राजपथ - जनपथ

छत्तीसगढ़ की धड़कन और हलचल पर दैनिक कॉलम : राजपथ-जनपथ : पुलिस की ढि़लाई की चर्चा
08-Dec-2021 5:42 PM (131)
छत्तीसगढ़ की धड़कन और हलचल पर दैनिक कॉलम : राजपथ-जनपथ : पुलिस की ढि़लाई की चर्चा

पुलिस की ढि़लाई की चर्चा

दो समुदायों के युवकों से उपजे दंगे के बाद से कवर्धा प्रशासनिक और सियासी हल्के में अब भी तनावग्रस्त शहर बना हुआ है। दंगे के बाद से एक वर्ग सभाओं के जरिये अपनी ताकत जुटाने के लिए जोर मार रहा है। हाल ही में राज्य सरकार ने दंगे से निपटने में नाकामी का आरोप झेल रहे एसपी मोहित गर्ग को बटालियन के लिए रूखसत भले ही कर दिया, लेकिन पुलिस की बैठकों में विशेषकर शहर की शांति समिति में अब भी पुलिस की ढि़लाई पर अफसरों को तीखे शब्दबाण सुनने पड़ रहे हैं। सुनते हैं कि दूसरी मर्तबा के एसपी उम्मेद सिंह को भी लोगों की जुबानी पुलिस की आलोचना सुननी पड़ी। वैसे राहत की बात रही कि शांति समिति के तमाम सदस्यों ने एक स्वर में एसपी को शहर की सुकून लौटाने में पूरा साथ देने का वादा किया। सरकार की मंशा भी यही है कि उम्मेद के कवर्धा पोस्टिंग से पिछले हादसों को जमींदोज किया जाए। चर्चा है कि मोहित गर्ग के तबादले के बाद थाना प्रभारियों के जुबान से उनकी खामियों को अब खुलकर गिनाया जा रहा है।

प्रधानमंत्री के भाई का प्रवास

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के छोटे भाई प्रहलाद मोदी 3 दिन के लिए छत्तीसगढ़ प्रवास पर थे। वे देशभर का दौरा करते रहते हैं। छत्तीसगढ़ भी साल में एकाध बार तो आ ही जाते हैं। इस बार भी वे दुर्ग, भिलाई और बिलासपुर गये। उनका एक बड़ा संगठन है अखिल भारतीय उचित मूल्य दुकान डीलर्स महासंघ। इसके वे राष्ट्रीय उपाध्यक्ष हैं। उन्हें भी समर्थकों की भीड़ पसंद है। साहू समाज छत्तीसगढ़ अपनी बिरादरी का होने की वजह से उनके स्वागत में सामने रहता है। इसी साल फरवरी में उन्होंने लखनऊ एयरपोर्ट पर धरना दे दिया था। सुरक्षा अधिकारियों के लिए उन्हें मनाना कठिन हो गया था। दरअसल, उनकी शिकायत थी कि अलग-अलग जिलों से आ रहे उनके समर्थकों को एयरपोर्ट तक आने से रोक दिया गया। अधिकारियों ने उन्हें बताया कि प्रधानमंत्री कार्यालय से ही ऐसा आदेश आया है। तब उनका बयान था कि गुंडागर्दी कहीं की नहीं चलेगी, चाहे वह पीएम हाउस की ही क्यों ना हो। मतलब यह है प्रह्लाद जी के साथ प्रधानमंत्री मोदी का नाम जुड़ा जरूर है लेकिन उनका रास्ता पूरी तरह से अलग है। इसलिए अगर वे छत्तीसगढ़ आते हैं और उनके स्वागत में मोदी को चाहने वालों की भीड़ नहीं पहुंचती तो इसकी वजह समझने में कोई दिक्कत नहीं होनी चाहिये।

भाजपा में अनुशासन का संकट

जनपद पंचायत बलरामपुर में भाजपा का भारी बहुमत है। वहां 18 सदस्यों में से 15 भाजपा से हैं। ऐसे में जो निर्वाचित अध्यक्ष और उपाध्यक्ष हैं, उनकी कुर्सी बेहद सुरक्षित होनी चाहिये थी। पर ऐसा हुआ नहीं। भाजपा के ही जनपद सदस्यों ने अविश्वास प्रस्ताव लाकर इन दोनों को संकट में डाल दिया है। शायद अध्यक्ष-उपाध्यक्ष को अपने नेताओं तक इस अनुशासनहीनता की खबर पहुंचाने का कोई अनुशासित तरीका भी नहीं सूझा। अध्यक्ष-उपाध्यक्ष ने अपने समर्थकों के साथ रैली निकाली और जिला भाजपा कार्यालय जाकर अध्यक्ष के नाम पर ज्ञापन सौंपा। मतलब पूरे शहर ने देखा कि उनकी पार्टी के भीतर क्या चल रहा है।

आत्मानंद स्कूलों का नामकरण

प्रदेश में कई दानदाताओं के नाम पर ऐसे स्कूल चल रहे हैं, जिन्हें आत्मानंद अंग्रेजी माध्यम उतकृष्ट अंग्रेजी स्कूल के रूप में उन्नत किया गया है। कई जगहों पर यह विवाद खड़ा हो रहा है कि स्कूल का नया नाम क्या हो, जैसा रायगढ़ में हुआ। यहां के नटवर स्कूल को स्वामी आत्मानंद योजना के अंतर्गत लिया गया है। अधिकारियों ने पुराना बोर्ड हटाकर भवन के ऊपर स्वामी आत्मानंद सरकारी इंग्लिश मीडियम स्कूल की नई तख्ती लगा दी। लोगों ने इस बात पर बेहद आपत्ति की। जिला शिक्षा अधिकारी ने बात सुनी नहीं। एसडीएम के पास शिकायत करने गये तो उन्होंने तो अंदर करने की ही धमकी दे दी। नाराज सर्वदलीय मंच के लोग कलेक्टर से मिलने पहुंचे। कलेक्टर ने रास्ता सुझाया और बात बन गई।

दरअसल, जब आत्मानंद अंग्रेजी स्कूलों की घोषणा हुई थी तभी ऐसी स्थिति में क्या करना है, परिपत्र जारी करके बताया जा चुका है। इसमें था कि जिन स्कूलों का नामकरण नहीं हुआ है उन्हें स्वामी आत्मानंद के नाम से किया जाये। जिन स्कूलों का नाम पहले से किसी विशिष्ट व्यक्ति पर रखा जा चुका है उनमें सिर्फ यह जोडऩा है कि यह स्कूल स्वामी आत्मानंद योजना के अंतर्गत संचालित है। अधिकारियों ने यह आदेश देखने की तकलीफ नहीं उठाई और अप्रिय स्थिति बनी।

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