राजपथ - जनपथ

छत्तीसगढ़ की धड़कन और हलचल पर दैनिक कॉलम : राजपथ-जनपथ : चिडिय़ा चुग गई खेत
21-Jan-2021 2:39 PM 195
छत्तीसगढ़ की धड़कन और हलचल पर दैनिक कॉलम : राजपथ-जनपथ : चिडिय़ा चुग गई खेत

चिडिय़ा चुग गई खेत

छत्तीसगढ़ में धान खरीदी अंतिम चरण पर है। एक नवंबर से खरीदी शुरू हुई थी जो 31 जनवरी तक चलेगी। इस दौरान किसान बोरियों, टोकन और रकबा घटने की समस्या से जूझते रहे पर बिक्री की रफ्तार घटी नहीं। कांग्रेस ने केन्द्र पर असहयोग का आरोप लगाया और विपक्ष ने राज्य सरकार को अव्यवस्था के लिये जिम्मेदार बताया। अब जब खरीदी के सिर्फ 6 कार्यदिवस बचे हैं, भाजपा इस मुद्दे पर जिला मुख्यालयों में धरना-प्रदर्शन और कलेक्टोरेट का घेराव करने जा रही है।

भाजपा के कार्यकर्ता तो अनुशासित हैं, आदेश मिला और तैनात हो जाया करते हैं। पर इस बार संगठन के पदाधिकारियों को उन्हें तैयार करने में काफी मुश्किल हो रही है। 13 जनवरी को भी जब प्रत्येक विधानसभा मुख्यालय में धरना दिया गया तो कई जगहों पर कुर्सियां खाली रहीं। अब 22 जनवरी के आंदोलन में इसकी पुनरावृत्ति न हो इसके लिये व्यक्तिगत सम्पर्क और सोशल मीडिया की मदद ली जा रही है। भीड़ ज्यादा से ज्यादा जुटे इसकी कोशिश हो रही है। भाजपा कार्यालय के बाहर कुछ कार्यकर्ता कहते हुए मिले कि अब जब धान खरीदी बंद होने के करीब आ गई है तो आंदोलन क्यों हो रहा है, पहले करना चाहिये था। दूसरे ने समझाया कि सरकार पर असर पड़े न पड़े, संगठन पर निगरानी रखने वालों पर तो पड़ेगा।

खिलाडिय़ों को कोरोना से नुकसान  

हाईस्कूल व हायर सेकेन्डरी बोर्ड के नतीजों में खिलाडिय़ों को बड़ा लाभ होता है। उपलब्धियों के आधार पर उन्हें बोनस अंक दिये जाते हैं। ये बोनस अंक केवल श्रेणी सुधार में मददगार नहीं होते बल्कि आगे चलकर नौकरियों में भी लाभ दिलाते हैं। पर इस बार कोविड-19 महामारी के कारण कक्षायें ऑनलाइन चलीं और खेल स्पर्धायें तो कुछ हुई ही नहीं। ऐसे में आने वाले बोर्ड एग्जाम में खिलाडिय़ों को कोई फायदा नहीं मिलने वाला है। हाल ही में कुछ खिलाडिय़ों ने स्कूल शिक्षा मंत्री को इस बारे में आवेदन भेजा है और मांग की है कि जिस तरह से कई कक्षाओं में जनरल प्रमोशन दिये गये, अनेक विषयों में औसत अंक देकर पिछले सत्र में लोगों को उत्तीर्ण किया गया, उसी तरह से बीते वर्षों के खेल प्रदर्शन के आधार पर उन्हें भी बोनस अंक दिया जाये। देखें, मंत्री क्या फैसला करते हैं।

यातायात माह की रस्म

यह सही है कि अधिकतर दुर्घटनायें लापरवाही के कारण होती है। बाइक पर तीन सवारी बिठाना उस पर तेज वाहन चलाना, हेलमेट नहीं पहनना, शराब पीकर गाड़ी चलाना ज्यादातर दुर्घटनाओं के पीछे हैं। मरवाही के विधायक डॉ. के. के. धु्रव ने अपने डॉक्टरी पेशे का अनुभव बताते हुए कहा कि उनके पास बाइक सवारों के 70-75 फीसदी ऐसे केस होते हैं जिन्हें हेलमेट नहीं पहनने के कारण गंभीर चोटें आईं। हेलमेट पहनकर चले होते तो दुर्घटना कम खतरनाक होती। कई बार इसी के चलते जान भी चली जाती है।

केन्द्र सरकार के सडक़ परिवहन मंत्रालय की ओर से बीते 28 सालों से यातायात सप्ताह मनाया जाता रहा है। इस बार सप्ताह की जगह महीने भर का कार्यक्रम रखा गया है। ज्यादातर कार्यक्रम निबंध, कविता, कहानी, पोस्टर और रैलियों के आयोजन तय किये गये हैं। पूरा अभियान ऐसा लग रहा है मानों यातायत सुरक्षा सिर्फ पुलिस का काम है। जबकि अन्य विभागों के साथ तालमेल के बिना दुर्घटनाओं को रोकने में मदद नहीं मिल सकती। नगर निगम को शहर सीमा की सडक़ें तो पीडब्ल्यूडी को बाहर की सडक़ें ठीक करनी है। गड्ढों का न होना, संकेतकों का न होना, पुल पुलिया में रेलिंग नहीं होना या फिर टूटा-फूटा होना दुर्घटनाएं लेकर आती है।

रायपुर बिलासपुर नेशनल हाइवे में तो सडक़ मार्ग संकेतक 100 की गति से गाड़ी चलाने की छूट देता है पर नई नई बनी इस सडक़ में कई जगह गड्ढे हैं जो 100 की गति पर चलाने में गंभीर हादसे की वजह बन सकती  है। परिवहन विभाग बसों, स्कूल बसों और दूसरे भारी वाहनों की फिटनेस टेस्ट करने में पीछे है। कुल मिलाकर जो रस्म अदायगी पहले एक सप्ताह के लिये हुआ करती थी, इस बार एक महीने तक होती रहेगी।

झूठ का असर सच से अधिक

गुजरात में सूरत की पुलिस ने रिलायंस जियो का ट्रेडमार्क लगाकर बनाए गए आटे के पैकेट बेचते लोगों को गिरफ्तार किया है। राधाकृष्ण ट्रेडिंग कंपनी के खिलाफ रिलायंस ने एफआईआर दर्ज कराई थी कि वह रिलायंस जियो के ट्रेडमार्क से आटे की बोरियां बेच रही है। इस खबर को पढक़र याद पड़ता है कि सोशल मीडिया पर पिछले कुछ हफ्तों से किसान आंदोलन पर आने वाली कई पोस्ट में जियो ब्रांड का आटा दिखता था, और रिलायंस के दावे को झूठा बताया जाता था कि वह किसी किसानी कारोबार में नहीं है। अब पता लगा कि बाजार के लोग ब्रांड की जालसाजी करके रिलायंस के लिए मुसीबत खड़ी कर रहे थे, कंपनी किसी एग्रो-प्रोडक्ट के कारोबार में नहीं है, और बार-बार दावा भी कर रही थी, लेकिन रिलायंस जियो की बोरियां दावे का मुंह चिढ़ा रही थीं। बाजार का हाल ऐसा है कि झूठ का सिक्का सच के नोट को भी खदेडक़र बाहर कर देता है। दस-बारह दिन पहले एक टीवी चैनल पर खबर आई थी- जियो डाटा के बाद जियो का आटा। इसके बाद रिलायंस हरकत में आई और अपने ब्रांड के आटे के धंधे को ढूंढ निकाला। इस बीच पंजाब में जगह-जगह रिलायंस के मोबाइल टॉवरों पर हमले चल ही रहे हैं। झूठ का असर सच से अधिक होता है।

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