राजपथ - जनपथ

छत्तीसगढ़ की धड़कन और हलचल पर दैनिक कॉलम : राजपथ-जनपथ : अग्रवाल-शर्मा तनातनी
30-Dec-2020 6:26 PM 124
छत्तीसगढ़ की धड़कन और हलचल पर दैनिक कॉलम : राजपथ-जनपथ : अग्रवाल-शर्मा तनातनी

अग्रवाल-शर्मा तनातनी 

खबर है कि भाजपा के दो बड़े नेताओं गौरीशंकर अग्रवाल और शिवरतन शर्मा के बीच तनातनी चल रही है। हफ्तेभर पहले जिले की कोर कमेटी की बैठक में दोनों के बीच कहासुनी भी हुई। चर्चा है कि जिला संगठन में गौरीशंकर की पसंद पर सारी नियुक्तियां हो गई, जिससे  शिवरतन उखड़ गए। उन्होंने कमेटी की बैठक में गौरीशंकर का विरोध किया। 
शिवरतन ने यहां तक कहा कि आप एक बार विधायक रहे हैं, लेकिन पूरे जिले में अपनी चलाते हैं। यह ठीक नहीं है। इससे  संगठन कमजोर हो रहा है। सांसद सुनील सोनी ने भी बिना रायशुमारी  के नियुक्तियों पर नाराजगी जताई। गौरीशंकर ने अपनी तरफ से सफाई देने की कोशिश की, लेकिन दोनों नेता शांत नहीं हुए। 
शिवरतन ने तो रायपुर आकर पूर्व सीएम रमन सिंह से गौरीशंकर की शिकायत की है। प्रदेश प्रभारी डी पुरंदेश्वरी जनवरी के पहले हफ्ते में रायपुर आ रही हैं। शिवरतन और कुछ अन्य नेता बलौदाबाजार में नियुक्तियों की शिकायत प्रदेश प्रभारी से कर सकते हैं। 

अब काम की लगी इंदिरा बैंक घोटाले की सीडी

इंदिरा प्रियदर्शिनी बैंक घोटाले के मामले में तत्कालीन मैनेजर उमेश सिन्हा के नार्को टेस्ट की सीडी पुलिस ने अब जाकर कोर्ट में पेश की थी। सिन्हा ने तब सत्तारूढ़ भाजपा के शीर्ष नेताओं का नाम उगला था और उनके बीच करोड़ों रुपये बांटने की बात कही थी। पुलिस ने तब चालान पेश तो किया पर इस सीडी को ही चालान से हटा दिया। पीडि़त ग्राहकों ने कई बार मांग रखी कि नार्को टेस्ट में कही गई बातों को जांच में शामिल करे लेकिन विवेचना अधिकारियों ने इसे नहीं सुना। सरकार बदलने के बाद परिस्थितियां बदलती हैं। अब पुलिस को समझ में आया है कि न्याय के लिये इस सीडी को भी साक्ष्य के रूप में रखा जा सकता है। गनीमत यह है कि 26 करोड़ के कथित घोटाले वाले 14 साल पुराने मामले में अब तक फैसला नहीं आया है और केस निचली अदालत में ही चल रहा है। यदि अदालत किसी नतीजे पर पहुंच गई होती तो शायद यह सीडी किसी काम की नहीं होती।

टोल टैक्स में यात्रियों को कौन सुनेगा?

नये साल से जो चीजें बदल रही है उनमें नेशनल हाईवे की टोल प्लाजा से गुजरने का नियम भी शामिल है। 1 जनवरी से वाहनों में फास्टैग लगाना अनिवार्य होगा। इससे टोल प्लाजा पर गाडिय़ों की कतार नहीं लगेगी। शीशे पर लगे फास्टैग स्टिकर से ही राशि कटकर एजेंसी के खाते में चली जायेगी।

छत्तीसगढ़ में महाराष्ट्र ओडिशा सीमा पर बस्तर में रायपुर, दुर्ग के बीच आधा दर्जन से ज्यादा टोल प्लाजा हैं, पर रायपुर-बिलासपुर-रायगढ़ नेशनल हाईवे की बात इनमें सबसे अलग है। इस सड़क पर सालभर से ज्यादा वक्त हो गये भोजपुरी में बने टोल नाके में राशि वसूल की जा रही है, सड़क अब तक अधूरी है। लोग सवाल करते रह गये कि जब सड़क अधूरी है तो टैक्स क्यों? यह सड़क तीन हिस्सों में बननी है। रायपुर की ओर सिमगा तक की सड़क भी अधूरी है पर कम से कम राहत है कि अभी टोल टैक्स लेना यहां शुरू नहीं किया गया है। नये नियम में कहा गया है कि फास्टैग नहीं होने पर दुगना टैक्स वसूल किया जायेगा। पर यह नहीं बताया गया है कि लिंक, सर्वर खराब होने का बहाना करके यदि नगद राशि देने के लिये बाध्य किया जायेगा तो एजेंसी पर क्या कार्रवाई होगी?  देखा गया है कि देर रात से सुबह तक वाहन कम गुजरते हैं।

इस दौरान टोल नाकों पर कर्मचारी खड़े जाते हैं और फास्टैग सर्विस खराब होने की बात कहकर नगद राशि वसूल करते हैं। इसकी शिकायत करनी हो तो कोई नंबर डिस्प्ले होता नहीं दिखेगा। इस प्रक्रिया में समय तो लगता है ही, लोगों को फास्टैग में कटने वाली रकम से भी ज्यादा राशि का भुगतान भी करना पड़ता है। नेशनल हाईवे अथॉरिटी ने नये नियम में ग्राहकों के हित की तो कोई बात की ही नहीं। होना यह चाहिये कि यदि टोल प्लाजा की गलती से फास्टैग से राशि नहीं कट पा रही है तो वाहन चालकों से कोई वसूली ही न हो।  

चलो नये स्ट्रेन से भी दो-दो हाथ कर लें..

कोरोना के नये स्ट्रेन के खतरे पर शोधकर्ताओं ने जो निष्कर्ष निकाला है वह नये साल की उम्मीदों पर पानी फेरने जैसा है। ब्रिटेन में सार्स सीवीओ-2 को कोरोना वायरस का नया स्वरूप बताते हुए वहां के वैज्ञानिकों ने शोध किया और कहा है कि यदि इसे लेकर लापरवाही बरती गई तो 2021 में 2020 के मुकाबले ज्यादा लोग महामारी के शिकार होंगे, अस्पतालों में भर्ती होंगे और मारे जायेंगे। ब्रिटेन के बाद कई देशों में इस स्ट्रेन के मरीज पाये जाने के बाद भारत में भी इसके लक्षण मिलने लगे हैं। आज ही ब्रिटेन के लिये हवाई उड़ानों पर प्रतिबंध 7 जनवरी तक बढ़ाने की घोषणा नागरिक उड्डयन मंत्री ने कर दी । कई राज्यों ने नाइट कर्फ्यू लगा दिये जाने से नये साल का मजा भी किरकिरा हो चुका है। भारत सरकार यह भी कह रही है कि नये स्वरूप के वायरस पर भी वैक्सीन कारगर रहेगा। यह भी वैज्ञानिकों के रिसर्च पर ही आधारित निष्कर्ष है।

छत्तीसगढ़ में भी कम से कम छह पॉजिटिव केस नये लक्षण वाले मरीजों के आ चुके हैं। एम्स, सिम्स और दूसरे कोविड अस्पतालों में इनका इलाज बाकी मरीजों से अलग रखकर किया जा रहा है। एक सवाल सोशल मीडिया पर बहुत से लोग उठा रहे हैं कि दूसरी लहर की बात वैक्सीन की जरूरत को बनाये रखने के लिये फैलाई जा रही दहशत तो नहीं है, क्योंकि अरबों रुपये वैक्सीन की खोज और निर्माण पर खर्च हो चुके हैं। फिलहाल अपने प्रदेश में ऐसी कोई बदहवासी, दहशत नहीं है। पहले दौर में लोग इतने भयभीत हो चुके, भुगत चुके हैं कि वे इस नये स्ट्रेन से भी दो-दो हाथ करने के लिये मानसिक रूप से तैयार दिखाई दे रहे हैं।

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