राजपथ - जनपथ

छत्तीसगढ़ की धड़कन और हलचल पर दैनिक कॉलम : राजपथ-जनपथ : जंगल में प्रमोशन का पेंच
08-Dec-2020 5:52 PM 205
छत्तीसगढ़ की धड़कन और हलचल पर दैनिक कॉलम : राजपथ-जनपथ : जंगल में प्रमोशन का पेंच

जंगल में प्रमोशन का पेंच

वन विभाग में पीसीसीएफ के खाली पद पर पदोन्नति के पेंच को सुलझाने की कोशिश चल रही है। वर्तमान में पीसीसीएफ के 4 पद हैं। पिछली सरकार के प्रस्ताव पर केन्द्र ने दो अतिरिक्त पदों को सीमित अवधि के लिए मंजूरी दी थी। अतिरिक्त पदों पर पदोन्नति भी हो गई। और अब जब पीसीसीएफ के रिक्त पद पर पदोन्नति की फाइल चली, तो सीएम ने तो कह दिया कि सिर्फ प्रमोशन के लिए अतिरिक्त पद बढ़ाने की जरूरत नहीं है।

पीसीसीएफ के स्वीकृत 4 पदों में मुदित कुमार सिंह, राकेश चतुर्वेदी, अतुल शुक्ला, संजय शुक्ला पदस्थ थे। मुदित सिंह डीजी सीजी कास्ट बने, तो रिक्त पद पर नरसिम्हराव पीसीसीएफ हो गए। अतिरिक्त पद पर पीसी पाण्डेय और देवाशीष दास पदोन्नति पा गए। अब देवाशीष दास रिटायर हुए, तो सीनियर एपीसीएफ जेईसी राव की पदोन्नति पर चर्चा हुई, लेकिन सीएम का रूख देखकर फाइल आगे नहीं बढ़ पा रही थी।

सुनते हैं कि वन विभाग ने अब पदोन्नति से जुड़े विवाद को सुलझाने के लिए नया प्रस्ताव दिया है कि जिसमें कहा गया कि केन्द्र सरकार ने पीसीसीएफ के दो अतिरिक्त पदों को अक्टूबर-2021 तक के लिए मंजूरी दी थी। इसलिए देवाशीष दास की जगह जेईसी राव को पदोन्नत किया जा सकता है। वैसे भी राव जुलाई में रिटायर होने वाले हैं। अक्टूबर के बाद अतिरिक्त पदों पर पदोन्नति नहीं होगी, और ये पद स्वमेव खत्म हो जाएंगे। उम्मीद है कि वन विभाग के नए प्रस्ताव को मंजूरी मिल जाएगी।

साय की अनदेखी?

दिग्गज आदिवासी नेता नंदकुमार साय भाजपा की मुख्य धारा में लौटना चाहते हैं। मगर उनके विरोधी ऐसा नहीं होने देना चाहते हैं। कम से कम साय के करीबी समर्थक तो ऐसा ही मानते हैं। साय को जब प्रदेश पदाधिकारियों की बैठक में प्रवेश की अनुमति नहीं मिली, तो इन चर्चाओं को बल मिला।

हालांकि संगठन के नेताओं का तर्क है कि सायजी प्रदेश के पदाधिकारी नहीं हैं, इसलिए उन्हें बैठक में नहीं बुलाया गया। मगर इसका कोई जवाब नहीं है कि नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक भी नंदकुमार साय की तरह कार्यसमिति के सदस्य हैं, लेकिन वे मंच पर बैठे थे। जबकि पार्टी के सबसे सीनियर नेता होने के नाते साय हर बैठक के लिए पात्रता रखते हैं। खुद साय नई प्रभारी की मौजूदगी में पार्टी की बैठकों को लेकर काफी उत्साहित थे।

वे सुबह से तैयार होकर नवनियुक्त प्रदेश प्रभारी डी पुरंदेश्वरी के स्वागत के लिए एयरपोर्ट पहुंच गए थे। वहां पुरंदेश्वरी को अपना परिचय दिया। पुरंदेश्वरी ने भी उनकी वरिष्ठता जानकर साय का पूरे सम्मान के साथ अभिवादन किया। नंदकुमार साय अविभाजित मप्र भाजपा के दो बार अध्यक्ष रहे।

राज्य बनने के बाद नेता प्रतिपक्ष बने। वे मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ भाजपा की कोर ग्रुप के सदस्य भी रहे, लेकिन अजजा आयोग के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद कोर ग्रुप से बाहर हो गए। अध्यक्ष पद से हटने के बाद उन्हें दोबारा कोर ग्रुप में नहीं लिया गया। बैठक में नहीं बुलाने से साय नाखुश बताए जा रहे हैं। जानकार मानते हैं कि दिग्गज आदिवासी नेता की उपेक्षा पार्टी को भारी पड़ सकती है। मगर एक बात साफ है कि सत्ता जाने के बाद भी पार्टी में गुटबाजी पर लगाम नहीं लग पाया है।

मैंने काफी बरसों पहले पढ़ा था

पोथी पढ़-पढ़ जग मुआ पंडित भया न कोय

ढाई अक्षर प्रेम का पढ़े सो पंडित होय

अब पता लगा ये ढाई अक्षर क्या है-

ढाई अक्षर के ब्रह्मा और ढाई अक्षर की सृष्टि

ढाई अक्षर के विष्णु और ढाई अक्षर के लक्ष्मी

ढाई अक्षर के कृष्ण और ढाई अक्षर की कान्ता।

(राधा रानी का दूसरा नाम)

ढाई अक्षर की दुर्गा और ढाई अक्षर की शक्ति

ढाई अक्षर की श्रद्धा और ढाई अक्षर की भक्ति

ढाई अक्षर का त्याग और ढाई अक्षर का ध्यान

ढाई अक्षर की तुष्टि और ढाई अक्षर की इच्छा

ढाई अक्षर का धर्म और ढाई अक्षर का कर्म

ढाई अक्षर का भाग्य और ढाई अक्षर की व्यथा

ढाई अक्षर का ग्रन्थ और ढाई अक्षर का सन्त

ढाई अक्षर का शब्द और ढाई अक्षर का अर्थ

ढाई अक्षर का सत्य और ढाई अक्षर की मिथ्या

ढाई अक्षर की श्रुति और ढाई अक्षर की ध्वनि

ढाई अक्षर की अग्नि और ढाई अक्षर का कुण्ड

ढाई अक्षर का मंत्र और ढाई अक्षर का यंत्र

ढाई अक्षर की श्वांस और ढाई अक्षर के प्राण

ढाई अक्षर का जन्म ढाई अक्षर की मृत्यु

ढाई अक्षर की अस्थि और ढाई अक्षर की अर्थी

ढाई अक्षर का प्यार और ढाई अक्षर का युद्ध

ढाई अक्षर का मित्र और ढाई अक्षर का शत्रु

ढाई अक्षर का प्रेम और ढाई अक्षर की घृणा

जन्म से लेकर मृत्यु तक हम बंधे हैं ढाई अक्षर में।

हैं ढाई अक्षर ही वक्त में और ढाई अक्षर ही अंत में।

समझ न पाया कोई भी है रहस्य क्या ढाई अक्षर में।

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