राजपथ - जनपथ

छत्तीसगढ़ की धड़कन और हलचल पर दैनिक कॉलम : राजपथ-जनपथ : महंत के कामयाब दिन
छत्तीसगढ़ की धड़कन और हलचल पर दैनिक कॉलम : राजपथ-जनपथ : महंत के कामयाब दिन
Date : 07-Mar-2020

महंत के कामयाब दिन

छत्तीसगढ़ विधानसभा ने कार्य-संचालन के मामले में देश में अलग ही पहचान बनाई है। विधानसभा के प्रथम अध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद शुक्ल ने   विधानसभा के कार्य संचालन को लेकर कई नियम बनाए, जिनसे  सदन की कार्रवाई अच्छी तरह से चल रही है। शुक्ल ने सदन की कार्रवाई के दौरान गर्भगृह में जाने पर सदस्य के निलंबित होने का नियम बनाया था, जिसका अब भी पालन हो रहा है। भाजपा शासनकाल में प्रेमप्रकाश पांडेय के अध्यक्षीय कार्यकाल को बेहतर आंका जाता है। उनके बाद धरमलाल कौशिक और गौरीशंकर अग्रवाल भी अध्यक्ष रहे, लेकिन मौजूदा अध्यक्ष डॉ. चरणदास महंत अपने पूर्ववर्ती राजेंद्र प्रसाद शुक्ल और प्रेमप्रकाश पांडेय की तरह मजबूत पकड़ वाले नजर आए। उन्होंने अपने छोटे से कार्यकाल में सदन के कार्य संचालन मामले में अलग ही छाप छोड़ी है। 

डॉ. महंत पहली बार अविभाजित मप्र में वर्ष-1980 में विधायक बने। वे लोकसभा के भी सदस्य रहे हैं। उन्हें संसद और विधानसभा का गहरा अनुभव है और इसकी झलक उनकी कार्यपद्धति में भी नजर आती है। पिछले दिनों उन्होंने हल्के सवाल पूछने पर एक सदस्य को टोक दिया। उन्होंने कहा कि विधायकों के एक सवाल के जवाब पर 10 लाख रुपये खर्च होते हैं। कॉलेज में कितने पद खाली हैं और खाली पद कब तक भरे जाएंगे, जैसे एकदम सामान्य सवालों का जवाब वे मंत्री से व्यक्तिगत तौर पर मिलकर ले सकते हैं। आसंदी के सुझाव की संसदीय कार्यमंत्री रविंद्र चौबे और पूर्व सीएम अजीत जोगी ने भी तारीफ की। इसी तरह उन्होंने  एक सवाल के परिशिष्ट में 170 पेज के जवाब पर चिंता जताई। उन्होंने फिजूलखर्ची की तरफ सरकार और सचिवालय का ध्यान आकृष्ट कराया। डॉ. महंत के कार्यकाल में महात्मा गांधी की 150वीं जयंती पर 2 दिन का विशेष सत्र हुआ। जिसमें सत्ता और विपक्ष के सदस्य एक ही तरह के पोशाक में आए थे और सदन में महात्मा गांधी के जीवन-दर्शन पर यादगार चर्चा हुई। इस तरह का आयोजन देश में पहली बार किसी विधानसभा में हुआ था। अब तक के तौर-तरीकों से महंत कई मामले में अपने पूर्ववर्तियों से भी बेहतर दिख रहे हैं। 

पिछले दिनों अमरीका के दौरे पर गए मुख्यमंत्री भूपेश बघेल महंत को साथ ले गए थे। वहां हार्वर्ड विश्वविद्यालय के मुख्य कार्यक्रम में सीएम से सवाल किया गया कि उन्होंने एक दलित को मुख्य सचिव बनाया है, और एक कबीरपंथी को विधानसभाध्यक्ष, तो भूपेश ने महंत की तारीफ करते हुए उनके लंबे और कामयाब चुनावी और राजनीतिक इतिहास को इस रफ्तार से गिना दिया था कि मानो वे इस जवाब की तैयारी करके गए थे।

म्युनिसिपल में कोई सुनने वाले हैं?
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर का सबसे अधिक इस्तेमाल हो चुका श्मशान ऐसे बुरे हाल में है कि देखते नहीं बनता। जाने किस वक्त इसका नाम किस वजह से मारवाड़ी श्मशान रखा गया था। अब वहां अर्थियों के साथ आ जाने वाले गद्दे-तकियों से लेकर दूसरे कपड़ों तक के ढेर भीतर लगे हुए हैं जिनसे लगता है कि हफ्तों से यहां की सफाई नहीं हुई है। शायद ही कोई ऐसा दिन जाता होगा जब किसी न किसी अंतिम संस्कार में म्युनिसिपल के पार्षद या वहां के अफसर न पहुंचते हों, लेकिन जिस शहर में दसियों लाख रुपये खर्च करके स्मार्ट सिटी के नाम पर सफाई की तस्वीरों से दीवारों को भर दिया जा रहा है, उस शहर में ऐसी गंदगी को हटाने में दिलचस्पी नहीं दिखती क्योंकि वॉल राईटिंग का महंगा ठेका होता है, और कचरा हटाने में वैसी कमाई शायद नहीं रहती है। पता नहीं केंद्र सरकार के दिल्ली से आने वाले लोग मरघट तक जाने की जहमत उठाते हैं या नहीं, लेकिन अगर शहर के बीच के इस बहुत पुराने श्मशान की गंदगी वे देखें तो इसका दर्जा और नीचे चले जाना तय है। फिर यह भी है कि रोजाना इस जगह पर पहुंचने वाले हजारों लोगों को कम से कम घंटे भर ऐसी ही गंदगी के बीच बैठना पड़ता है। म्युनिसिपल में कोई सुनने वाले हैं? (rajpathjanpath@gmail.com)

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