राजपथ - जनपथ

छत्तीसगढ़ की धड़कन और हलचल पर दैनिक कॉलम : राजपथ-जनपथ : ऐसा रूख पहली बार...
छत्तीसगढ़ की धड़कन और हलचल पर दैनिक कॉलम : राजपथ-जनपथ : ऐसा रूख पहली बार...
03-Jun-2020 6:18 PM

ऐसा रूख पहली बार...

छत्तीसगढ़ के पुलिस मुख्यालय में जिस तरह से एक-एक करके कई अफसर इक_ा हो गए हैं, और इनमें से कई के पास कोई काम भी नहीं है, तो पुलिस मुख्यालय की बातचीत में यह राय सामने आई कि वहां एक कैरम क्लब, एक बिलियर्ड्स रूम, और एक टी-क्लब शुरू कर दिया जाए जिसमें लोग बैठ सकें। एक अफसर ने कहा कि अब इतने आईपीएस पीएचक्यू से बाहर हो चुके हैं कि वहां काम करने वाले कम पडऩे लगेंगे, तो दूसरे ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की कई बरस पहले की तत्कालीन सीएम रमन सिंह को दी गई सलाह याद दिलाई कि बड़े अफसर जितने कम हों, काम उतना ही अच्छा होता है। डीजीपी डी.एम. अवस्थी को भी ऐसा नहीं लग रहा है कि काम करने वाले अफसर कम हैं। अब जिस तरह से तीन एडीजी एकमुश्त खाली हैं, उससे बाकी प्रदेश में भी अफसरों को यह समझ आ गया है कि वे तभी तक अपनी जगह सुरक्षित हैं जब तक सरकार चाहती है। इससे एक बात तो यह हुई है कि जिस तरह कई अफसर अपने आपको भगवान समझते थे, उनका वह दंभ खत्म हो गया है। इस सरकार ने आते ही जिस तरह मुख्य सचिव के लिए निर्धारित बंगले को खाली कराकर उसे बाकी अफसरों की तरह का एक अफसर, और किसी भी मंत्री से कम महत्वपूर्ण अफसर बता दिया था, तभी से अफसरों को सरकार के रूख का फर्क दिख गया था। अब बड़े-बड़े अफसर भी यह समझ गए हैं कि उनमें और छोटे कर्मचारियों की सुरक्षा में कोई बुनियादी फर्क नहीं है। जिस तरह वर्दीधारी बड़े अफसर किसी छोटे सिपाही से नाराज होने पर उसे राजधानी से उठाकर सीधे बस्तर फेंकते थे, वैसा सुलूक बड़े अफसरों के साथ भी हो सकता है यह पहली बार दिख रहा है।

आखिरकार जीत रमन की...

आखिरकार काफी खींचतान के बाद पूर्व केन्द्रीय मंत्री विष्णुदेव साय को प्रदेश भाजपा की कमान सौंप दी गई है। चर्चा तो यह है कि विष्णुदेव खुद अध्यक्ष बनना नहीं चाहते थे। उनकी इच्छा राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग के चेयरमैन बनने की थी। चेयरमैन का पद अभी भी खाली है। लॉकडाउन के पहले से अध्यक्ष पद के लिए काफी उठा-पटक चल रही थी। अजय चंद्राकर की अगुवाई में चार सीनियर विधायक राष्ट्रीय अध्यक्ष जगतप्रकाश नड्डा से मिल आए थे। प्रदेश के सांसदों ने भी अपनी भावनाओं से राष्ट्रीय महामंत्री (संगठन) बीएल संतोष को अवगत करा दिया था। इन सभी को उम्मीद थी कि किसी नए चेहरे अथवा तेज तर्रार नेता को प्रदेश की कमान सौंपी जाएगी।

बृजमोहन अग्रवाल खेमे से राज्यसभा सदस्य रामविचार नेताम और शिवरतन शर्मा का नाम चर्चा में था। पूर्व मंत्री अजय चंद्राकर भी दौड़ में थे। लॉकडाउन के बाद पिछले कुछ दिनों से पूर्व मंत्री प्रेमप्रकाश पाण्डेय के बंगले में रोजाना दर्जनभर नेताओं की बैठक हो रही थी। पार्टी की इन गतिविधियों पर संगठन में हावी खेमे की पूरी नजर थी। अंत में सौदान सिंह और रमन सिंह खेमा रामविचार-शिवरतन को झटका देकर विष्णुदेव साय की नियुक्ति कराने में सफल रहा।

पिछले कुछ समय से पार्टी हल्कों में चर्चा थी कि रमन सिंह की पार्टी संगठन में पकड़ कमजोर हो रही है। जिस तरीके से रमन सिंह, नेता प्रतिपक्ष की नियुक्ति में विधायक दल की राय को नजरअंदाज कर धरमलाल कौशिक की नियुक्ति कराने में सफल हुए थे, वैसा शायद अब न हो पाए। मगर विष्णुदेव साय की नियुक्ति से सारे अटकलों पर विराम लग गया। विष्णुदेव की नियुक्ति पर सौदान सिंह और रमन सिंह के विरोधी काफी खफा हैं। बृजमोहन अग्रवाल के लंबे समय तक प्रवक्ता रहे देवेन्द्र गुप्ता ने फेसबुक पर बृजमोहन खेमे के नेताओं की बैठकों पर तीखा तंज कसा और लिखा कि ये चर्चा करते रहे उधर... बनवा लिया अपना प्रदेश अध्यक्ष। ऐसे में असंतुष्ट नेताओं को साधना विष्णुदेव साय के लिए चुनौती रहेगी।

लम्बे समय तक बृजमोहन अग्रवाल के प्रवक्ता रहे देवेंद्र गुप्ता ने भूपेश बघेल को बधाई देते हुए साय-रमन की फोटो पोस्ट की है-भूपेश जी आपको और आपकी सरकार को बधाई हो...आपकी राह आसान कर रहे हैं रमन सिंह जी...

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