राजपथ - जनपथ

छत्तीसगढ़ की धड़कन और हलचल पर दैनिक कॉलम : राजपथ-जनपथ : सियासत की मैली गंगा
छत्तीसगढ़ की धड़कन और हलचल पर दैनिक कॉलम : राजपथ-जनपथ : सियासत की मैली गंगा
23-May-2020

सियासत की मैली गंगा

राजनीति में विपरीत विचारधारा के प्रवक्ताओं की नोंकझोंक और आरोप-प्रत्यारोप सामान्य बात है, लेकिन छत्तीसगढ़ में बीजेपी-कांग्रेस के प्रवक्ता एक दूसरे के खिलाफ ऐसे भिड़ते हैं, जैसे जानी-दुश्मन हों। दोनों एक दूसरे के खिलाफ हमला बोलने का एक भी मौका नहीं छोड़ते। अखबारों से लेकर सोशल मीडिया में एक दूसरे के खिलाफ टिप्पणियां करने से नहीं चूकते। हाल ही में बीजेपी प्रवक्ता ने अपने फेसबुक पर लिखा कि शहर के बड़े अस्पताल में कांग्रेस के बड़बोला प्रवक्ता ने ब्लैकमेलिंग की कोशिश की। इस पोस्ट में पहले अस्पताल का नाम भी लिखा गया था। जिसे बाद में हटा दिया गया। चर्चा है कि अस्पताल प्रबंधन की ओर से कड़ी आपत्ति के बाद नाम हटा लिया गया। कहा जा रहा है कि अस्पताल प्रबंधन ने कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी थी। ब्लैकमेलिंग की कोशिश वाले इस पोस्ट में कांग्रेस प्रवक्ता का नाम तो नहीं लिखा गया है, लेकिन तमाम लोग समझ रहे हैं कि यह किसके लिए लिखा गया है। लेकिन फिर भी सत्ताधारी दल के किसी प्रवक्ता पर ऐसे आरोप लगे हैं, तो वो गंभीर मामला है। हालांकि जिसके खिलाफ आरोप की संभावना जताई जा रही है, उसने पार्टी के वरिष्ठ नेताओं और सरकार में बैठे लोगों को मामले से अवगत कराया है और मांग की है कि पार्टी को कानूनी कार्रवाई करनी चाहिए। बीजेपी प्रवक्ता पहले भी ऐसे सनसनीखेज पोस्ट के जरिए सुर्खियां बटोर चुके हैं। राजधानी के एक अपहरणकांड पर भी उन्होंने पोस्ट किया था, जिसमें उनके खिलाफ आईटी एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया था, फिर बाद में उन्होंने माफी मांगते हुए पोस्ट को हटा लिया था। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि सियासत में आरोप-प्रत्यारोप केवल जुबानीखर्च या छवि धूमिल करने का हथियार बन गया है। आरोप-प्रत्यारोप व्यक्तिगत लड़ाई और दुर्भावना तक पहुंच गए हैं, जिसके कारण उसकी गंभीरता भी कम हुई है। बीजेपी या कांग्रेस प्रवक्ता के पास कोई तथ्य हैं, तो उसे उजागर करना चाहिए, ताकि सियासत में अच्छे और साफ सुथरी छवि वाले लोग आएं, लेकिन यह सब बीते दिनों की बात हो गई। विपक्ष के साथ अपने भी आरोपों की बहती गंगा में हाथ धोने में लग जाते हैं। यहां भी कांग्रेस के ही कुछ लोग मामले को तूल देकर गंगा को मैली कर रहे हैं।

न्याय के खुलासे में अन्याय

भाजपा के नेता राजीव गांधी न्याय योजना को लेकर नुक्ताचीनी कर रहे थे कि कांग्रेस के लोगों ने एक सूची जारी कर दी। जिसमें खुलासा हुआ कि न्याय योजना के जरिए पूर्व सीएम रमन सिंह और उनके पुत्र अभिषेक सिंह के खाते में करीब 50 हजार रूपए जमा हुए। नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक के खाते में 25 हजार जमा किए गए। कुछ इसी तरह अन्य भाजपाई पूर्व मंत्री ननकीराम कंवर, पुन्नूलाल मोहिले, पूर्व सांसद दिनेश कश्यप, लच्छूराम कश्यप, बैदूराम कश्यप, लता उसेंडी, दयालदास बघेल और श्याम बिहारी जायसवाल के भी खाते में धान खरीद की अंतर राशि जमा हुई है।

चूंकि इन नेताओं का नाम किसान के रूप में प्राथमिक सोसायटियों में दर्ज है और सोसायटी के जरिए अपना धान बेचा है, तो न्याय योजना का  फायदा मिलना ही था, इसमें कुछ भी गलत नहीं है। कांग्रेस के किसान नेताओं को भी योजना का फायदा हुआ है और उनके खाते में भी राशि जमा हुई है। मगर सूची को लेकर भाजपा में हलचल ज्यादा है। वजह यह है कि रमन सिंह-संगठन में हावी खेमे के हितग्राही नेताओं की सूची जारी हुई है। सिर्फ ननकीराम कंवर और बस्तर के एक-दो नेताओं के नाम अपवाद स्वरूप सूची में जरूर हैं, लेकिन रमन विरोधी खेमे के नेताओं को न्याय योजना के जरिए कितनी राशि मिली है, इसका खुलासा नहीं किया गया। जबकि नारायण चंदेल, अजय चंद्राकर और शिवरतन शर्मा जैसे बड़े किसान हैं। कुल मिलाकर सूची के साथ न्याय नहीं किया गया।

किसानों को बेनिफिट- एक तीर से दो निशाना

राज्य सरकार ने कोरोना के संकट में किसानों के लिए न्याय योजना शुरु की है। किसानों के खातों में सीधे पैसे ट्रांसफर किए गए। योजना की लांचिंग के लिए कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी, राहुल गांधी समेत तमाम आला नेता जुड़े थे। तमाम नेताओं ने योजना की खूब तारीफ की। राहुल गांधी ने कहा कि कोरोना के संकट में छत्तीसगढ़ सरकार ने किसानों के साथ न्याय किया है। उन्होंने प्रधानमंत्री से भी आग्रह किया था कि किसानों और मजदूरों के खातों में सीधे पैसे ट्रांसफर किया जाएगा तो उनकी आर्थिक स्थिति अच्छी रहेगी। उन्होंने यह भी कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार की यह योजना पूरे देश के लिए रोल मॉडल है और देशभर में इसे लागू किया जाना चाहिए। इसमें कोई शक नहीं कि योजना से किसानों का भला होगा और उनको बड़ी राहत मिली है, लेकिन कन्फ्यूजन यह है कि जब यह राशि कोरोना संकट के कारण दी जा रही है, जैसा कि राहुल गांधी ने कहा है, तो फिर धान के समर्थन मूल्य की बकाया राशि कब मिलेगी। हालांकि सरकार ने किसानों को समर्थन मूल्य की बकाया राशि देने के लिए 57 सौ करोड़ का प्रावधान बजट में कर दिया था और अभी जो पैसा दिया गया है, वो बकाया राशि का ही पैसा है। इस बीच कोरोना का संकट आ गया तो मुश्किल घड़ी में सरकारी मदद का नया एंगल आ गया। अब ऐसे में किसान इसे कोरोना रिलीफ मानें या 25 सौ रुपए समर्थन मूल्य की बकाया राशि, यह उनकी समस्या है, लेकिन सरकार ने तो एक तीर से दो निशाना साध दिया है।

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