राजपथ - जनपथ

छत्तीसगढ़ की धड़कन और हलचल पर दैनिक कॉलम : राजपथ-जनपथ : रमन का विधानसभा सीट पर मुकाम
10-Aug-2020 7:03 PM 9
छत्तीसगढ़ की धड़कन और हलचल पर दैनिक कॉलम : राजपथ-जनपथ : रमन का विधानसभा सीट पर मुकाम

रमन का विधानसभा सीट पर मुकाम

राजनांदगांव के विधायक और पूर्व सीएम डॉ. रमन सिंह का राजनांदगांव में नया आशियाना तैयार हो गया है। अच्छा मुहुर्त देखकर अगले दो-तीन दिन में पूर्व सीएम शहर के मध्य स्थित बंगले के कार्यालय का उद्घाटन कर लोगों से मेल-मुलाकात का सिलसिला शुरू करेंगे। सुनते है कि डॉ. सिंह ने यह बंगला किराए पर लिया है। इससे पहले सीएम रहते उनका सरकारी निवास था, वह अब डीआईजी निवास बन चुका है। इसके बाद से रमन सिंह सर्वसुविधायुक्त बंगले की तलाश में थे। 

चर्चा है कि पूर्व सीएम को उनके करीबियों ने नांदगांव में एक स्थाई कार्यालय खोले जाने की सलाह दी थी। विधायक होने की वजह से उन पर नांदगांव में ही रहने का दबाव है। पार्टी के कुछ कारोबारी नेताओं ने पूर्व सीएम के लिए उपयुक्त बंगला ढूंढने में मदद की। हालांकि यह पहले जैसा आलीशान तो नहीं है, लेकिन सुविधाओं में कोई कमी नहीं है। इस बंगले के रंगरोगन के बाद इसे शानदार रूप दिया गया है। कोरोना संक्रमण निपटने के बाद पूर्व सीएम ज्यादातर समय यहां रहकर सरकार के खिलाफ व्यूह रचना तैयार करेंगे, साथ ही विधानसभा सीट भी देखेंगे. कई नेता बड़े होने के बाद चुनाव क्षेत्र को थोड़ा सा भूलते हैं, तो अगले चुनाव में वह हाथ से निकल जाता है।

याददाश्त का राज

दिल्ली के राजनीतिक गलियारों में पीयूष गोयल की इस बात की तारीफ होती है कि वे महापुरूषों-राजनेताओं को जन्मदिन की बधाई देना नहीं भूलते हैं। उनका बधाई संदेश  ट्विटर-फेसबुक पर देखा जा सकता है। कुछ लोग आश्चर्य करते हैं कि इतने लोगों का जन्मदिन उन्हें  कैसे याद रहता है। मगर इसमें अचरज वाली कोई बात नहीं है। विज्ञापन का डिजाइन तैयार करने वाले कई लोग इस काम में जुटे हुए हैं और उन्हें इस एवज में थोड़ी सी आमदनी भी हो रही है।

रायपुर में बधाई संदेश का डिजाइन तैयार करने का सालाना 15 हजार रूपए का पूरा पैकेज है। इसमें किसी नेता को अपनी पार्टी के बड़े नेताओं-महापुरूषों का जन्मदिन याद रखने की जरूरत नहीं है। डिजाइनर सुबह-सुबह बधाई संदेश वाला विज्ञापन तैयार कर आपको भेज देगा, जिसे आप फेसबुक- ट्विटर और इंस्टाग्राम व वॉटसएप में शेयर कर सकते हैं। रायपुर के कई भाजपा नेता इस तरह की सेवाएं ले रहे हैं। कुछ बड़े नेताओं ने तो अपना फेसबुक और ट्विटर एकाउंट हैंडल करने के लिए कर्मचारी तक नियुक्त कर रखा है।

आरएसी कन्फर्म करने की कोशिश

छत्तीसगढ़ में निगम-मंडलों में मनोनयन से हर कोई खुश हो, ऐसा नहीं है। कुछ लोग मनोनीत होने के बाद भी नाखुश हैं कि उन्हें उनके योगदान या उनके महत्व के मुताबिक कुर्सी नहीं मिली। ऐसे ही एक व्यक्ति ने अभी से एक दूसरी कुर्सी के लिए मुहिम छेड़ दी है, और उसका कहना है कि अभी मिली कुर्सी रेलवे की आरएसी जैसी है, बर्थ मिलने के पहले तक किसी और के साथ मिल-बांटकर बैठने के लिए मिली एक बर्थ। अब यह तो हाथ आ गई है, इसके बाद अब आरएसी को कन्फर्म करने को लेकर कोशिश जारी है।

नई जरूरत, नई फैशन, नई शब्दावली

समय के साथ-साथ भाषा में कुछ नए शब्द भी आ जाते हैं। अभी जिस बड़े पैमाने पर लोगों की जिंदगी में मास्क आ गया है, और पहले से खासकर महिलाएं जिस तरह स्कार्फ का इस्तेमाल करती थीं, तो अब फैशन की एक जरूरत आ गई कि इनको मिलाकर एक बनाया जाए। और जाहिर है कि जब कोई सामान नया बनता है, तो उसका नाम भी नया पड़ सकता है। मास्क और स्कार्फ मिलाकर कुछ ब्रांड मास्कार्फ बनाकर बाजार में उतार चुके हैं और कुछ दूसरी कंपनियों ने माफर््स नाम रखा है। चेहरा भी ढंक जाए, और गला भी।

हिन्दुस्तान में बहुत से फैशन ब्रांड अब मर्दों के शर्ट के साथ मिलते-जुलते या उसी कपड़े के मास्क देने लगे हैं, महिलाओं के कुर्तों के साथ तो मास्क तुरंत इसलिए भी आ गए कि उनमें सिलाई करते समय कतरनें बचती हैं, और कतरनों का इससे बेहतर और कोई इस्तेमाल नहीं हो सकता कि उनके मैचिंग मास्क बना दिए जाएं, और बिक्री बढ़ाने के लिए- मैचिंग मास्क फ्री, जैसा नारा लगा दिया जाए।

पश्चिम में अभी एक नई फैशन ऐसी चली है कि लोग टाई और मास्क एक ही कपड़े का पहनना शुरू कर रहे हैं ताकि अलग-अलग रंग और डिजाइन की मैचिंग का रोज का सरदर्द न रहे। हो सकता है कि इस जोड़े का नाम मास्क और टाई मिलाकर मास्टाई हो जाए, या टाई और मास्क मिलाकर टास्क हो जाए। आज किसी के पास इतना वक्त तो है नहीं कि सारे शब्दों को अलग-अलग लिखें, इसीलिए तो हिन्दुस्तान में एक नया शब्द मोशा शुरू हुआ है। जिन्हें न मालूम हों, उन्हें बता देना ठीक है कि यह मोदी और शाह को मिलाकर बनाया गया है।

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