राजपथ - जनपथ

छत्तीसगढ़ की धड़कन और हलचल पर दैनिक कॉलम : राजपथ-जनपथ : अब फिर जांच पर नजर

Posted Date : 25-Apr-2019

अंतागढ़ टेपकांड की एसआईटी जांच चल रही है। टेपकांड के आरोपी राजेश मूणत, डॉ. पुनीत गुप्ता को हाईकोर्ट से जमानत मिल गई है। चंडीगढ़ स्थित फोरेंसिक लैब ने इलेक्ट्रॉनिक सबूतों पर परीक्षण करने से इंकार करने पर एसआईटी को झटका लगा है। फोरेंसिक लैब ने अंतागढ़ टेपकांड में जिन 4 सीडी और 2 पेन ड्राइव समेत अन्य ऑडियो और वीडियो को परीक्षण के लिए भेजा गया है, वह डुप्लीकेट कॉपी है, इसलिए इन सीडी और पेन ड्राइव की जांच नहीं हो सकती। जांच कराने ओरिजनल ऑडियो-वीडियो देना होगा। खैर, एसआईटी प्रकरण को पुख्ता करने के लिए और सबूत जुटाने में लगी है। 

सुनते हैं कि प्रकरण पर बारीक नजर रखने वाले कई लोग जांच से संतुष्ट नहीं है। एक कांग्रेस नेता ने इस सिलसिले में पिछले दिनों सीएम से मुलाकात भी की थी और उन्हें बताया कि कुछ अदृश्य शक्तियां आरोपियों को बचाने में जुटी है। यही वजह है कि जांच किसी किनारे नहीं पहुंच पा रही है और एसआईटी को झटका लग रहा है। चूंकि अब प्रदेश में लोकसभा के चुनाव निपट गए हैं, ऐसे में इन मामलों पर सरकार बारीक नजर रहेगी। 

चुनाव और जोगी के लोग
जोगी पार्टी ने प्रत्याशी चुनाव मैदान में नहीं उतारे थे। पार्टी के विधायकों ने अपनी-अपनी सुविधा के अनुसार कांग्रेस या भाजपा को सपोर्ट किया। खुद जोगी मरवाही में तटस्थ रहे, लेकिन इसका फायदा कोरबा में कांग्रेस प्रत्याशी ज्योत्सना महंत को मिला। वैसे जोगी ने भाजपा प्रत्याशी को भी आशीर्वाद दिया था। अलबत्ता, डॉ. रेणु जोगी ने कोटा में अपने सभी समर्थकों को कांग्रेस के पक्ष में काम करने के लिए कहा। जबकि देव्रवत पहले भाजपा के साथ थे, बाद में वे बदल गए और कांग्रेस के पक्ष में काम किया। 

दूसरी तरफ, बलौदाबाजार के पार्टी विधायक प्रमोद शर्मा ने आखिरी दिनों में चुप्पी साध ली थी। इससे भाजपा को फायदा हुआ। इन सबसे अलग जोगी पार्टी के विधायक दल के नेता धरमजीत सिंह ने अलग तरीके से प्रचार किया। वे भाजपाईयों की भीड़ देखते ही भाजपा को वोट देने की अपील कर देते थे। कांग्रेसियों की भीड़ में कांग्रेस को सपोर्ट करने के लिए कह देते थे। उनकी नीति जिधर बम, उधर हम, वाली रही। 

रामविचार की मजबूरी
राज्यसभा सदस्य रामविचार नेताम ने सरगुजा में पार्टी प्रत्याशी रेणुका सिंह के लिए एड़ी चोटी का जोर लगा दिया। वैसे तो सरगुजा जिले की राजनीति में रेणुका, रामविचार की विरोधी मानी जाती है। बावजूद इसके रामविचार की मेहनत को देखकर कई लोगों को आश्चर्य भी हुआ। 

सुनते हैं कि विधानसभा चुनाव में हार के बाद सामरी और रामानुजगंज से पार्टी के पराजित प्रत्याशियों ने पार्टी हाईकमान से मुलाकात की थी और उन्हें अपनी हार के लिए रामविचार नेताम को जिम्मेदार ठहराया। चूंकि विधानसभा चुनाव में पूरे प्रदेश में पार्टी की बुरी हार हुई। ऐसे में शिकायतों को ज्यादा गंभीरता से नहीं लिया गया, लेकिन लोकसभा प्रत्याशी की घोषणा के बाद रामविचार को सरगुजा सीट जीताने के लिए जिम्मेदारी दी गई। अब रामविचार के पास पिछली गलतियों को सुधारने के साथ-साथ अपना कद बढ़ाने का भी मौका था। उन्होंने इसके लिए जमकर मेहनत की। अब परिणाम पक्ष में आ जाते हैं, तो रामविचार का कद बढऩा स्वाभाविक है। 
(rajpathjanpath@gmail.com)


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