राजपथ - जनपथ

छत्तीसगढ़ की धड़कन और हलचल पर दैनिक कॉलम : राजपथ-जनपथ : सोनिया और शिलान्यास की चर्चा...
छत्तीसगढ़ की धड़कन और हलचल पर दैनिक कॉलम : राजपथ-जनपथ : सोनिया और शिलान्यास की चर्चा...
Date : 19-Aug-2019

सोनिया और शिलान्यास की चर्चा...
नया रायपुर में सोनिया गांधी द्वारा किए गए शिलान्यास के पत्थर की जगह आईआईएम को आबंटित करने के आरोप में राज्य सरकार ने प्रदेश के एक अच्छे आईएफएस अफसर एस.एस. बजाज को निलंबित कर दिया है। इसे लेकर एक वक्त कई बरस तक बजाज के सीनियर रहे राज्य के पूर्व मुख्य सचिव जॉय ओमेन विचलित हैं, और उनका भेजा संदेश मीडिया में चारों तरफ छपा भी है। लेकिन अब खबर यह है कि पूर्व केन्द्रीय मंत्री और सोनिया गांधी के करीबी लोगों में से एक, जयराम रमेश भी इसे लेकर हैरान-परेशान हैं। यूपीए सरकार के वक्त उनका जॉय ओमेन से वास्ता पड़ता था, और दोनों जाहिर तौर पर केरल के हैं। इसी तरह केरल के दो और लोग छत्तीसगढ़ में बड़े अफसर रहे हैं, वे दोनों भी राज्य सरकार के इस फैसले से हक्का-बक्का हैं। पूर्व मुख्य सचिव सुनिल कुमार और पूर्व अतिरिक्त मुख्य सचिव एन.बैजेन्द्र कुमार। इस तरह एक छत्तीसगढ़ी माटीपुत्र एस.एस. बजाज के काम को करीब से देखने वाले तीन मलयाली अफसर सरकार के इस फैसले से असहमत बताए जा रहे हैं, और दिल्ली में जयराम रमेश की असहमति इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इस मामले में निलंबन के पीछे सोनिया गांधी के नाम के पत्थर को वजह बताया गया है, और सोनिया का नाम इस अप्रिय विवाद में बिना उनकी जानकारी के उलझ गया है। 

किस्मत ने फिर साथ कर दिया...
बस्तर के सुकमा जिले के एसपी रहते हुए जितेन्द्र शुक्ला ने सीधे मंत्री कवासी लखमा को चि_ी लिख दी थी जिसे शासकीय नियम-कायदे के खिलाफ मानकर उनका वहां से ट्रांसफर कर दिया गया था। अब सरकार ने कुछ जिलों के एसपी बदले तो जितेन्द्र शुक्ला को महासमुंद का एसपी बनाया गया, और मजे की बात यह है कि वहां कवासी लखमा ही प्रभारी मंत्री हैं। चि_ी-पत्री की बात दोनों में से कोई भूले नहीं होंगे क्योंकि वह ताजा-ताजा मामला है। 
कुछ जिलों से जब अफसरों के हटने की चर्चा होने लगती है तो वे राजधानी तक अपने खुद के बारे में कुछ सही-गलत खबरें भिजवाने लगते हैं। ऊपर जहां से तबादला तय होना है, वहां तक बात चली जाती है कि फलां अफसर या फलां नेता जिले से उस अफसर को हटाने पर आमादा हैं। अब राजधानी के लोग अपने हिसाब से तय करते हैं कि उन्हें नापसंद लोग अगर हटाना चाहते हैं, तो फिर उन्हें वहीं रहने देना चाहिए। आत्मरक्षा खरीदने के कई तरीके रहते हैं, यह उनमें से एक है। 

ऐसे नाम कोई पिए तो कैसे पिए...
आबकारी कमिश्नर ने अभी कुछ दिन पहले शराबखाने चलाने वालों की एक बैठक बुलाई थी। उसमें लोगों ने अफसर को बताया कि देश के किसी भी प्रदेश में बार पर इतनी बड़ी लाईसेंस फीस नहीं है, इस तरह की बेतुकी और कड़ी शर्तें नहीं हैं। इन सबसे बढ़कर आज राज्य सरकार की दारू खरीदी नीति की वजह से बहुत ही घटिया शराब ब्रांड दुकानों पर भी हैं, और बार को भी सरकार से ही खरीदकर दारू बेचनी होती है। कुल मिलाकर ऐसे-ऐसे ब्रांड छत्तीसगढ़ में चल रहे हैं जिनके नाम भी किसी ने कभी सुने नहीं थे। पिस्टल, रिवाल्वर, रायफल, ये सब शराब के ब्रांड हैं जिनके बारे में किसी ने पहले न देखा-सुना था, न किसी को लगता था कि ऐसे ब्रांड की भी दारू बन सकती है, चल सकती है।  (rajpathjanpath@gmail.com)

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