राजपथ - जनपथ

 छत्तीसगढ़ की धड़कन और हलचल पर दैनिक कॉलम : राजपथ-जनपथ : वोटिंग के बाद भाजपा राहत में
छत्तीसगढ़ की धड़कन और हलचल पर दैनिक कॉलम : राजपथ-जनपथ : वोटिंग के बाद भाजपा राहत में
Date : 24-Apr-2019

लोकसभा की 7 सीटों पर मंगलवार को मतदान हुआ। मतदान के बाद जीत के अपने-अपने दावे हैं। पहले दो चरण के चुनाव में भाजपा के रणनीतिकारों के चेहरे मुरझाए हुए थे, लेकिन बाद की लोकसभा सीटों में मतदान के बाद भाजपाई खेमे में खुशी की लहर है। पार्टी के रणनीतिकारों को इस चुनाव में विधानसभा चुनाव से बेहतर नतीजे की उम्मीद है। टिकट घोषणा के बाद पहले मुकाबला एकतरफा कांग्रेस के पक्ष में दिख रहा था, लेकिन तीसरे चरण के मतदान में शहरी इलाकों में मोदी-इफैक्ट साफ नजर आया। हाल यह रहा कि पिछले लोकसभा चुनाव में जबर्दस्त मोदी लहर के बावजूद कांग्रेस दुर्ग सीट जीतने में कामयाब हो गई थी, लेकिन इस बार दुर्ग का किला बचा पाना मुश्किल दिख रहा है। 

दुर्ग में भाजपा पलड़ा भारी
दुर्ग के वैशाली नगर, भिलाई, दुर्ग शहर और ग्रामीण के कई इलाकों में भाजपा के पक्ष में वातावरण दिखा। विधानसभा चुनाव में नवागढ़ सीट से कांग्रेस को सर्वाधिक वोटों से जीत हासिल हुई थी, लेकिन लोकसभा में कांग्रेस को यहां से बढ़त मिलना मुश्किल दिख रहा है। भाजपा प्रत्याशी विजय बघेल को पार्टी के भीतर पार्टी की राष्ट्रीय नेत्री सरोज पाण्डेय का धुर विरोधी माना जाता है। ऐसे में विजय को जीत दिलाने के लिए सरोज विरोधियों ने जमकर पसीना बहाया, पे्रम प्रकाश पाण्डेय कल शाम तक सड़क पर रहे। जबकि कांग्रेसी दिग्गज आपस में ही उलझे रहे। कुल मिलाकर भाजपा यहां उम्मीद से है।
बिलासपुर-रायपुर में नतीजे...
बिलासपुर और रायपुर सीट पर मोदी फैक्टर देखने मिला। मगर, बिलासपुर के कांग्रेस प्र्रत्याशी अटल श्रीवास्तव और रायपुर कांग्रेस प्रत्याशी प्रमोद दुबे प्रबंधन के मामले में भाजपा प्रत्याशियों से बेहतर नजर आए। बिलासपुर में अटल श्रीवास्तव को जोगी कांग्रेस के प्रत्याशी के चुनाव मैदान में नहीं होने से फायदे की उम्मीद थी। जोगी कांग्रेस के कई नेता कांग्रेस में शामिल भी हो गए थे। एक तरह से जोगी कांग्रेस का कांग्रेस के लिए समर्थन दिख रहा था बाद में जोगी कांग्रेस के विधायक दल के नेता धरमजीत सिंह और अन्य से अपेक्षाकृत समर्थन नहीं मिला। जोगी समर्थक सीएम भूपेश बघेल के उस बयान से नाराज रहे जिसमें उन्होंने कह दिया था कि जोगी के लिए कांग्रेस के दरवाजे हमेशा के लिए बंद हो चुके हैं। बिलासपुर शहर और आसपास के इलाकों में भाजपा के पक्ष में माहौल रहा। फिर भी यहां अनुसूचित जाति वोटों के सहारे कांग्रेस उम्मीद से है। 
राजधानी में मोदी, आसपास...
रायपुर में भी कुछ इसी तरह की स्थिति बनी है। शहर की तीन सीटों और आसपास के इलाकों में मोदी फैक्टर मजबूत दिखा। जबकि रायपुर ग्रामीण, धरसींवा, अभनपुर और भाटापारा के ग्रामीण इलाकों में कांग्रेस के पक्ष में वातावरण नजर आया। अल्पसंख्यक वोट कांग्रेस के पक्ष में एकतरफा गिरे हैं। ऐसे में यहां भी कांग्रेस को कुछ उम्मीदें हैं। हालांकि भाजपा खेमे के एक पुराने जानकार ने इस पूरे चुनाव में काम करने के बाद बीती शाम दावा किया कि भाजपा की जीत यहां से एक लाख वोटों से होने जा रही है। अब लोकतंत्र में दावों का हक तो हर किसी का रहता है, मतगणना के दिन तक।
हमेशा की तरह त्रिकोणीय
जांजगीर-चांपा लोकसभा में हमेशा की तरह इस बार भी त्रिकोणीय मुकाबला रहा। कांग्रेस और बसपा के बीच अजा वोटों के बंटवारे से भाजपा को हमेशा फायदा मिलता रहा है। इस लोकसभा में बसपा के दो विधायक भी हैं। मगर कांग्रेस ने यहां काफी मेहनत की थी। भाजपा में खींचतान काफी देखने को मिली। यही वजह है कि इस बार पिछले चुनाव के मुकाबले कांग्रेस उम्मीदवार ज्यादा बेहतर स्थिति में नजर आए। 
सरगुजा में सत्ता बेअसर?
सरगुजा और रायगढ़ में मोटे तौर पर कांटे की टक्कर रही है। सरगुजा से पंचायत मंत्री टीएस सिंहदेव की प्रतिष्ठा दांव पर लगी है। पार्टी ने उनकी पसंद पर प्रेमनगर के विधायक खेलसाय सिंह को प्रत्याशी बनाया। कांग्रेस को विधानसभा चुनाव में यहां की सभी सीटों पर जीत हासिल हुई थी, लेकिन लोकसभा चुनाव में स्थिति कुछ हद तक अनुकूल नहीं रही है। वजह यह थी कि कांग्रेस के नेता अपेक्षाकृत ज्यादा सक्रिय नहीं थे। फिर भी सीतापुर, प्रतापपुर और अंबिकापुर के उदयपुर और लखनपुर में कांग्रेस के पक्ष में माहौल नजर आया। जबकि भाजपा प्रत्याशी की स्थिति प्रेम नगर, भटगांव और रामानुजगंज में ज्यादा बेहतर रही है। भाजपा प्रत्याशी रेणुका सिंह को काफी हद तक मोदी फैक्टर का फायदा मिला है। यही वजह है कि यहां जीत-हार का अंतर कम मतों से होने का अनुमान लगाया जा रहा है। लेकिन प्रदेश की राजनीति के एक जानकार ने कल रात यह दावा किया है कि रेणुका सिंह एक लाख से अधिक लीड से सांसद बनने जा रही हैं। लोगों का कहना है कि सरगुजा में विधानसभा चुनाव में वोटर यह मानकर चल रहे थे कि कांगे्रस की सरकार बनेगी और टीएस सिंहदेव मुख्यमंत्री बनेंगे। लेकिन वैसा हुआ नहीं और निराश जनता इस बार भाजपा की ओर गई है। दूसरी तरफ दुर्ग सीट के बारे में भी यही बात कही जा रही है कि वहां का साहू समुदाय ताम्रध्वज साहू के सीएम बनने की उम्मीद कर रहा था, और वह भी निराश हुआ है।
रायगढ़ का फैसला कम वोटों से?
दूसरी तरफ, रायगढ़ में जशपुर राजघराने ने भाजपा प्रत्याशी गोमती साय के लिए एड़ी चोटी का जोर लगाया। रायगढ़ शहर में तो काफी हद तक मोदी फैक्टर दिखा, तो ग्रामीण इलाकों में कांग्रेस को फायदा दिख रहा है। सारंगढ़, धरमजयगढ़, लैलूंगा और पत्थलगांव में कांग्रेस प्रत्याशी की स्थिति मजबूत नजर आई। जबकि जशपुर और कुनकुरी में भाजपा के पक्ष में माहौल नजर आया। कुल मिलाकर यहां भी हार-जीत का अंतर कम मतों से होने का अनुमान लगाया जा रहा है। 
जोगी के मैदान में न रहने से...
कुछ जानकार लोगों का यह भी मानना है कि इस बार जोगी कांगे्रस मैदान से पूरी तरह बाहर ही नहीं थी, उनके बहुत से समर्थक-समुदाय इस असमंजस में भी है कि जोगी परिवार कांगे्रस में जाने को एक पैर पर खड़ा है। ऐसे में जोगी के समर्थक समुदायों ने कांगे्रस को वोट देना बेहतर समझा है। कल शाम एक टीवी चैनल, आईएनएच पर एक भूतपूर्व भाजपाई वीरेन्द्र पांडेय का यह अंदाज सामने आया कि भाजपा को प्रदेश में दो, या अधिक से अधिक तीन सीटें मिल सकती हैं, बाकी सारी सीटें कांगे्रस को मिलेंगी।
(rajpathjanpath@gmail.com)

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