूर्व सीएम, नान-डीकेएस में भ्रष्टाचार के प्रकरणों पर खुद आगे आकर सफाई दे रहे थे या फिर पलटवार कर रहे थे, उससे भी पार्टी के ज्यादातर बड़े नेता सहमत नहीं थे। उनका सोचना था कि रमन सिंह जैसे बड़े नेता का सीधा रिएक्शन अच्छा नहीं है और क्योंकि इससे मोदी फैक्टर कमजोर हो रहा था। रायपुर में तो बैनर-पोस्टर में उनकी तस्वीर गायब थी। इन सबके बावजूद उन्होंने सभी प्रत्याशियों के पक्ष में रोड शो किया। पार्टी प्रत्याशी जिन दो नेताओं से परहेज कर रहे थे, उनमें नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक और पार्टी की राष्ट्रीय महामंत्री सरोज पाण्डेय भी थे। 

धरम कौशिक ने बिलासपुर में तो प्रचार किया, लेकिन वे अगल-बगल की सीट पर भी प्रचार के लिए जाना चाह रहे थे। सुनते हैं कि एक प्रत्याशी ने तो कंट्रोल रूम में फोन कर अपने क्षेत्र में उनका कोई कार्यक्रम नहीं रखने का आग्रह कर दिया। सरोज पाण्डेय भी यहां चुनावी सभा संबोधित करना चाह रही थीं, लेकिन किसी भी क्षेत्र से उनकी सभा कराने की मांग नहीं आई। वे दुर्ग के कुछ इलाके में ही सीमित रही। एक चर्चा यह भी है कि वे महाराष्ट्र की भाजपा प्रभारी हैं और वहीं पर अधिक दिलचस्पी ले रही हैं क्योंकि जब राज्यसभा में दुबारा जाने की नौबत आएगी, तो छत्तीसगढ़ भाजपा उन्हें नहीं भेज पाएगी, और महाराष्ट्र से संभावना निकल सकती है। कुल मिलाकर विधानसभा चुनाव में बुरी हार के बाद पीएम नरेन्द्र मोदी की सभा से कुछ हद तक कार्यकर्ताओं में उत्साह का संचार हुआ और प्रदेश में मोदी फैक्टर से माहौल बना। अब जितनी भी सीटें मिलेंगी वह मोदी फैक्टर पर ही मिलेगी क्योंकि सभी प्रत्याशी नए थे और पहली बार लोकसभा का चुनाव लड़ रहे थे। 

कल से बाहर
लोकसभा चुनाव निपटने के बाद भाजपा-कांग्रेस के बड़े नेता दूसरे राज्यों में प्रचार के लिए जाएंगे। मप्र के पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान ने बृजमोहन अग्रवाल को फोन कर भोपाल में साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर के प्रचार का न्यौता दिया है। पूर्व मंत्री प्रेम प्रकाश पाण्डेय और अजय चंद्राकर पीएम नरेन्द्र मोदी के प्रचार के लिए वाराणसी जा सकते हैं। इसके अलावा राजेश मूणत अपने गृह जिले रतलाम में पार्टी प्रत्याशी के प्रचार के लिए जाएंगे। 

कांग्रेस से सबसे ज्यादा मांग सीएम भूपेश बघेल की है। भूपेश यूपी और बिहार में चुनाव प्रचार के लिए जाने वाले हैं। इसके अलावा पंचायत मंत्री टीएस सिंहदेव, रविन्द्र चौबे और मोहम्मद अकबर भी प्रचार के लिए मध्यप्रदेश जा सकते हैं। रविन्द्र चौबे अविभाजित मप्र में एक बार दिग्विजय सिंह के चुनाव संचालक भी रह चुके हैं। मोहम्मद अकबर का चुनाव प्रबंधन में कोई तोड़ नहीं है। यही वजह है कि इन नेताओं का पार्टी पूरा उपयोग करना चाह रही है।  (rajpathjanpath@gmail.com)


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