राजपथ - जनपथ

छत्तीसगढ़ की धड़कन और हलचल पर दैनिक कॉलम : राजपथ-जनपथ : पुरंदेश्वरी भाजपा को नई प्रदेश प्रभारी
16-Nov-2020 5:01 PM 260
छत्तीसगढ़ की धड़कन और हलचल पर दैनिक कॉलम : राजपथ-जनपथ : पुरंदेश्वरी भाजपा को नई प्रदेश प्रभारी

पुरंदेश्वरीभाजपा को नई प्रदेश प्रभारी

पूर्व केन्द्रीय मंत्री डी पुरंदेश्वरी को प्रदेश भाजपा का प्रभारी बनाया गया है। पहली बार सह प्रभारी की नियुक्ति की गई है। बिहार के भाजपा विधायक नितिन नवीन को यह जिम्मेदारी दी गई है। नवीन चौथी बार विधायक बने हैं, और वे बिहार भाजयुमो के अध्यक्ष रह चुके हैं। इससे पहले के प्रदेश प्रभारी डॉ. अनिल जैन कोई ज्यादा प्रभावी नहीं रहे। यहां  सौदान सिंह की ही चलती रही है। नए प्रभारी बनने के बाद कोई बड़ा बदलाव आएगा, इसकी उम्मीद बेहद कम है। वजह यह है कि बिहार चुनाव में भाजपा की अच्छी सफलता से सौदान सिंह का कद बढ़ा है।   सौदान सिंह के पास बिहार और तेलंगाना का प्रभार है। प्रदेश प्रभारी पुरंदेश्वरी तेलंगाना से आती हैं, और चर्चा यह भी है कि उन्हें प्रभारी बनाने में सौदान सिंह की भूमिका रही है। कुल मिलाकर प्रदेश संगठन में सौदान सिंह का दबदबा कायम रहेगा।

आईपीएस लिस्ट निकलेगी?

आईपीएस के वर्ष-2007 बैच के अफसर दीपक झा, जितेन्द्र सिंह मीणा, अभिषेक शांडिल्य, डीके गर्ग और बालाजी राव पदोन्नत होकर डीआईजी बनने वाले हैं। उनके बैचमेट मध्यप्रदेश में पदोन्नत भी हो गए हैं। यहां भी उन्हें पदोन्नति देने की तैयारी है। दीपक बस्तर, जितेन्द्र बालोद और बालाजी जशपुर एसपी हैं। डीपीसी के बाद इनमें से कुछ के प्रभार बदले भी जा सकते हैं। कुल मिलाकर आईपीएस अफसरों की एक लिस्ट जल्द निकल सकती है। 

उत्सव, उदारता, प्रतिशोध और अवसाद

शायद ही कहीं से ख़बर आई हो कि पूरी दीपावली बाजारों में भीड़ के दौरान सोशल डिस्टेंस का पालन नहीं करने की कोई कार्रवाई स्थानीय प्रशासन ने की। या फिर रात 8 बजे से 10 बजे तक पटाखे फोडऩे के नियम को तोडऩे पर कार्रवाई की गई। दीपावली के दौरान कोरोना जांच केन्द्रों में कम लोग पहुंचे और नये संक्रमित भी कम निकलकर आये। आर्थिक मंदी और बेरोजगारी की दिक्कत से जूझ रहे परिवारों ने दिल और बटुआ खोलकर मिठाईयां, पटाखे कपड़े, जेवर खरीदे। कितना संक्रमण और प्रदूषण फैला, हिसाब शायद बाद में हो।  रंगोली, रोशनी और पटाखों की भीड़ में यह बात गुम हो गई कि अंधेरा कहां है। जरूरतमंद किसान इस दिन भी कुछ नगदी की उम्मीद लिये मंडियों में धान बेचते दिखे। रायपुर की कोतवाली और बिलासपुर के शनिचरी सहित हर शहर में मजदूर काम मिलने की उम्मीद में दीपावली की सुबह भी खड़े हुए थे। जिस तरह से राष्ट्रीय पर्वों पर, महिला दिवस पर मिलते हैं। दीपावली खुशी का पर्व, पर प्रतिशोध भारी पड़ा। हत्या की कम से कम पांच वारदातें सामने आईं। मुंगेली की जिला जज दीपावली की अगली सुबह फांसी पर लटकी हुई मिली। शायद बहुत ज्यादा रोशनी और पटाखों की गूंज ने उन्हें अवसाद में घेर लिया।

बघेल और बिहार चुनाव

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को जिम्मेदारी दी गई कि उनकी मौजूदगी में बिहार विधायक दल का नेता चुन लिया जाये। बघेल और स्क्रीनिंग कमेटी के चेयरमैन अविनाश पांडेय की मौजूदगी में भागलपुर के विधायक अजीत शर्मा को नेता चुन लिया गया। उप-नेता, सचेतक, कोषाध्यक्ष जैसे पद भी बांटे गये। हालांकि बैठक के पहले खूब हंगामा हुआ। खबर मारपीट की भी है। केवल 19 विधायक हैं इसके बावजूद छत्तीसगढ़ से मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की वहां मौजूदगी कुछ खास कारणों की तरफ इशारा करती है। नीतिश कुमार की पार्टी जदयू के बुरी तरह परास्त होने के बावजूद उन्हें एनडीए गठबंधन का नेता चुना गया और आज वे मुख्यमंत्री पद की शपथ ले चुके। कहा जा रहा है, इसे लेकर भाजपा में असंतोष है। दो-दो उप मुख्यमंत्री रखकर नीतिश कुमार को उलझाया जाना, सुशील मोदी को मौका नहीं मिलना जैसे कुछ कारणों से बताते हैं जदयू में भी नाराजगी चल रही है। चिराग पासवान तो नीतिश कुमार के पीछे पड़े ही हैं। लब्बोलुआब यह है कि बघेल की मौजूदगी सिर्फ 19 विधायकों को एकजुट रखने और सर्वसम्मति से नेता चुनने के लिये नहीं थी। महाराष्ट्र का उदाहरण सामने है। आगे बिहार की राजनीति कोई करवट लेती है तो उनकी भूमिका और बड़ी हो सकती है।

चिटफंडियों को बुलाने वाले कहां हैं?

चिटफंड कम्पनियों में हजारों निवेशकों ने करोड़ों रुपये डुबा दिये। सरकार के चुनावी वायदों में उनका रुपया लौटाना भी शामिल था। धनतेरस के दिन एक अच्छी बात हुई कि इनमें से एक कम्पनी याल्सको रियल स्टेट की सम्पत्ति कुर्क करने के बाद निवेशकों को कुछ रकम लौटाई गई। निवेशकों में अधिकांश छत्तीसगढ़ के हैं पर दूसरे राज्यों के भी हैं। जो राशि मिली वह उनके निवेश का केवल 30 प्रतिशत है। रकम दुगना-तिगुना होने की उम्मीद लेकर लोगों ने इन कम्पनियों में राशि लगाई थी। यह राशि थोड़ा सा मरहम तो लगाती है। सन् 2018 तक किसी का एक रुपया नहीं लौटाया गया, न ही कम्पनियों के खिलाफ कोई कार्रवाई हुई। ये निवेश बीते 15 सालों में किये गये हैं। पर, वे लोग कहां हैं जिन्होंने इन कम्पनियों को छत्तीसगढ़ में घुसने और उन्हें पैठ बनाने का मौका दिया?

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