राजपथ - जनपथ

छत्तीसगढ़ की धड़कन और हलचल पर दैनिक कॉलम : राजपथ-जनपथ : हनी ट्रैप का एक असर...
छत्तीसगढ़ की धड़कन और हलचल पर दैनिक कॉलम : राजपथ-जनपथ : हनी ट्रैप का एक असर...
Date : 27-Sep-2019

हनी ट्रैप का एक असर...
छत्तीसगढ़ के पुलिस मुख्यालय में एक बड़े आईपीएस अफसर टेबिल पर चाय के गर्म पानी के साथ शक्कर और शहद दोनों का इंतजाम रखते थे, जिसे जो पसंद हो। पिछले चार दिनों से भोपाल के हनी ट्रैप के समाचार देख-देखकर उन्होंने शहद की बोतल हटवा दी, जिसे मिलाना हो शक्कर ही मिलाए। 
हनी ट्रैप का दूसरा असर...
मध्यप्रदेश पुलिस ने दिल्ली इलाके में एक मकान किराए से ले रखा था जिसे साइबर जांच की जरूरत बताया गया था। अब सरकार उसे खाली कर रही है कि प्रदेश से इतने दूर ऐसे फ्लैट की जरूरत क्या है। ऐसी भी चर्चा है कि मध्यप्रदेश में पकड़ाए हनी ट्रैप की शहद की बोतलें गाजियाबाद के इस मकान में आती-जाती रहती थीं। 
इधर छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में बीते कई बरसों में इंटेलीजेंस विभाग के कुछ अफसरों ने सेफ हाऊस के नाम पर मकान किराए से ले रखे थे, उन्हें लेकर भी अब यह चर्चा है कि वहां की वीडियोग्राफी कौन और किसके लिए करवाते थे, आज वह किसके पास है, और किस-किसके पल्लू ऐसी हार्डडिस्क में दबे हुए हैं? 
हनीट्रैप का तीसरा असर...
भोपाल के हनीट्रैप में जब्त डायरियां सामने आईं तो हिसाब-किताब देखकर पुलिस भी हक्का-बक्का रह गई। छत्तीसगढ़ के कुछ लोगों ने इस डायरी के मुताबिक किस्तों में भुगतान किया, जो कि अभी जारी ही है, कुछ ने इन दोनों प्रदेशों से बाहर जाकर भुगतान किया, और अलग-अलग रेट से भुगतान किया। दिक्कत यह आ रही है कि नामों के संक्षिप्त अक्षरों, इनीशियल्स, से जिन नामों का अंदाज बैठ रहा है, वे एक से अधिक भी हो रहे हैं। पिछली सरकार के एक मंत्री, और एक बड़े अफसर, दोनों के नामों के इनीशियल्स एक से हैं, और इनमें से एक खूब भड़के हुए हैं कि दूसरे की वजह से उनका नाम बदनाम हो रहा है। बाकी भी बहुत से ऐसे संक्षिप्त नामों की उसी तरह संदर्भ सहित व्याख्या हो रही है, जिस तरह स्कूल में हिन्दी के पर्चे में होती थी। लोग अपने नामों वाले संक्षिप्त नाम को गलत बताते हुए यह भी कह रहे हैं कि इन्हीं दो अक्षरों से तो देश के सबसे महान व्यक्ति का नाम भी बनता है, तो क्या उसे भी इसमें गिन लोगे? 
हनीट्रैप का चौथा असर...
फिलहाल छत्तीसगढ़ के राज्य सचिवालय, पुलिस मुख्यालय में आने-जाने वालों के नाम के रजिस्टरों की जांच हो सकती है कि कुछ खास तारीखों पर कुछ लोगों के भीतर जाने के पास किस मंत्री या अफसर की तरफ से बनवाए गए थे, या रजिस्टर में किससे मिलने का जिक्र था। जांच अफसरों को मोबाइल फोन के कॉल डिटेल्स के साथ फोन की लोकेशन से फोन मालकिनों की लोकेशन का अंदाज लग रहा है। और ऐसे रजिस्टरों की जिंदगी पर खतरा मंडराना बताया जा रहा है। 

तब वे मांग रहे थे सीबीआई, अब ये...
प्रदेश भाजपा के मुखिया विक्रम उसेंडी भी नान घोटाले की लड़ाई में कूद पड़े हैं। उन्होंने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कहा है कि  इस प्रकरण में रमन सरकार को बदनाम करने की कोशिश हो रही है और इसकी निष्पक्ष जांच के लिए प्रकरण सीबीआई को सौंप देना चाहिए। इस प्रकरण पर एसआईटी जांच रूकवाने के लिए भाजपा विधायक दल के मुखिया धरमलाल कौशिक पहले ही कोर्ट की शरण में गए हैं। पार्टी के कई बड़े नेता दबी जुबान में जनहित के विषयों को  छोड़कर जांच रूकवाने के लिए कोर्ट जाने के फैसले को गलत ठहरा रहे हैं। 

सुनते हैं कि खुद उसेंडी भी आनाकानी कर रहे थे। पर हल्ला है कि कुछ बड़े नेताओं, और एक बड़े राष्ट्रीय नेता के कहने पर हाईकोर्ट में हस्तक्षेप याचिका दायर की। उसेंडी की तरफ से पैरवी के लिए सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष विकास सिंह आए थे। विकास सिंह, अमन सिंह के भी वकील हैं। प्रकरण पर सुनवाई तीन तारीख को होगी। दिलचस्प बात यह है कि पिछली सरकार में नान घोटाले का खुलासा होने के बाद सीबीआई अथवा कोर्ट की निगरानी में एसआईटी जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट में चार जनहित याचिका दायर हुई थीं। 

ये याचिकाएं हमर संगवारी, वीरेन्द्र पाण्डेय, वकील सुदीप श्रीवास्तव और एक अन्य द्वारा दायर की गई थीं। तब रमन सरकार ने सीबीआई अथवा कोर्ट की निगरानी में एसआईटी जांच के खिलाफ थी और कोर्ट में अपना पक्ष मजबूती से रखने के लिए नामी-गिरामी वकील खड़े किए थे। याचिकाकर्ताओं की तरफ से कपिल सिब्बल, प्रशांत भूषण और विवेक तन्खा व संजय हेगड़े पैरवी कर रहे थे, तो सरकार ने भी हरीश साल्वे, मुकुल रोहतगी और रविन्द्र श्रीवास्तव को खड़ा किया था। तब सरकार को बड़ी राहत मिली थी और प्रकरण को सुनवाई के लिए हाईकोर्ट भेज दिया गया। तब से अब तक इस हाईप्रोफाइल प्रकरण को लेकर तलवारें खिंची हुई हैं। प्रकरण का आखिर क्या होगा, यह कोई नहीं जानता, लेकिन जिस तरह दिग्गज वकील दोनों पक्षों की पैरवी के लिए आ रहे हैं, उससे लोगों में उत्सुकता बनी हुई है। (rajpathjanpath@gmail.com)

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