राजपथ - जनपथ

छत्तीसगढ़ की धड़कन और हलचल पर दैनिक कॉलम : राजपथ-जनपथ : नया बंगला जरूरी
25-Mar-2021 5:52 PM (130)
छत्तीसगढ़ की धड़कन और हलचल पर दैनिक कॉलम : राजपथ-जनपथ : नया बंगला जरूरी

नया बंगला जरूरी

पूर्व मंत्री राजेश मूणत जल्द ही मौलश्री विहार से जल्द ही रूखसत हो जाएंगे, और वे चौबे कॉलोनी स्थित नए बंगले में शिफ्ट हो जाएंगे। चौबे कॉलोनी स्थित उनके नए बंगले का निर्माण कार्य चल रहा है, और दीवाली के आसपास उनकी वहां शिफ्टिंग की योजना है। दरअसल, मौजूदा निवास स्थान मौलश्री विहार के शहर से दूर होने के कारण मूणत अपने क्षेत्र के मतदाताओं और कार्यकर्ताओं से मेल-मुलाकात नहीं कर पा रहे थे।

यही वजह है कि उन्होंने मौलश्री विहार के अपने बंगले को छोडक़र अपने विधानसभा क्षेत्र में ही रहने का फैसला लिया है। मौलश्री विहार का बंगला उन्होंने सरकारी योजना के तहत खरीदा था। उन्होंने अपने बंगले से सटे दिवंगत पूर्व नेता प्रतिपक्ष महेन्द्र कर्मा के खाली प्लाट को खरीदकर भव्य रूप दिया था।

बंगले के ठीक सामने पूर्व सीएम रमन सिंह का भी मकान है, और आसपास पार्टी के कई प्रमुख नेता रहते हैं। बावजूद उन्होंने बंगला छोडक़र चौबे कॉलोनी में रहने का फैसला लिया है। चौबे कॉलोनी, रायपुर पश्चिम विधानसभा के केन्द्र में स्थित है। विधानसभा चुनाव में हार के बाद वापसी के लिए क्षेत्र में सक्रिय रहकर कार्यकर्ता और आम लोगों से मेलजोल बढ़ाने की जरूरत है। ऐसे में पार्टी के लोगों को मूणत का बंगला बदलने का फैसला सही लग रहा है।

आसमान से गिरे, खजूर पर अटके

आंध्रप्रदेश से सटे जिले में पदस्थ रहे दूर संचार सेवा के अफसर का तबादला महाराष्ट्र की सीमा से सटे जिले में हो गया। तबादला होना कोई असामान्य बात नहीं है। अफसर पिछले कुछ समय से रायपुर में किसी अहम जगह पर पोस्टिंग के लिए प्रयासरत थे। वैसे भी उनकी सेवा से आए लोग छत्तीसगढ़ सरकार में मलाईदार पदों पर ही रहे हैं। कुछ इसी तरह की इच्छा, इनकी भी थी। मगर ऐसा नहीं हो पाया।

आंध्रप्रदेश से सटे जिस जिले में थे वहां भी धीरे-धीरे सेट हो गए थे, लेकिन स्थानीय विधायक ने अपनी पसंद के डिप्टी कलेक्टर को उनकी जगह लाने में सफल रहे। नया जिला अफसर को रास नहीं आ रहा है, और उनके साथ समस्या यह है कि ऊपर तक पहुंच होने के बावजूद उन्हें मनमाफिक पोस्टिंग नहीं मिल पा रही है। उनसे जुड़े लोग इसको गृहनक्षत्र से जोडक़र देख रहे हैं।

फिलहाल तो नहीं दिखते शांति के आसार

नारायणपुर में आईईडी विस्फोट कर डीआरजी जवानों की बस को उड़ाने की वारदात तब हुई है जब सप्ताह भर पहले ही नक्सलियों ने सरकार के साथ शांति वार्ता करने की पेशकश की थी। सरकार उस प्रस्ताव को ठोस नहीं मान रही थी लेकिन प्रतिक्रिया हर बार की सकारात्मक ही थी। कहा गया कि देश के संविधान पर आस्था व्यक्त करें और हिंसा का रास्ता छोड़ दें। सरकार के पास किसी व्यक्ति के माध्यम से कोई पत्र उन तक तो पहुंचाया नहीं गया था लेकिन मीडिया के जरिये नक्सल संगठनों के बीच यह प्रतिक्रिया जरूर पहुंची होगी। इन दिनों बस्तर में ही एक शांति यात्रा भी निकली हुई है, जिसे नक्सल संगठनों ने सरकारी फंडिंग से हो रही वार्ता कह दिया है, यानि इससे कुछ निकलने की संभावना नहीं है।

दूसरी ओर अधिकारियों ने यह चौंकाने वाली जानकारी दी है कि जिस जगह पर विस्फोट हुआ वहां सर्चिंग की गई थी। किसी तरह के भूमिगत विस्फोटक के दबाये जाने का सुराग खोजी दस्ते को नहीं मिला। शायद नक्सलियों ने आईईडी को प्लास्टिक के डिब्बे में पैक किया, फिर उसके ऊपर कार्बन पेपर लपेट दिया। मेटल डिडेक्टर इसी वजह से उसे सर्च नहीं कर पाया।

पुलिस ने यह भी बताया है कि पास के गांव में एक मेला लगा हुआ है इसलिये कुछ लोग जो ग्रामीणों के वेशभूषा में आसपास टहलते दिखे उन पर कोई संदेह नहीं हुआ। 

शांति वार्ता की बातचीत के लिये रूचि दिखाने के बीच हुए हमले से तो लगता है कि नक्सल समस्या का समाधान निकालना इस सरकार के लिये भी उतना ही चुनौती भरा है, जितना पहले की सरकारों के लिये था। शांति वार्ता की संभावना फिर धूमिल हो गई। 

कोरोना रोकने के लिये पहना, पर टीबी से भी बच गये

देशभर में कल विश्व क्षय रोग दिवस मनाया गया। छत्तीसगढ़ सहित देशभर के कई जगहों से खबरें हैं कि पिछले साल, बीते वर्षों के मुकाबले नये टीबी मरीजों की संख्या में कमी आई। स्वास्थ्य शोध एजेंसी लांसेट का भी यही निष्कर्ष है। कारण बताया गया है कि लोगों ने मास्क को अपनी आदत में शामिल किया। टीबी एक ऐसी बीमारी है जिसमें खांसी, खरार आती हैं। बातचीत के दौरान ड्रापलेट (छोटे कण) तो हवा में तैरते ही हैं। इससे टीबी फैलता है। कोरोना वायरस से बचाव के लिये जब मास्क पहनना और शारीरिक दूरी बनाये रखना जरूरी किया गया तो इसके पीछे भी वजह यही है। मास्क पहनकर जब कोई निकलता है तो से यह सुनिश्चित करता है कि बीमारी को फैलाने में वह मदद नहीं कर रहा। 

कुछ माह पहले जब कोरोना संक्रमण का असर कम होने लगा था लोगों ने मास्क त्याग दिया। अब भी बहुत से लोग इसे गले में लटकाकर चलते हैं और सही जगह पहनने के लिये टोके जाने का इंतजार करते हैं। जुर्माने का तो ज्यादा खौफ नहीं है।

देश के कई बड़े शहरों में वायु प्रदूषण इतना अधिक है कि उसे दुनिया के सर्वाधिक प्रदूषित शहरों में गिना जाता है। रायपुर शहर भी एक बार इनमें शीर्ष पर आ चुका है। मास्क पहनें तो यह प्रदूषित हवा भी सेहत को कम नुकसान पहुंचायेगी।

आनन-फानन एफआईआर का रद्द होना

अमूमन ऐसा कम होता है कि पुलिस कोई एफआईआर दर्ज करे और फिर तुरत-फुरत जांच करके उसे खारिज भी कर दे। मगर मंदिर हसौद में पुलिस को ऐसा करना पड़ा। राममंदिर की चंदा वसूली में गड़बड़ी को लेकर किसी ने शिकायत की थी। इसके बाद चंदा वसूली से जुड़े लोगों के बीच विवाद बढ़ा। एक ने आकर थाने में भाजपा के मंडल अध्यक्ष के खिलाफ एफआईआर दर्ज करा दी। पुलिस ने नामजद अपराध दर्ज किया और कई धारायें लगा दीं। शिकायत करने वाले का आरोप था कि उसके साथ अध्यक्ष ने गाली गलौच, मारपीट की। अब विपक्ष में बैठी भाजपा कार्यकर्ताओं ने तेवर दिखाये। वे धरने पर थाने के सामने ही बैठ गये। कहा-शिकायत झूठी है, एफआईआर रद्द करो।

ऐसे मामलों में पुलिस कहती है- जांच होगी, तब देखेंगे, या फिर- कोर्ट में सुलझा लेना। पर हंगामे के बीच दबाव इतना बढ़ा कि पुलिस ने आनन-फानन जांच की और यह निष्कर्ष निकाला कि शिकायत झूठी थी और इसके बाद एफआईआर रद्द भी कर दी गई। भाजपा का संगठन एकजुट हुआ, मामला राममंदिर का भी था, तो वे अपनी बात मनवा सके। पर सवाल पुलिस की भूमिका पर भी है। यूं तो वह प्राय: मामूली मारपीट, गाली गलौच पर एफआईआर दर्ज करने में आनाकानी करती है और लिखित शिकायत लेकर लौटा देती है, पर इस मामले में उसने क्यों फुर्ती दिखाई और जब दिखाई तो उतनी ही तेजी से बैक फुट पर क्यों आ गई? कहीं उसे ऐसा तो नहीं लगा कि विपक्ष में बैठे लोगों के खिलाफ एफआईआर लिखने से उन्हें ऊपर से पीठ थपथपाई जायेगी?

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