राजपथ - जनपथ

छत्तीसगढ़ की धड़कन और हलचल पर दैनिक कॉलम : राजपथ-जनपथ : जूनियर थानेदार की डिमांड
22-Nov-2020 5:45 PM 223
छत्तीसगढ़ की धड़कन और हलचल पर दैनिक कॉलम : राजपथ-जनपथ : जूनियर थानेदार की डिमांड

जूनियर थानेदार की डिमांड

बाल दिवस पर यूनिसेफ और इससे जुड़े एनजीओ एमसीसीआर की पहल के चलते कई दफ्तरों में बच्चों को एक घंटे के लिये प्रतीकात्मक अफसर बनने का मौका मिला। उद्देश्य था, सामाजिक जीवन की गतिविधियों को समझाकर बच्चों के व्यक्तित्व को उभारना। सबसे ज्यादा रुचि बच्चों ने पुलिस का इंचार्ज बनने में दिखाई। कुछ बच्चों ने तहसीलदार और दूसरे अधिकारियों का पद भी संभाला। प्राय: सभी बच्चों ने अपने सपनों की बातें की। जैसा कि होता है आम तौर पर सबने कहा कि वे  देश की और गरीबों की सेवा करना चाहते हैं इसलिये आईएएस, आईपीएस बनना चाहते हैं। दो दिन से चर्चा उस बच्चे की सबसे ज्यादा है कि जिसने पाली के थानेदार की कुर्सी संभाली। उसने कुर्सी पर बैठने के बाद घंटी बजाई और हवलदार को समोसा लेकर आने का फरमान सुनाया। थानेदार का रसूख क्या होता है उसे पता चल गया होगा, तभी पहला आदेश पसंदीदा समोसा लाने का दिया। हवलदार ने अपने जेब से पैसे खर्च कर समोसा खिलाया, या जुगाड़ से इस बारे में बच्चे को पता नहीं चलना चाहिये वरना उसकी पुलिस के बारे मे समझ और बढ़ जायेगी। अच्छा हुआ, एक ही घंटे ही सोहबत की मोहलत मिली। 

थाने तो खुलेंगे, साइबर एक्सपर्ट कहां हैं?

अलग-अलग प्रकृति व नये-नये तरीकों से ऑनलाइन ठगी बढ़ती जा रही है। तमाम जागरूकता अभियान के बावजूद ऐसे मामले रुक नहीं रहे हैं। अब हर किसी के हाथ में मोबाइल फोन है और ऑनलाइन लेन-देन एप के जरिये बड़ा आसान हो गया है। पर सब इसके इस्तेमाल के लिये जरूरी सावधानी से अनभिज्ञ नहीं होते। अपराधी इसी का फायदा उठा रहे हैं। पिछली कुछ गिरफ्तारियों में यह बात सामने आ चुकी है कि इस धंधे में इंजीनियरिंग व सॉफ्टवेयर कोर्स कर चुके युवा और छात्र भी बड़ी संख्या में शामिल हैं। इनका जाल देश में ही नहीं विदेशों में फैला हुआ है। हालांकि बीते कुछ समय से पुलिस भी हाई टेक हुई है और अनेक अपराधी पकड़े गये हैं पर एक्सपर्ट्स  की कमी के कारण अधिकांश मामलों का सुराग नहीं मिलता। इस समय रायपुर, दुर्ग, बिलासपुर, जगदलपुर व अम्बिकापुर में साइबर सेल हैं। अब इन जगहों पर अलग थाने खोलने की मंजूरी मिल गई है। बात यह है कि इनमें एक्सपर्ट्स की कमी कैसे दूर की जायेगी? साइबर कैडर के कुल तीन सब इंस्पेक्टर ही प्रदेश में भर्ती किये गये थे वे भी 10 साल पहले। बाकी पुलिस जवान यदि साइबर क्राइम को समझ रहे हैं तो अपनी रुचि से और अलग से हासिल की गई डिग्री की बदौलत। थानों को खोलना तो तभी कारगर होगा जब विशेषज्ञ पुलिस अधिकारियों, कर्मचारियों की भर्ती हो और मौजूदा टीम को अनुभवी हाथों से प्रशिक्षण मिले।

कोविड अस्पतालों के बिस्तर खाली पर भरोसा निजी पर

प्रदेश के कोविड अस्पतालों में जगह होने के बावजूद मरीज निजी अस्पतालों में इलाज के लिये जा रहे हैं। शिकायत लगातार आ रही है कि इनसे बड़ी रकम वसूल की जाती है। छत्तीसगढ़ में इन शिकायतों की जांच हुई और प्राइवेट अस्पतालों द्वारा मरीजों से वसूली गई राशि की जानकारी मांगी गई थी। पर कार्रवाई का कोई रास्ता स्वास्थ्य विभाग नहीं निकाल सका। कारण बेड, वेंटिलेटर, आईसीयू का चार्ज तो वे तय श्रेणी और दर के अनुसार ही ले रहे थे। अतिरिक्त खर्च जैसे एम्बुलेंस, दवा, पर्सनल केयर जैसी चीजों में बिल बढ़ाया गया था। अब तो संसद की समिति ने भी एक रिपोर्ट सभापति को सौंप दी है जिसमें बताया गया है कि इलाज महंगा नहीं होने के बावजूद उपचार के लिये देशभर के निजी अस्पतालों में बड़ी रकम वसूल की जा रही है। दिल्ली, अहमदाबाद जैसे शहरों में कोरोना की दूसरी लहर आई है। मान लें कि बिस्तरों की कमी का फायदा निजी अस्पताल वहां उठा रहे हों। पर छत्तीसगढ़ के कोरोना अस्पतालों में बिस्तर होने के बावजूद मरीज खर्चीले निजी अस्पतालों में जाना क्यों पसंद कर रहे हैं, इस पर स्वास्थ्य विभाग को जरूर विचार करना चाहिये।

एल्डरमैन पर भारी, सफाई कर्मचारी

किस नेता की सरकार में चलती है किसकी नहीं, यह कलेक्टर, एसपी और उनके नीचे के अधिकारियों को पता होता है। पर बिलासपुर में इसका अंदाजा थानेदारों को और यहां तक कि सफाई कर्मचारियों को भी है। जिनकी नहीं चलती उन्हें कई जगह सीधे उलझना पड़ता है पर नतीजा कुछ निकलता नहीं। बिलासपुर की नई-नई एल्डरमैन अजरा खान के साथ कुछ ऐसा हुआ। विधायक शैलेष पांडेय के खाते से उनका मनोनयन हुआ। बीते दिनों बृहस्पतिबाजार में धूल उड़ाने की बात को लेकर एक सफाई कर्मचारी से उनका विवाद हो गया। सफाई कर्मचारी ने भी कह दिया जो करना है कर लो, परवाह नहीं करता। विधायक समर्थक वहां सहानुभूति और विरोध जताने के लिये पहुंचे। लेकिन किसके खिलाफ धरना प्रदर्शन करते, सरकार तो अपनी ही है। महापौर भी अपने ही बैठे हुए हैं। तब एल्डरमैन ने उसकी कथित ‘बदतमीजी’ की थाने में शिकायत की। दावा है कि गृह मंत्री तक भी बात पहुंचाई गई है। पर अब तक न तो एल्डरमैन की लिखित शिकायत पर रिपोर्ट दर्ज की गई है और न ही नगर निगम ने सफाई कर्मचारी के खिलाफ कोई कार्रवाई की।

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