राजपथ - जनपथ

छत्तीसगढ़ की धड़कन और हलचल पर दैनिक कॉलम : राजपथ-जनपथ : योगी-मोदी क्या सोचेंगे?
छत्तीसगढ़ की धड़कन और हलचल पर दैनिक कॉलम : राजपथ-जनपथ : योगी-मोदी क्या सोचेंगे?
Date : 18-Dec-2019

योगी-मोदी क्या सोचेंगे?
देश के कई प्रदेशों में उत्तर भारत को अनपढ़, निकम्मा, या मुजरिम मान लिया जाता है और वहां के लोगों के खिलाफ आमतौर पर एक साथ तोहमत जड़ दी जाती है। हिन्दी इलाकों में कई जगह मुजरिमों का जिक्र करने के लिए यूपी-बिहार वाले कह दिया जाता है। रायपुर शहर भाजपा अध्यक्ष राजीव कुमार अग्रवाल म्युनिसिपल के वार्ड का चुनाव लड़ रहे हैं। एक वार्ड चुनाव के हिसाब से वे खासे बड़े नेता हैं, और उनके वार्ड के लोगों को भी इस बात का अहसास है कि वे पार्षद नहीं शायद मेयर चुन रहे हैं, अगर शहर में भाजपा के पार्षदों का बहुमत रहे। आज सुबह उन्होंने फेसबुक पर पोस्ट किया है- हमें जानकारी मिली है कि महर्षि वाल्मीकि वार्ड, वार्ड नंबर 32 में बूथ लूटने का प्लान भी विरोधी पक्ष करने वाला है। वे यह जान लें कि यह छत्तीसगढ़ है, यूपी, बिहार, या बंगाल नहीं। यह शांतिप्रिय प्रदेश है, अशांति फैलाने वालों को यह प्रदेश बर्दाश्त नहीं करता। 

अब राजीव अग्रवाल ने यह लिख तो दिया है, लेकिन अगर कोई यह बात उन्हीं की भाजपा के यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को बताए, तो उन्हें यह बात अपनी बेइज्जती लगेगी कि उनके रामराज के बारे में पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ऐसे ख्याल रखते हैं। दूसरी तरफ बिहार में भी भाजपा सत्ता में है, और पता नहीं उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी इस बारे में क्या सोचेंगे। रहा बंगाल का सवाल तो वहां कानून व्यवस्था के बदहाल को लेकर ऐसी बात कहना भाजपा का हक है। राजीव अग्रवाल के बयान से शहर के किनारे औद्योगिक क्षेत्र में बसे हुए यूपी-बिहार के लाखों लोगों के बीच भी भाजपा के उम्मीदवारों से कोई सवाल कर सकता है। 

हाई वोल्टेज वार्ड
वैसे तो जोगी पार्टी रायपुर नगर निगम के 40 वार्डों में चुनाव लड़ रही है, लेकिन उनके एक-दो प्रत्याशी ही मुख्य मुकाबले में दिख रहे हैं। ऐसे में जोगी पिता-पुत्र ज्यादातर वार्डों में प्रचार के लिए नहीं जा रहे हैं। उन्होंने सिर्फ एकमात्र मोतीलाल नेहरू वार्ड पर ध्यान केन्द्रित किया हुआ है। यहां से उनकी पार्टी से पन्ना साहू चुनाव मैदान में हैं। पन्ना साहू धरसींवा से विधानसभा चुनाव लड़े थे और करीब 15 हजार वोट हासिल किए थे। यहां पूर्व मंत्री सत्यनारायण शर्मा और पूर्व विधायक देवजी पटेल की प्रतिष्ठा भी दांव पर है। 

सत्यनारायण शर्मा ने विधानसभा चुनाव में उनकी मुखालफत करने वाले दो बार के पार्षद अनवर हुसैन की टिकट कटवा दी। इससे बौराए अनवर हुसैन न सिर्फ खुद निर्दलीय चुनाव लड़ रहे हैं, बल्कि उन्होंने उन सीटों पर भी निर्दलीय उम्मीदवार खड़े किए हैं जहां से सत्यनारायण शर्मा की पसंद पर कांग्रेस ने प्रत्याशी तय किए हैं। 

मोतीलाल नेहरू वार्ड से सत्यनारायण शर्मा के करीबी तेज तर्रार वीरेन्द्र टंडन उर्फ अब्बी चुनाव मैदान में हैं। जबकि भाजपा ने पहले गोपेश साहू को उम्मीदवार बनाया था, लेकिन बाद में देवजी की सिफारिश पर अशोक सिन्हा को टिकट दे दी गई। इससे नाराज गोपेश साहू निर्दलीय चुनाव मैदान में उतर गए हैं। अब गोपेश न सिर्फ अपने वार्ड में बल्कि पड़ोस के पड़ोस के वार्ड से चुनाव लड़ रहे राजीव अग्रवाल के लिए परेशानी पैदा कर रहे हैं। कुल मिलाकर जोगी पिता-पुत्र की आक्रामक रणनीति, सत्यनारायण के तेज प्रचार और निर्दलियों के दमखम से यहां चुनावी मुकाबला रोचक हो गया है।

भाजपा से लडऩा दिक्कत बन गया
तीन बार के निर्दलीय पार्षद मृत्युंजय दुबे इस बार सुंदरनगर वार्ड से भाजपा की टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं। मृत्युंजय न सिर्फ सुंदरनगर बल्कि अगल-बगल के वार्डों में भी प्रभाव रखते हैं। मगर भाजपा प्रत्याशी के रूप में चुनाव लडऩे से उनके लिए दिक्कतें पैदा हो गई है। क्योंकि वे हमेशा से कांग्रेस से ज्यादा भाजपा को कोसते रहे हैं। उनके बड़े भाई अनिल दुबे छत्तीसगढ़ समाज पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष हैं, जो कि भाजपा नेताओं के खिलाफ कड़वे वचन के लिए पहचाने जाते हैं। 

दुबे बंधु कई मायनों में अन्य नेताओं से अलग हैं। वे धूम्रपान नहीं करते और शुद्ध शाकाहारी भी हैं। मृत्युंजय तो कभी किसी से हाथ नहीं मिलाते। कोई हाथ मिलाने के लिए आगे बढ़ाता है, तो वे दोनों हाथ जोड़कर नमस्कार कर देते हैं। ऐसा नहीं कि वे कोई छुआ-छूत जैसी सामाजिक विकृतियों पर विश्वास रखते हैं, उनका परिवार आनंदमार्गी संप्रदाय से जुड़ा हुआ है और उनकी परम्पराओं पर विश्वास करते हैं। मगर उनके हाथ न मिलाने को भी विरोधी चुनाव प्रचार में उनके खिलाफ उपयोग कर रहे हैं। इससे परे अनिल दुबे, मृत्युंजय जितने कट्टर नहीं है। उनकी खासियत यह है कि वे जेब में हाथ नहीं डालते। उनका शहर के महंगे होटलों में डेरा रहता है। उनसे मेल मुलाकात के लिए आए लोगों का अनिल दुबे हमेशा चाय-जलपान से स्वागत करते हैं। उन्हें कभी किसी होटल में बिल देने के लिए जेब में हाथ डालते नहीं देखा गया। उनका इतना प्रभाव-सम्मान है कि होटलवाले भी कभी उन्हें कोई बिल नहीं देते।  (rajpathjanpath@gmail.com)

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