राजपथ - जनपथ

छत्तीसगढ़ की धड़कन और हलचल पर दैनिक कॉलम : राजपथ-जनपथ : ऐसे निपटा निकाय चुनाव विवाद
24-Nov-2021 5:18 PM (174)
छत्तीसगढ़ की धड़कन और हलचल पर दैनिक कॉलम : राजपथ-जनपथ : ऐसे निपटा निकाय चुनाव विवाद

ऐसे निपटा निकाय चुनाव विवाद

नगरीय निकाय चुनाव का बिगुल बज चुका है। विपक्षी दल भाजपा ने ऐसे अफसरों पर निगरानी रखना शुरू कर दिया है, जो कि कांग्रेस के नेताओं के करीबी माने जाते हैं। इन अफसरों के खिलाफ शिकायत की तैयारी चल रही है। चुनाव में तो अफसरों के खिलाफ शिकवा-शिकायतें  होती रहती हैं। कई बार ऐसे मौके भी आते हैं, जब आयोग के अफसर पशोपेश में पड़ जाते हैं।

ऐसा ही एक मामला वर्ष-2009 में खरसिया नगर पालिका चुनाव में भी आया था। तब खरसिया के स्थानीय विधायक, और दबंग कांग्रेस नेता नंदकुमार पटेल ने साफ शब्दों में कह दिया था कि खरसिया के रिटर्निंग ऑफिसर तहसीलदार को हटाया जाए, अन्यथा कांग्रेस चुनाव का बहिष्कार कर देगी। वहां के तहसीलदार को रमन सरकार के मंत्री अमर अग्रवाल का करीबी माना जाता था। और उनकी वजह से चुनाव में धांधली की आशंका जताई जा रही थी। मगर अमर अग्रवाल ने तहसीलदार को हटाने के पक्ष में नहीं थे, और उन्होंने अपनी प्रतिष्ठा का प्रश्न बना लिया था।

नंदकुमार पटेल कलेक्टर से मिलने के बाद तत्कालीन निर्वाचन आयुक्त शिवराज सिंह से मिले। और रिटर्निंग ऑफिसर को लेकर अपनी शिकायतें बताई। शिवराज सिंह ने पटेल की बातें ध्यान से सुनी, और उनकी कुछ आपत्तियों को जायज माना। मगर अमर अग्रवाल को भी नाराज नहीं करना चाहते थे। लिहाजा, उन्होंने बीच का रास्ता निकाला, और आदेश दिया कि 20 हजार से अधिक आबादी वाले नगर पालिकाओं में डिप्टी कलेक्टर रिटर्निंग ऑफिसर होंगे। इसके बाद न सिर्फ खरसिया बल्कि चार और नगर पालिकाओं के रिटर्निंग ऑफिसर बदल गए। और दोनों ही नेता संतुष्ट हो गए। चुनाव बिना किसी विवाद के निपट गया।

छत्तीसगढ़ राज्य बनने के बाद पहली बार नगरीय निकाय चुनाव हुए तो आयुक्त डॉ. सुशील त्रिवेदी, तत्कालीन सीएस एके विजयवर्गीय के साथ हेलीकॉप्टर से पूरे प्रदेश का दौरा करते थे। उनके तामझाम, और दिशा निर्देशों से कलेक्टर हलाकान रहते थे। डॉ. त्रिवेदी के बाद पूर्व सीएस शिवराज सिंह निर्वाचन आयुक्त बने।  पूर्व सीएस शिवराज सिंह तो चुनाव से पहले सिर्फ एक बार कलेक्टर-एसपी की बैठक लेने कक्ष से बाहर निकले, और इसके बाद पूरा चुनाव कमरे में ही निपटा दिया। वो हमेशा अफसरों के मार्गदर्शन के लिए उपलब्ध रहते थे, और शिकायतकर्ताओं को भी पूरा मान देते थे। यही वजह है कि उनके कार्यकाल में प्रदेश में निकाय, और पंचायत चुनाव में कही भी विवाद की स्थिति नहीं बनी। शिवराज सिंह ने चुनाव निपटाने के तौर तरीकों से बाद के चुनाव आयुक्तों को भी सीख मिली।

बैठक में शामिल होना मजबूरी

सूरजपुर जिला भाजपा संगठन के नेताओं को शिकायत रही है कि जिले की बैठक में आने से केन्द्रीय राज्यमंत्री, और सांसद रेणुका सिंह परहेज करती हैं। रेणुका के बैठक में नहीं आने की एक प्रमुख वजह जिलाध्यक्ष बाबूलाल गोयल हैं, जो कि पूर्व गृहमंत्री रामसेवक पैकरा के करीबी माने जाते हैं। रेणुका के विरोध के बाद भी बाबूलाल गोयल जिलाध्यक्ष बनने में कामयाब रहे।

बाबूलाल के अध्यक्ष बनने के बाद से रेणुका ने एक तरह से जिला पदाधिकारियों की बैठक में जाना ही छोड़ दिया था। रेणुका सिंह केन्द्र में मंत्री हैं, तो पदाधिकारी चाहते हैं कि वो बैठक में जरूर आए। पार्टी की बैठक हमेशा अग्रसेन भवन में होती रही है। लेकिन इस बार रेणुका कोई  बहाना न बना दे, इसलिए बैठक उनके प्रेम नगर स्थित बंगले में ही रख दी गई है। यह बैठक 27 तारीख को होगी। अब चूंकि घर में बैठक हो रही है इसलिए रेणुका शामिल होने से मना नहीं कर सकती हैं।

दोने का महुआ...

ननकी राम कंवर, नंदकुमार साय और स्व. अजीत जोगी जैसे नेता शराब को आदिवासियों की बर्बादी का बड़ा कारण मानते हैं। जोगी तो कहते थे कि उन्हें घर में जो पांच बोतल महुआ या चावल की शराब बनाने की छूट मिली है वह भी खत्म कर देनी चाहिये। इस पर कोशिश हुई पर जैसे ही कुछ समय के लिये इसे बंद किया गया, अंग्रेजी बेचने वाले कोचिये हावी हो गये। शराब रीति-रिवाज और व्यवहार में बना हुआ है। बस्तर, जशपुर के आदिवासी बाहुल्य इलाकों में ही नहीं बल्कि शहरी समाज में भी। यदि सरकार शराबबंदी के अपने चुनावी वादे को लागू कर देगी तो होम मेड शराब की बिक्री बढ़ जायेगी। इस पर बैन लगाने का विचार वोटों के नजरिये से भी जोखिम भरा है। बिहार में नीतिश कुमार सरकार ने शराबबंदी लागू की है पर वह कामयाब नहीं हुई है। आज ही वहां के एक भाजपा सांसद का बयान आया है कि बैन हटना चाहिये। इससे शराब की अवैध खपत बढ़ी है। जिन्हे पीना है वे पुलिस की मदद ले रहे हैं। राबड़ी देवी ने कल एक वीडियो शेयर किया था जिसमें फ्लाइट से दिल्ली से पटना पहुंची बरात के कमरों को पुलिस छान रही है। शराब बिक्री बंद करना, नहीं करना, क्या करना है- सरकार समझे। बस, हम एक तस्वीर शेयर कर रहे हैं,  बस्तर की। अतिथि को दोने में ऐसे भरकर महुआ पिलाई जाती है।

खारून नदी का झाग

खारून नदी को राजधानी रायपुर की जीवनरेखा कहते हैं। इस नदी में वाटर ट्रीटमेंट प्लांट शुरू करने की नगर निगम की योजना ठंडे बस्ते में है। कुछ दिन पहले ही इस पर ख़बर चली थी। हर महीने नगर निगम के प्रभारी पर 10 लाख रुपये जुर्माना रोपित करने का आदेश एनजीटी ने पर्यावरण मंडल को दे रखा है। पिछले कुछ दिनों से खारून नदी का पानी झाग से भरा हुआ और मटमैला है। कार्तिक पूर्णिमा के दिन सीएम ने भी यहां स्नान किया। पर्यावरण विभाग के अधिकारी बचाव में यह कह रहे हैं कि ठंड के दिनों में ऐसा होता है। पर वे यह भी मानते हैं कि पानी प्रदूषित है। इसी बात पर तसल्ली कर ली जाये कि खारून में कम से कम  पानी तो है, नदी सूखी नहीं है।

अनुशासित भाजपायी...

किरंदुल से विशाखापट्टनम के बीच चलने वाली ट्रेन में एचएलबी कोच की सुविधा शुरू कर दी गई है। रेलवे की की कोई सुविधा यानि केंद्र की भाजपा सरकार की उपलब्धि। लिहाजा बीजेपी के कार्यकर्ताओं ने एलएचबी कोच से पहली बार सफर करने वाले यात्रियों का स्वागत किया। पूर्व सांसद दिनेश कश्यप, कई पूर्व विधायक और भाजपा के अनेक नेता इस मौके पर मौजूद थे। आगे की खबर यह है कि स्टेशन में घुसने वाले सभी लोगों ने प्लेटफॉर्म टिकट कटाई। प्रेस नोट के साथ टिकट का शॉट भी शेयर किया।

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